इंसानों की बनाई इस दुनिया में कुछ भी पूर्ण नहीं। अपनी समझ से सब कुछ सही करते हुए भी हम गलत मोड़ पर पहुंच सकते हैं। तरीका सही, जवाब एकदम गलत। लेकिन इस तरह हम अपनी सोचने की प्रक्रिया को माजते हुए जरूर पूर्ण बना सकते हैं।और भीऔर भी

धन कम लोगों को किस्मत और ज्यादातर लोगों को कला और जमाने की समझ से मिलता है। इसलिए अगर आप गरीब पैदा हुए तो इसमें आपकी कोई गलती नहीं। लेकिन आप अगर गरीब रहकर ही मर गए तो इसमें सरासर गलती आपकी है।और भीऔर भी

ये कैसा लोकतंत्र है जहां हम हर पांच साल पर सुशासन नहीं, कुशासन के लिए अपने राजनीतिक प्रतिनिधियों का चुनाव करते हैं? ये कैसा जनतंत्र है जहां हमें अपनी बुद्धि व समझ से नहीं, बॉस के आदेश के हिसाब से काम करना पड़ता है?और भीऔर भी

स्वार्थ पर टिकी इस दुनिया में भी लोग परमार्थी हो सकते हैं। लेकिन कोई हमारा इतना हितैषी क्यों बन रहा है? दूसरे की सलाह पर गौर करते हुए हमें खुद से यह सवाल जरूर पूछना चाहिए। अपने स्वार्थ की साफ समझ इसी तरह से बनती है।और भीऔर भी