चक्र है, पूरा पैटर्न है, समझो और जज्ब कर लो
शेयर बाज़ार के चक्रों को जज्ब कर लिया और उसकी दशा-दिशा पकड़ ली तो समझो कि पहला अध्याय पूरा कर लिया। छमाही, तिमाही से लेकर महीने, हफ्ते व दिन तक का चक्र। महीने के पहले हफ्ते में भरपूर जोश व उत्साह रहता है। ट्रेडर पुरानी पोजिशन को बराबर करने के बाद नई पोजिशन शुरू करते हैं। दूसरा हफ्ता शांत रहता है। तीसरे हफ्ते से पोजिशन को रोल या स्क्वायर करना शुरू हो जाता है। डेरिवेटिव सौदों केऔरऔर भी
क्या-क्या नहीं करना, हमेशा रहे इसका ध्यान!
जीवन में जो चीजें नहीं करनी हों, उनका पता हो (जैसे – हिंसा नहीं करनी, चोरी नहीं करनी, झूठ नहीं बोलना, नशा नहीं करना और व्यभिचार नहीं करना) तो हर तरफ कुशल-मंगल व सुकून रहता है। इसी तरह शेयर बाज़ार में पता हो कि कैसी कंपनियों या स्टॉक्स से बचकर रहना है तो निवेश बड़ा सुखदायी व लाभप्रद होता है। जीवन में ऐसा कुछ नहीं करना चाहिए जिससे दूसरों को तकलीफ व परेशानी हो और शेयर बाज़ारऔरऔर भी
ट्रेडर बहे प्रवाह के साथ, निवेशक चले विपरीत
शेयर बाज़ार के सफल ट्रेडर को हमेशा प्रवाह के साथ चलना होता है। तभी वह कमाई कर पाता है। अगर कोई ट्रेडर प्रवाह के विपरीत चलने की ‘क्रांतिकारिता’ दिखाता है तो उसकी ट्रेडिंग पूंजी बिना कोई समय गवांए शहीद हो जाती है। इसलिए कहा जाता है कि बाज़ार हमेशा सही होता है और ट्रेडर को उससे फालतू तर्क-वितर्क और बहस नहीं करनी चाहिए। लेकिन लम्बे समय के निवेशक को कतई इस तरह की भेड़चाल का शिकार नहींऔरऔर भी
शेयरों का स्वभाव तो सूचकांकों का चक्र अलग
शेयर बाजार चक्रों में चलता है। इसको ध्यान में रखते हुए ही टेक्निकल एनालिसिस में मूविंग औसत के दिन तय किए जाते हैं। मकसद होता है कि चक्रों के उतार-चढ़ाव को सही तरीके से पकड़ा जाए। गलत हिसाब लगाया तो धोखा। मसलन, एक्पोनेंशियल मूविंग औसत 5, 13 व 20 दिन का लेना चाहिए, जबकि सिम्पल मूविंग औसत 50, 75, 100, 200, 300 व 365 दिनों का कारगर होता है। फिर यह भी ध्यान रखें कि बाज़ार मेंऔरऔर भी







