परसेप्शन नहीं, भाव डॉलर के प्रवाह पर
व्यापारी वस्तुओं में ट्रेड करता है। माल खरीदता और बेचता है। लेकिन शेयर बाज़ार का ट्रेडर ऐसे किसी माल या वस्तु में नहीं, बल्कि लिस्टेड कंपनियों के स्टॉक्स को ट्रेड करता है जो पूरी तरह डीमैट हो चुके हैं जिन्हें महसूस किया जा सकता है, हाथ में पकड़कर दिया या लिया नहीं जा सकता। वह कंपनियों के स्वामित्व के अंश में ट्रेड करता है, जिसका भाव हर पल परसेप्शन के आधार पर बदलता रहता है। लेकिन आजकलऔरऔर भी
गति रहे मध्यम, ज्यादा उछल-कूद नहीं!
व्यापारी कभी मगजमारी नहीं करता कि किसी चीज के दाम क्यों बढ़े या घट गए। उसे तो अपने मार्जिन से मतलब है। बाज़ार में है तो इतना जागरूक जरूर रहता है कि दाम घट-बढ़ क्यों रहे हैं। लेकिन इससे ज्यादा नहीं। दाम बढ़े तो उसका असर उत्पादक और ग्राहक पर पड़ेगा। व्यापारी को तो एक निश्चित प्रतिशत ही कमीशन या मार्जिन मिलेगा। शेयर बाजार के ट्रेडर को भी अपने पेशे की इस हकीकत को जज़्ब कर लेनाऔरऔर भी
ट्रेडिंग से निवेश तक, विकल्प हैं बहुतेरे!
किराने के बगल में किराने की दूसरी दुकान, ज्वैलर के बगल में कई ज्वैलर, हार्डवेयर व पेंट की एक नहीं, अनेक दुकानें। आसपास दवा की दुकानों की भरमार। आखिर इतनी सारी दुकानों को इतने सारे ग्राहक कहां से मिल जाते हैं कि सब का धंधा चौकस चलता रहता है? इस सवाल का ठोस जवाब भले ही न मिल पाए, लेकिन हकीकत यही है कि सभी दुकानदार मजे में धंधे के दम पर घर-परिवार चलाते हैं। यही शांतिऔरऔर भी
सलीका व्यापारी का लागू करें ट्रेडिंग में!
अपने यहां खेती के बाद सबसे ज्यादा रोज़गार व्यापार में मिला हुआ है। गांव-गिरांव में तो अब भी बिजनेस का मतलब व्यापार समझा जाता है। बहुत हुआ तो ईंट-भट्ठा लगा लिया। मैन्यूफैक्चरिंग लोगों में जेहन में इससे ज्यादा पैठ नहीं बना पाई है। यकीनन, शहरों से सटे इलाकों और कस्बों में करोड़ों छोटी-छोटी इकाइयां लग गई हैं जो भांति-भांति की औद्योगिक खपत वाली चीजें बनाती हैं। लेकिन खेती से भागते आम लोगों में प्रभावी सोच व्यापार कीऔरऔर भी
ग्यारह साल, कमाल 58 गुना रिटर्न का!
दुनिया में निवेश के भांति-भांति के तरीके और शैलियां हैं। लेकिन अच्छी व संभावनामय कंपनियों के शेयर समय रहते कम भाव पर खरीद लेने की शैली ‘वैल्यू इन्वेस्टिंग’ का कोई तोड़ नहीं है। यह बात ‘अर्थकाम’ खुद करीब साढ़े बारह साल के अपने अनुभव से दावे के साथ कह सकता है। मसलन, हमने अपने लॉन्च के करीब साल भर बाद 18 अप्रैल 2011 को इसी कॉलम में (तब यह कॉलम सबके लिए खुला था) एक स्मॉल-कैप कंपनीऔरऔर भी









