निजी क्षेत्र की जीवन बीमा कंपनियों में रिलायंस लाइफ ने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में सबसे अधिक रफ्तार से पॉलिसियां बेची हैं। अनिल अंबानी समूह की इस कंपनी ने अप्रैल-जून 2010 की तिमाही में 4.93 लाख पॉलिसियां बेची हैं। बीमा नियामक संस्था, आईआरडीए (इरडा) के आंकड़ों के मुताबिक, रिलायंस लाइफ ने बीते वित्त वर्ष की इसी अवधि में 4.06 लाख पॉलिसियां बेची थीं। इस तरह से उसने इस बार पहले की अपेक्षा 21 फीसदी अधिकऔरऔर भी

सरकारी कंपनी पावर ग्रिड कॉरपोरेशन बिजली ट्रांसमिशन से जुड़े अपने टावरों की बची जगह टेलिकॉम कंपनियों को लीज पर देने जा रही है। इससे उसे बिना कुछ अतिरिक्त खर्च किए नई आय मिलने लगेगी। इसलिए अब कंपनी का मूल्यांकन नए सिरे से हो सकता है और उसके शेयरों में अच्छी-खासी बढ़ोतरी हो सकती है। कंपनी की इस योजना को उसके निदेशक बोर्ड ने सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। यह जानकारी खुद कंपनी के चेयरमैन व प्रबंध निदेशकऔरऔर भी

टेक्सटाइल उद्योग की विभिन्न कंपनियों के शेयर इस समय दबे-दबे से चल रहे हैं। ग्रासिम इंडस्ट्रीज का पी/ई अनुपात 9.65 चल रहा है तो आलोक इंडस्ट्रीज का 4.45, गार्डन सिल्क का 6.60 और जेबीएफ इंडस्ट्रीज का 8.15 चल रहा है। इसलिए दूरगामी लक्ष्य के लिए तो इन सभी में निवेश किया जा सकता है। लेकिन आईसीआईसीआई सिक्यूरिटीज का आकलन है कि जेबीएफ इंडस्ट्रीज थोड़े समय में ही 10% तक का रिटर्न दे सकती है। जेबीएफ इंडस्ट्रीज (बीएसईऔरऔर भी

याददाश्त जितनी छोटी होती जाती है, हमारे अहसास उतने लंबे होते चले जाते हैं। हमारे लिए हमारा पूरा जीवन उसी छोटी पोटली में सिमट जाता है। लगता ही नहीं कि इसके अलावा भी हमने कुछ और देखा-परखा है।और भीऔर भी

व्यक्तिगत जीवन में गड़े मुर्दे उखाड़ने का कोई मतलब नहीं होता। लेकिन देश के जीवन में इतिहास और उससे जुड़े ‘महात्माओं’ का निर्मम मूल्यांकन जरूरी होता है, उन्हें कब्र तक से खोदकर निकालना पड़ता है।और भीऔर भी

ज़िंदगी को संवारने में बड़ी जद्दोजहद करनी पड़ती है। इस बीच थकने-हारने पर रोना आए तो रो लेना चाहिए जी भर। आखिर रोने में क्या बुराई! रोने से मन हल्का होता है और हल्का मन उड़ने लगता है, हल्के-हल्के।और भीऔर भी

राजस्थान के बाडमेर इलाके में बड़े पेट्रोलियम तेल भंडार की मालिक, केयर्न इंडिया शेयर बाजार से डीलिस्ट हो सकती है। समाचार एजेंसी प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (पीटीओ) के अनुसार वेदांता समूह केयर्न इंडिया की 51 फीसदी हिस्सेदारी 800-850 करोड़ डॉलर (37250 करोड़ रुपए से 39590 करोड़ रुपए) में खरीदने जा रहा है। इस सौदे की औपचारिक घोषणा अगले हफ्ते सोमवार को हो सकती है। कंपनी में नियंत्रकारी स्थिति हासिल करने के बाद वेदांता समूह केयर्न इंडिया कोऔरऔर भी

ठगों से भरी बस्ती में किसी पर विश्वास करना घातक है। तो क्यों न बस्ती ही बदल दी जाए? ऐसा संभव है क्योंकि सहज विश्वास मूल मानव स्वभाव है, जबकि ठगी समाज की देन है। और, समाज को बदला जा सकता है।और भीऔर भी

अचानक उल्लास और उत्साह के बीच आर्थिक मोर्चे से दो बुरी खबरें मिली हैं। जून महीने में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) की वृद्धि दर 13 महीनों के न्यूनतम स्तर 7.1 फीसदी पर पहुंच गई है। यह पिछले साल जून में आर्थिक सुस्ती के बावजूद 8.3 फीसदी थी। दूसरे, कुछ हफ्तों से इकाई में आ गई खाद्य मुद्रास्फीति की दर 31 जुलाई को खत्म सप्ताह में बढ़कर 11.4 फीसदी हो गई है। हालांकि इन दोनों ही नकारात्मक खबरोंऔरऔर भी

बीमा नियामक संस्था, आईआरडीए (इरडा) और पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी के बीच यूलिप (यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस पॉलिसी) को लेकर मची जंग के पटाक्षेप के बाद अब बीमा कंपनियों के लिए संभवत: यूलिप का आकर्षण कम हो सकता है। लिहाजा अब वे यूनिवर्सल लाइफ पॉलिसी (यूएलपी) लाने की संभावनाएं तलाश कर रही हैं। एक उत्पाद में दो फायदे: यूएलपी दरअसल एक उत्पाद में दो प्रकार की पॉलिसियों के फायदे देती है। यह यूलिप व परंपरागत प्लान कीऔरऔर भी