मोदी सरकार ने दस साल में अवाम पर जमकर टैक्स लगाए और उसे सत्ता तंत्र की सेवा में लगाने के साथ-साथ सरकार का पूंजीगत खर्च बढ़ाने में लगा दिया। इससे जहां अंदर-बाहर सबको दिखाने के लिए सड़कों से लेकर हवाई अड्डों समेत तमाम इंफ्रास्ट्रक्चर चमकने लगा, वहीं सरकारी ठेकों से उसके करीबी लोगों व कंपनियों को अच्छा धंधा मिल गया और इनके कमीशन से इलेक्टोरल बॉन्ड के रूप में भाजपा का खजाना भरता चला गया। लेकिन सुप्रीमऔरऔर भी

शेयर बाज़ार बम-बम कर रहा है। निफ्टी और सेंसेक्स बराबर नई ऊंचाई छू रहे हैं। लेकिन यह तेज़ी तभी जारी रह सकती है जब अर्थव्यवस्था का तेज़ विकास होता रहे और यह तभी संभव है जब मोदी सरकार अब साहसी व गंभीर आर्थिक सुधार लागू करे। देश का उद्योग समुदाय, खासकर बड़ी देशी-विदेशी कंपनियां और सीआईआई व फिक्की जैसे उद्योग संगठन ऊपर-ऊपर आश्वस्त हैं कि कमज़ोर राजनीतिक बहुमत के बावजूद मोदी सरकार देश में तमाम मूलभूत आर्थिकऔरऔर भी

भारत जैसी संभावनाओं से भरी अर्थव्यवस्था बराबर बढ़ती ही रहती है तो शेयर बाज़ार भी बराबर नई ऊंचाइयां छूता रहता है। लेकिन तेज़ी के हर शिखर के दौरान ऊपर-ऊपर तैरते झाग के नीचे तलहटी में कुछ ऐसी कंपनियां होती हैं जो भरपूर संभावनाओं के बावजूद भीड़ और भेड़चाल से दूर पड़ी रहती हैं। करीब छह साल पहले रविवार, 29 जुलाई 2018 की बात है। तब भी दो दिन पहले शुक्रवार को सेंसेक्स और निफ्टी ने नया शिखरऔरऔर भी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवा, महिला, गरीब व किसान की जो चार जातियां गिनाईं, उनकी सरकार इनमें से किसी की भी हितैषी नहीं है। दिक्कत यह है कि वो समूचे बिजनेस समुदाय की भी परवाह नहीं करती। उसे परवाह है तो चंद देशी-विदेशी उद्योगपतियों की, जो उन पर भरपूर चंदा और खजाना लुटाते हैं। साथ ही उनका एजेंडा संघ परिवार के तमाम अकर्मण्य लोगों को कहीं न कहीं सत्ता से जुड़ी कुर्सियों पर एडजस्ट कर देना है।औरऔर भी