देश की दस सबसे मूल्यवान कंपनियों में से छह के बाजार पूंजीकरण में पिछले हफ्ते 21,720.56 करोड़ रुपए की कमी आई। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी) सबसे ज्यादा नुकसान में रही। सप्ताह के दौरान ओएनजीसी का बाजार पूंजीकरण 9,796.02 करोड़ रुपए घटकर 2,30,869.63 करोड़ रुपए पर आ गया। सॉफ्टवेयर कंपनी इन्फोसिस टेक्नोलॉजीज के बाजार पूंजीकरण में सप्ताह के दौरान 6,481.81 करोड़ रुपए की गिरावट आई और यह घटकर 1,68,880.27 करोड़ रुपए रह गया।औरऔर भी

विश्व बाजार में आने वाले महीनों में भी कच्चे तेल के दाम यदि 100 डॉलर प्रति बैरल के ईदगिर्द ही टिके रहते हैं तो सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) की अंडर-रिकवरी या नुकसान अगले वित्त वर्ष में 98,000 करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है। सार्वजनिक क्षेत्र की तीन प्रमुख ओएमसी हैं – बीपीसीएल, एचपीसीएल और इंडियन ऑयल। ब्रोकर फर्म इंडिया इनफोलाइन (आईआईएफएल) की एक रिपोर्ट में यह अनुमान व्यक्त करते हुए कहा गया है किऔरऔर भी

तीन तरह के लोग होते हैं। एक, जिनके लिए कोई समस्या नहीं होती। दो, जो मानते हैं कि समस्या तो है, पर समाधान नहीं। तीन, जो मानते हैं कि समस्या है और इसे हल भी किया जा सकता है।और भीऔर भी

पिछले दिनों कानून व व्यवस्था से जुड़ी एजेंसियों को मुंबई के पास समुद्री सीमा में कुछ कुख्यात सोमालिया डाकुओं या जल-दस्युओं को धर दबोचने में बड़ी कामयाबी मिली। इन डाकुओं से पूछताछ में कई खतरनाक रहस्य उजागर हुए हैं। इसके अलावा पिछले साल दिसंबर में भी एक भारतीय जहाज जल-दस्युओं के शिकंजे में फंस गया था। बढ़ता आतंक: गत दिनों भी एक भारतीय कंपनी का मालवाहक जहाज अदन की खाड़ी से गुजरते हुए कुख्यात सोमालियाई डाकुओं केऔरऔर भी

शहरी विकास, जल संसाधन और ऊर्जा जैसे मंत्रालयों की योजना व्यवस्था में कमियों के चलते भारत को विदेशों से मिली एक लाख करोड़ रुपए की सहायता राशि का इस्तेमाल नहीं हो सका है। यह जानकारी नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की संसद को दी गई ताजा रिपोर्ट में दी गई है। रिपोर्ट में कहा है, ‘‘31 मार्च 2010 तक देश को मिले विदेशी सहायता राशि में से 1,05,399 करोड़ रुपए का इस्तेमाल नहीं कर पाया है।’’ बहुपक्षीयऔरऔर भी

समस्याओं का होना कोई बुरी बात नहीं, अगर हम उनसे जूझने को तैयार हों। देखें कि कौन-सी समस्या व्यक्तिगत है और कौन-सी व्यवस्था-जन्य क्योंकि इनसे निपटने के तरीके भिन्न होते हैं।और भीऔर भी

पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी निवेशकों के बीच धड़ल्ले से बंट रही निवेश की सलाहों को लेकर परेशान हो गई है। उसने निवेशकों को आगाह किया है कि अगर कोई व्यक्ति एसएमएस, इलेक्ट्रॉनिक या प्रिट मीडिया पर विज्ञापन के जरिए निवेश की सलाह देता है, भले ही वह किसी अनुबंध या इसके बिना यूं ही दे रहा हो, तो वो बाजार भावों को प्रभावित करने और निवेशकों को झांसा देने की कोशिश हो सकती है। इसलिए निवेशकोंऔरऔर भी

स्टैंप ड्यूटी का ज्यादा होना देश के रीयल एस्टेट क्षेत्र में काले धन के पैदा होने का बड़ा कारण है। यह कहना देश के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का। उनके मुताबिक रीयल एस्टेट सौदों में पारदर्शिता लाने की राह में स्टैंप ड्यूटी बहुत बड़ी बाधा है और इस क्षेत्र में काले धन को आने से रोकने के लिए ऐसे शुल्क की दरों को कम करना जरूरी है। राजधानी दिल्ली में आयोजित इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में प्रधानमंत्री ने कहा,औरऔर भी

विदेश कमाने गए भारतीयों द्वारा भेजा जाने वाला आधे से ज्यादा धन देश के ग्रामीण इलाकों को जाता है जो वहां आर्थिक बदलाव और वित्तीय समावेश में योगदान करता है। मनी ट्रांसफर की सेवाएं देनेवाली फर्म वेस्टर्न यूनियन के प्रबंध निदेशक अनिल कपूर के मुताबिक बीते एक दशक में वेस्टर्न यूनियन व इंडिया पोस्ट के जरिए 6.5 अरब डॉलर का धन भारत आया। उनका कहना है कि कंपनी के 55 फीसदी केंद्र अर्ध-शहरी या ग्रामीण इलाकों मेंऔरऔर भी

अमेरिकी सरकार के बांडों में सबसे ज्यादा निवेश रखनेवाले चीन ने वहां अपना निवेश घटाना शुरू कर दिया है, जबकि भारत बढ़ाता जा रहा है। हालांकि मात्रा के लिहाज से भारत का निवेश चीन के सामने कहीं नहीं टिकता। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक अक्टूबर 2010 से जनवरी 2011 के बीच चीन ने अमेरिकी बांडों में अपना निवेश 20.6 अरब डॉलर घटा दिया है। अक्टूबर में यह 1175.3 अरब डॉलर था, जबकि जनवरी मेंऔरऔर भी