अपना-पराया

कोई भी घर-परिवार, देश या समाज अपना रह गया है या नहीं, इसकी एक ही कसौटी है कि वहां आप भय-मुक्त और निश्चिंत रहते हैं कि नहीं। जो आक्रांत करता है, वह अपना कैसे हो सकता है? वह तो बेगाना ही हुआ न!

1 Comment

  1. जो राज्य ठीक चलता हो, वहीं रहना ठीक।

Leave a Reply

Your email address will not be published.