भारतीय परिवार रोजमर्रा की खपत के लिए ज्यादा ऋण ले रहे हैं तो परसनल लोन देने और दिलाने वाली कंपनियां बड़ी खुश हैं। दुनिया के 50 से ज्यादा देशों में सक्रिय स्विटज़रलैंड की बहुराष्ट्रीय फाइनेंस व निवेश कंपनी यूबीएस के हिसाब से वित्त वर्ष 2025-26 में भारतीय परिवारों पर चढ़े ऋण का 34% हिस्सा परसनल लोन का था, जबकि 2019-20 में यह 29% हुआ करता था। उनका आकलन है कि आगे गैर-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों (एनबीएफसी) द्वारा दिया जा रहा परसनल लोन 30% और बैंकों द्वारा दिया जा रहा परसनल लोन 9% सालाना की दर से बढ़ सकता है। आम लोगों पर आई विपदा से गोल्ड लोन देनेवाली कंपनियां भी प्रसन्न हैं। जुलाई 2026 तक उपलब्ध नवीनतम डेटा के मुताबिक देश में बैंकों व एनबीएफसी द्वारा दिया रिटेल गोल्ड लोन ₹9.1 लाख करोड़ का है। यह जुलाई 2025 से 80% और जुलाई 2024 से 235% ज्यादा है। लोगबाग पुराने गोल्ड लोन को चुकाने के लिए नया सोना देकर लोन ले रहे हैं। उनकी आय बढ़ नहीं रही तो घर का सोना खपत का इंतजाम करने का नया साधन बन गया है। जुलाई 2024 में बैंकों व एनबीएफसी के कुल रिटेल लोन में गोल्ड लोन का हिस्सा 3.6% हुआ करता था। अब जुलाई 2026 में यह दोगुने से ज्यादा 9.3% हो चुका है। भारत सरकार पर चढ़ा ऋण भी बढ़ रहा है। लेकिन वो तो सरकार है! अब गुरुवार की दशा-दिशा…
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