देश के सीने पर बारह साल से चढ़कर बैठी मोदी सरकार में हांकने वालों की कोई कमी नहीं। वैसे, लम्बी फेंकने व हांकने में खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कोई सानी नहीं। लेकिन उनको किनारे रख दें, तब भी इनके मंत्री परिषद में एक से एक नमूने भरे पड़े हैं। वाणिज्य व उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ऐसे ही एक नगीना हैं। उनका दावा है कि यूरोपीय संघ के साथ की गई व्यापार संधि व्यापार ही नहीं, भारत में मैन्यूफैक्चरिंग को भी ‘लिफ्ट’ कर सकती है। सवाल उठता है कि आप टेक्सटाइल, लेदर व फुटवियर, चाय, कॉफी, मसाले, खेलकूद के सामान, समुद्री उत्पाद और रत्न व आभूषण निर्यात करके मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र को कैसे लिफ्ट कर सकते हैं? ये सब तो हमारे पारम्परिक उत्पाद हैं, जिन्हें हम दशकों से निर्यात कर रहै हैं। इनमें बांग्लादेश से लेकर वियतनाम तक हमसे बाज़ी मार चुके हैं। संदर्भवश बता दें कि भारत ने साल 2024 में यूरोपीय संघ को 4.2 अरब डॉलर के फूड व बेवरेजेज का निर्यात किया था। लेकिन आपको आश्चर्य होगा कि भारत यूरोपीय संघ को फूड व बेवरेजेज के सप्लायर देशों में 30वें नंबर पर था। वियतनाम और थाईलैंड तक हमसे ऊपर थे। ऐसे में यूरोपीय संघ के साथ ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ से आखिर क्या फर्क पड़ने वाला है? अब इसके ऊपर अमेरिका के साथ ‘फादर ऑफ ऑल डील्स’ हो गई है। आखिर इनसे होगा क्या? अब सोमवार का व्योम…
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