शेयर बाज़ार निवेशकों के बल पर चलता है, चाहे वे देशी हों या विदेशी। विदेशी निवेशक लगातार देश से भागे जा रहे हैं। इस साल ही वे जनवरी से अब तक ₹1.75 लाख करोड़ निकाल चुके हैं। इनके निकलने की भरपाई देशी निवेशक संस्थाएं, खासकर म्यूचुअल फंड करते हैं। उनके पास धन का मुख्य प्रवाह एसआईपी का है। देश में एसआईपी खातों की संख्या मार्च में 9.72 करोड़ पर पहुंच गई, जिनमें मार्च महीने में ₹32,087 करोड़ का रिकॉर्ड निवेश आया। औसतन ₹3301 प्रति खाता। यह अपने-आप में बहुत बड़ी बात है। वो इसलिए क्योंकि एसआईपी में पांच किलो महीने के मुफ्त राशन पर पलते गरीब नहीं, बल्कि मध्यवर्ग के लोग निवेश करते हैं जिनकी हालत दस साल में या तो खराब हुई है या जहां के तहां खड़े कदमताल कर रहे हैं। आज जिसको ₹1.5 लाख की सैलरी मिल रही है, वो दस साल पहले के ₹90,000 के बराबर है। ऊपर से देखने पर यह 66.67% की वृद्धि लगती है। लेकिन खर्चों का हिसाब लगा लें तो सब पटरा हो जाता है। शेयर बाज़ार में सीधे निवेश करनेवाला मध्यवर्ग धीरे-धीरे हाथ बांधता जा रहा है। लेकिन भविष्य की सुरक्षा के कुछ ऐसे निवेश हैं जिन्हें वो छोड़ नहीं सकता। तथास्तु में ऐसे ही निवेश पर टिका बिजनेस करती एक कंपनी…
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