यकीनन, आप भी इस बात से इत्तेफाक करेंगे कि शेयर बाजार से पैसे कमाने का आदर्श तरीका है – सबसे कम भाव पर खरीदो और अधिकतम भाव पर बेचकर निकल जाओ। लेकिन व्यवहार में ऐसा हो नहीं पाता क्योंकि जब कोई शेयर अपने न्यूनतम स्तर पर होता है तब हमें लगता है कि यह तो डूब रहा है, अभी और नीचे जाएगा। वहीं, जब शेयर बढ़ रहा होता है तब हमें लगता है कि अभी और ऊपरऔरऔर भी

जब समय का कोई अंत नहीं, तब संभावनाओं का अंत कैसे हो सकता है? हां, पुराने से चिपके रहने का कोई तुक नहीं। सबक लेकर नए को आजमाना जरूरी है। तब तक, जब तक जीवन शेष है, समय शेष है।और भीऔर भी

लोकपाल मसौदा विधेयक के दो संस्करण कैबिनेट को भेजने के सरकार के निर्णय पर ‘आश्चर्य’ जताते हुए गांधीवादी सामाजिक कार्यकर्ता अण्णा हज़ारे ने कहा है कि सख्त लोकपाल कानून बनाने की केन्द्र की कोई मंशा नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर कमजोर कानून बना तो वह 16 अगस्त से फिर अनशन करेंगे। गुरुवार को हज़ारे ने कहा कि सरकार ने बीते अप्रैल में लोकपाल मसौदा समिति का गठन कर वादा किया था कि यह समिति ‘आम सहमति’औरऔर भी

सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में शेयर हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया को चुस्त दुरूस्त बनाने व तेज करने के लिए सरकार ने एक नियमावली (हैंडबुक) पेश की है। यह हैंडबुक केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उप्रकमों (सीपीएसई) और इससे जुड़े विभागों के लिए विनिवेश संबंधी नियमावली है। वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने गुरुवार को राजधानी दिल्ली में इस ‘पब्लिक इश्यू के जरिए विनिवेश पर नियमावली’ शीर्षक की हैंडबुक को जारी किया। उन्होंने कहा कि यह हैंडबुक सीपीएसई, प्रशासित मंत्रालयों औरऔरऔर भी

मध्य प्रदेश पुलिस ने राज्य में सक्रिय सात चिटफंड कंपनियों के खिलाफ धोखाधड़ी की शिकायतों पर एफआईआर दर्ज कर ली है और इन कंपनियों में से तीन के प्रबंधकों को गिरफ्तार भी कर लिया है। जहां ये कंपनियां ज्यादा सक्रिय थीं, वो इलाका वाणिज्य व उद्योग राज्यमंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के पुश्तैनी चुनाव क्षेत्र में आता है। भिंड के एसपी अनुराग ने समाचार एजेंसी ‘भाषा’ को बताया कि जिन चिटफंड कंपनियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है, उनमेंऔरऔर भी

भारतीय कंपनियों को पूरे वित्त वर्ष का टैक्स हर तिमाही थोड़ा-थोड़ा करके जमा करना होता है। पहली तिमाही में अनुमानित सालाना लाभ पर टैक्स का 15 फीसदी, दूसरी व तीसरी तिमाही में 30-30 फीसदी और चौथी तिमाही में बाकी बचा 25 फीसदी टैक्स चुकाना होता है। इसे जमा करने की अंतिम तिथियां 15 जून, 15 सितंबर, 15 दिसंबर और 15 मार्च होती हैं। शेयर कारोबारियों को हर तिमाही एडवांस टैक्स के इन आंकड़ों का बड़ी बेसब्री सेऔरऔर भी

बाजार में भयंकर निराशा का आलम है। निफ्टी 5400 से भी नीचे जा चुका है। विदेशी निवेशकों की तरफ से डंका बजाया जा रहा है कि अगर यह 5300 के नीचे चला गया तो फिर इसे 4700 तक गिरने से रोक पाना मुश्किल होगा। लेकिन इस निराशा के बीच भी आम निवेशकों के लिए नोट बनाने का एक सुनहरा पक्ष उभर रहा है। अभी तक चार बहुराष्ट्रीय कंपनियां डीलिस्टिंग की घोषणा कर चुकी हैं। फिर भी वेऔरऔर भी

सब कुछ यंत्रवत। न थोड़ा इधर, न थोड़ा उधर। गिने-चुने लोगों को छोड़कर सब यही माने बैठे थे कि रिजर्व बैंक मौद्रिक नीति की पहली मध्य-तिमाही समीक्षा में ब्याज दरें 0.25 फीसदी बढ़ाएगा और मुद्रास्फीति को बड़ी चुनौती मानेगा। सो, ऐसा ही हुआ। रिजर्व बैंक ने चलनिधि समायोजन सुविधा (एलएएफ) के अंतर्गत रेपो दर को 7.25 फीसदी से बढ़ाकर 7.5 फीसदी कर दिया है। रिवर्स रेपो दर को चूंकि इससे एक फीसदी कम और एमएसएफ (मार्जिनल स्टैंडिंगऔरऔर भी

करीब दस महीने हमने इसी कॉलम में आईसीआईसीआई सिक्यूटिरीज की रिसर्च रिपोर्ट के हवाले 11 अगस्त को लिखा था कि जीवीके पावर एंड इंफ्रस्ट्रक्चर के शेयर में 20 फीसदी बढ़त की पूरी गुंजाइश है। शेयर तब 43.80 रुपए पर था। ब्रोकरेज फर्म का आकलन था कि यह साल भर में आराम से 53-54 रुपए पर चला जाएगा। हालांकि वो महीने भर में 13 सितंबर 2010 को 51.45 रुपए के शिखर तक चला गया। लेकिन उसके बाद ऐसाऔरऔर भी