बदलाव ही शाश्वत व स्थाई है। बाकी सब बराबर बदलता ही रहता है। देश में बचत का स्वरूप भी बदल रहा है। वित्त वर्ष 2011-12 में घरों की वित्तीय बचत का 58% हिस्सा बैंक एफडी में जाता था। यह हिस्सा 2024-25 तक घटकर 35% पर आ गया। लोग अब शेयर बाज़ार में म्यूचुअल फंड के जरिए परोक्ष या स्टॉक्स के जरिए प्रत्यक्ष निवेश ज्यादा करने लगे हैं। 2013-14 में उनकी वित्तीय बचत का 11% हिस्सा शेयर बाज़ार में लगता था, जो सितंबर 2025 तक 18.8% हो चुका है। लेकिन इस बदलाव के बीच आम भारतीयों में रीयल एस्टेट और सोने की सुरक्षा का मोह घटा नहीं, बल्कि बढ़ रहा है। 2019-20 में रीयल एस्टेट व सोने में हमारी घरेलू बचत का 59.7% हिस्सा निवेश हो रहा था। यह 2023-24 कर 71.5% पर पहुंच गया। इसी दौरान वित्तीय बचत का हिस्सा 40.3% से घटकर 28.5% पर आ गया। आखिर ऐसा क्यों कि हमारे घरों की करीब तीन-चौथाई दौलत अब भी रीयल एस्टेट और सोने जैसी भौतिक आस्तियों में जा रही है? नगरों-महानगरों में भले ही अनबिके मकानों की इन्वेंटरी बढ़ रही हो, लेकिन डेवलपर पांच-दस करोड़ तक के घर बनाकर बेच भी रहे हैं। आज तथास्तु में पेश कर रहे है रीयल एस्टेट क्षेत्र की ही एक कंपनी…
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