इस समय दुनिया भर में हाई फ्रीक्वेंसी और अल्गोरिदम ट्रेडिंग पर बहस छिड़ी हुई है। इस हफ्ते सोमवार और मंगलवार को हमारी पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी ने भी इस पर दो दिन का अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन किया। इससे एक खास बात यह सामने आई कि सेकंड के हज़ारवें हिस्से में ट्रेड करनेवाले ऐसे महारथी भी पहले छोटे सौदों से बाज़ार का मूड भांपते हैं और पक्का हो जाने पर बड़े सौदे करते हैं। अब वार बुधवार का…औरऔर भी

हमने कल बाज़ार खुलने से करीब 45 मिनट पहले ही लिख दिया था कि आज भारी गिरावट का अंदेशा है। इसलिए ज़रा संभलकर। पर निफ्टी 2.09% गिरकर 6135.85 पर पहुंच जाएगा, इतनी उम्मीद नहीं थी। असल में यह बाहरी हवाओं का कोप है। पिछले हफ्ते मात्र दो दिनों में डाउ जोन्स करीब 500 अंक गिरा है। कोई इसका दोष चीन को दे रहा है तो कोई अमेरिका में बांड-खरीद घटाने को। सो, सावधानी से बढ़ते हैं आगे…औरऔर भी

शेयर/कमोडिटी बाज़ार में जो भी ट्रेडिंग से कमाना चाहते हैं, उन्हें यह सच अपने जेहन में बैठा लेना चाहिए कि यहां भावी अनिश्चितता को मिटाना कतई संभव नहीं। यहां सांख्यिकी या गणित की भाषा में प्रायिकता और आम बोलचाल की भाषा में संभावना या गुंजाइश चलती है। जो भी यहां भाव के पक्का बढ़ने/घटने की बात करता है वह या तो अहंकारी मूर्ख है या तगड़ा धंधेबाज़। इस सच को समझते हुए करते हैं हफ्ते का आगाज़…औरऔर भी

बुधवार को मैंने एक फर्म से ट्रेडिंग टिप्स का एक दिन का मुफ्त ट्रायल लिया। एसएमएस आया कि लार्सन एंड टुब्रो पर उसके पास अंदर की 100% पक्की खबर है। 1000 रुपए का पुट ऑप्शन 22 में लपककर लीजिए। स्टॉप-लॉस 10, लक्ष्य 42 रुपए। उसी दिन लार्सन एंड टुब्रो के नतीजे आए। शेयर बढ़ा, पुट ऑप्शन का बेड़ा गरक। दरअसल ऐसी फर्में अंदर की खबरों के नाम पर बेवकूफ बनाती हैं। ऐसे झांसों से बचकर करें ट्रेडिंग…औरऔर भी

टेक्निकल एनालिसिस या चार्टिंग का मूल मकसद है किसी खास समय तक खरीदने और बेचने वालों के बीच का संतुलन देखकर बाज़ार पर हावी भावना को समझना। लेकिन यह थोड़े वक्त, बहुत हुआ तो महीने या दो महीने के लिए फिट बैठता है। लंबे समय में कंपनी व अर्थव्यवस्था के फंडामेंटल्स ही शेयरों के भाव तय करते हैं। इसलिए साल दो साल के निवेश पर टेक्निकल का फंदा नही कसना चाहिए। अब देखते हैं गुरु का बाज़ार…औरऔर भी

आम लोग शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग तो छोड़िए, निवेश तक को नमस्कार बोल चुके हैं। गुजरे छह सालों में उनकी संख्या लगातार घटी है। बाकी जो लोग किसी-न-किसी ब्रोकर-हाउस से जुड़कर ट्रेड करते हैं, वे बराबर किसी अचूक मंत्र की तलाश में भटकते हैं क्योंकि अपना मंत्र उन्हें ऐसा एक कदम आगे, दो कदम पीछे चलाता है कि केवल दूसरों को सलाह देने लायक बच जाते हैं। धन-प्रबंधन का मंत्र उनसे सधता नहीं। अब दृष्टि बुधवार की…औरऔर भी

न तो दुनिया और न ही शेयर बाज़ार हमारी सदिच्छा से चलता है। लेकिन हम अपनी इच्छाएं थोपने से बाज नहीं आते। सोच लिया कि फलानां शेयर बढेगा तो दूसरों से इसकी पुष्टि चाहते हैं। वही टेक्निकल इंडीकेटर पकड़ते हैं जो हमारी धारणा को सही ठहराते हों। कोई इंडीकेटर उल्टा संकेत देता है तो हम उसे नज़रअंदाज़ कर देते हैं। ध्यान दें, भाव इंडीकेटर के पीछे नहीं, इंडीकेटर भाव के पीछे चलते हैं। अब वार मंगलवार का…औरऔर भी

नतीजों का दौर अपने उफान पर है। जैसे ही दिसंबर तिमाही का नतीजा आता है, कंपनी के शेयरो में हलचल मच जाती है। उम्मीद के मुताबिक रहे तो बिकवाली चलती है और खराब रहे तो ज्यादा ही निराशा छा जाती है। टीसीएस की बिक्री 33% बढ गई। लेकिन विश्लेषकों की अपेक्षा से कम थी तो उसके शेयर खटाक से 5.6% गिर गए। बीस महीनों में टीसीएस की सबसे तीखी गिरावट। ऐसी गहमागहनी के बीच बढ़ते हैं आगे…औरऔर भी

इसे लिक्विडिटी कहें या सस्ते विदेशी धन का प्रवाह। इसी ने अमेरिका व जापान समेत दुनिया भर के शेयर बाज़ारों को चढ़ा रखा है। इसका अर्थव्यवस्था की मूल ताकत से खास लेनादेना नहीं। कुल विश्लेषक इसे अमेरिकी केंद्रीय बैंक, फेडरल रिजर्व द्वारा किया गया मैनिप्युलेशन बता रहे हैं। लेकिन शेयर बाज़ार में धनबल के दम पर ऐसी धांधली चलती रहती है। जब सरकारें तक इसमें लगी हों तो इसे कौन रोक सकता है! अब शुक्र की दिशा…औरऔर भी

कोल इंडिया ने प्रति शेयर 29 रुपए का अंतरिम लाभांश घोषित किया तो बाज़ार खुलने के कुछ ही पलों में उसका 6.56% बढ़कर 307.85 रुपए पर पहुंचना स्वाभाविक था। क्या आप जानते हैं कि इस डिविडेंड के लिए रिकॉर्ड तिथि भले ही 20 जनवरी हो, लेकिन यह 17 जनवरी से एक्स-डिविडेंड हो जाएगा। अगर आज आपने इसे खरीद लिया तभी आप लाभांश के हकदार होंगे। शुक्र को यह सीधे 29 रुपए नीचे खुलेगा। अब गुरु की चाल…औरऔर भी