जमीन में जम चुके पेड़ से क्या गिला कि उसने न हाल पूछा, न बाहें फैलाकर स्वागत किया या न ही हाथ बढ़ाकर पास बुलाया। बेगानेपन की शिकायत तो चिड़िया से होनी चाहिए जो इस पेड़ से उस पेड़, इस टहनी से उस टहनी तक फुदकती रहती है।और भीऔर भी

स्थिरता स्वभाव से चलायमान इंसान को स्थावर बना देती है। वहीं, समस्याएं इंसान को चलने पर मजबूर कर देती हैं। मगर, समस्याओं के दौर में इंसान को मामूली समस्या भी विकराल लगती है। लेकिन यही समस्याएं तो उसे पेड़ बनकर पड़े रहने से बचाती हैं।और भीऔर भी