ऊपर सतह पर झाग, नीचे असली स्तर!
सरकारी दखल और खर्च अंततः भ्रष्टाचार को ही बढ़ाता है। इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम के खुलासे से यह बात एकदम साफ हो गई। लेकिन मोदी सरकार जीडीपी का जो आंकड़ा पेश करती है, उसमें इससे भी बड़ा लोचा है जिससे देश के 99.99% लोग अनजान हैं। जीडीपी के दो आंकड़े होते हैं। एक नॉमिनल और दूसरा रीयल। नॉमिनल की गणना मौजूदा मूल्यों पर की जाती है जो ऊपर-ऊपर दिखता है जिसमें झाग ही झाग होते हैं। रीयल कीऔरऔर भी
सरकारी खर्च से फूला जीडीपी गुब्बारा!
हमारा जो जीडीपी या अर्थव्यवस्था मार्च 2024 में खत्म वित्त वर्ष 2023-24 में 8.2% की शानदार गति से बढ़ी थी, उसकी विकास दर ठीक तीन महीने बाद जून 2024 में खत्म तिमाही में घटकर 6.7% पर आ गई! यह क्यों हुआ, क्यों यह हुआ? हालांकि सरकारी अर्थशास्त्री इस विकास दर को भी ‘रोबस्ट’ बता रहे हैं। कभी सरकार के आलोचक रहे भारतीय स्टेट बैंक के मुख्य आर्थिक सलाहकार सौम्य कांति घोष ने अपने 800-1000 शब्दों के ताज़ाऔरऔर भी
जीडीपी है ढोलपोल, थोथा चना बाजे घना
मोदी सरकार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही सब कुछ हैं। उनके मंत्रियों-संत्रियों के लिए तो ‘भज गोविंदम’ यही है कि मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई। लेकिन मोदी का जादू धीरे-धीरे टूट रहा है। फिर भी तिलिस्म के दो सूत्र अभी तक धमाल मचाए हुए हैं। एक यह कि दुनिया भर में मोदी का डंका बज रहा है और उन्होंने भारत का बड़ा नाम किया है। गांवों से लेकर शहरों व महानगरों तक तमाम बड़े-बूढ़े इसीऔरऔर भी
अर्थ से महत्वपूर्ण कायदे का काम-धंधा!
निवेश की दुनिया में अब तक के सफलतम शख्स हैं वारेन बफेट। दस दिन पहले 30 अगस्त 2024 को ही वे 94 साल के हुए हैं। इसके दो दिन पहले उनकी निवेश फर्म बर्कशायर हैथवे का बाज़ार पूंजीकरण एक ट्रिलियन या एक लाख डॉलर तक पहुंच गया। यह रकम कितनी बड़ी है, इसका अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि भारत जैसी दुनिया की पांचवी अर्थव्यवस्था का आकार अभी 3.7 ट्रिलियन डॉलर का है जिसेऔरऔर भी






