शेयर बाज़ार की हवाबाज़ी पड़ रही ठंडी
बीते साल 1 दिसंबर 2022 तो जब से निफ्टी 18,885 अंक के ऊपर गया, तभी से हल्ला था कि वो कभी भी 20,000 अंक के पार जा सकता है। लेकिन चार महीने बीतते-बीतते भी ऐसा होने के कोई आसार नहीं दिख रहे। जिन विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के लाए धन पर शेयर बाज़ार चढ़ा था, वे खरीदने के बजाय बराबर बेचे जा रहे हैं। इसलिए हमारे बाज़ार की हवा निकली पड़ी। कारण यह भी है कि छोटे समयऔरऔर भी
वाजिब मूल्य बताता तीन सूत्रीय फॉर्मूला
शेयर बाज़ार की चाल कभी इतनी सीधी-सच्ची नहीं होती कि उस पर आंख मूंदकर सवारी की जा सके। अजीब-सा पेंच है कि अक्सर अच्छे नतीजे घोषित करनेवाली कंपनियों के शेयर गिर जाते हैं, जबकि खराब नतीजे पेश करनेवाली कंपनियों के शेयर चढ़ जाते हैं। दिक्कत यह है कि हम भूल जाते हैं कि शेयरों के भाव और मूल्य, दो अलग-अलग चीजें हैं। लम्बे समय में भाव कंपनी के शेयर के मूल्य या अंतर्निहित मूल्य का पीछा करतेऔरऔर भी
संभावनाएं अपार, मगर हासिल कितना!
भारत संभावनाओं से भरा देश है। इसमें कोई दोराय हो ही नहीं सकती। यहां कमानेवाले लोग अगले करीब पचास साल तक रिटायर्ड लोगों से कहीं ज्यादा रहेंगे। एक अनुमान के मुताबिक भारत की आबादी का मध्यमान साल 2070 तक 29 साल रहेगा। साफ है कि सरकार शिक्षा व स्वास्थ्य की कितनी भी उपेक्षा कर ले, हमारा डेमोग्राफिक डिविडेंड फिलहाल अक्षुण्ण है। गंगा की वेगवती धारा अपनी राह निकाल ही लेती है। भारत के नौजवान रोज़ी-रोजगार के साधनऔरऔर भी
सरकार स्टार्ट-अप्स की स्थिति से संतुष्ट
अभी देश में स्टार्ट-अप्स की क्या स्थिति है? संसद में दी गई ताज़ा जानकारी के मुताबिक वाणिज्य व उद्योग मंत्रालय ने कुल 92,683 स्टार्ट-अप्स को मान्यता दे रखी है। ये उद्यम जनवरी 2016 में सरकार द्वारा शुरू की गई स्टार्ट-अप इंडिया पहल के तहत टैक्स व गैर-टैक्स लाभ पा सकते हैं। सरकार ने खुद की पीठ थपथपाते हुए कहा कि देश में जहां 2016 में मात्र 442 स्टार्ट-अप थे, वहीं 28 फरवरी 2023 तक इनकी संख्या 92,683औरऔर भी









