अमेरिका के सिलिकॉन वैली बैंक (एसवीबी) का संकट अभी तक पूरी तरह मिटा नहीं है। वैसे, वहां के केंद्रीय बैंक, फेडरल रिजर्व ने अलग से 25 अरब डॉलर का बैंक टर्म फंडिंग प्रोग्राम (बीटीएफपी) बना दिया है। हर संकट से निपटने की पूरी तैयारी है। लेकिन बीते शुक्रवार को बैंक बंद हुआ तो भारतीय स्टार्ट-अप उद्यमों में अफरातफरी मच गई। कारण, चूंकि एसवीबी इन्हें बिना किसी अमेरिकी सोशल सिक्यूरिटी नंबर या इनकम टैक्स आइडेंटीफिकेशन नंबर के खातेऔरऔर भी

पहले फेडरल रिजर्व की चेयरमैन भी रह चुकी अमेरिका की वित्त मंत्री जैनेट येलेन ने साफ कर दिया कि सरकार करदाताओं के धन से सिलिकॉन वैली बैंक का बेलआउट नहीं करेगी क्योंकि वह व्यवस्थागत रूप से महत्वपूर्ण नहीं है। लेकिन सरकार की तरफ से बैंकों को संकट से उबारने और जमाकर्ताओं को बचाने के पूरे इंतज़ाम किए ही जा रहे थे कि छह और बैंकों पर खतरे की घंटियां बजने लगी है। इनमें क्रेडिट सुइस जैसा बैंकऔरऔर भी

कितनी विचित्र बात है कि दुनिया की सबसे बड़ी व विकसित अर्थव्यवस्था अमेरिका तक में किसी बैंक के डूबने पर सारे जमाकर्तोओं का सारा धन उन्हें फौरन वापस नहीं मिलता। मसलन, अमेरिका के 16वें सबसे बड़े बैंक – सिलिकॉन वैली बैंक (एसवीबी) की महज 11% जमा का ही बीमा सरकारी एजेंसी फेडरल डिपॉज़िट इंश्योरेंस कॉरपोरेशन (एफडीआईसी) ने कर रखा है। जमाकर्ताओं का बाकी धन तब मिलेगा, जब कोई दूसरा बैंक एसवीबी का अधिग्रहण करेगा। फिलहाल अमेरिका कीऔरऔर भी

अमेरिका का 175 अरब डॉलर डिपॉज़िट वाला सिलिकॉन वैली बैंक डूबा क्यों? मालूम हो कि यह अमेरिका का 16वां सबसे बड़ा बैंक था और इसके पास दिसंबर 2022 के अंत में कु 209 अरब डॉलर की आस्तियां थी। लेकिन इसने जब निकलती जमा की भरपाई के लिए अमेरिकी सरकार के ट्रेजरी बॉन्ड बेचने की कोशिश की तो उसे एक झटके में 1.8 अरब डॉलर की चपत लग गई। असल में बैंक अपनी बचत सुरक्षित रखने के लिएऔरऔर भी

दुनिया के आर्थिक व वित्तीय पटल पर इस समय भयंकर अनिश्चितता छाई हुई है। कब कहां से अचानक कोई आफत टपक पड़े, कहा नहीं जा सकता। इसकी शुरुआत दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था व वित्तीय केंद्र अमेरिका से होती है। ताजा मामला यह है कि अमेरिका की कुछ सबसे बड़ी टेक्नोलॉज़ी कपनियों को ऋण देनेवाला सिलिकॉन वैली बैंक संकट के बाद शुक्रवार को बंद हो गया। यह साल 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के बाद बैठने वालाऔरऔर भी