मैं काफी समय से आपको बता रहा था कि सीमेंट क्षेत्र में कोई सुस्ती नहीं है। हालांकि मानसून के दौरान कम उठाव के चलते पहली तिमाही बुरी रही है। सीमेट के दाम प्रति बोरी 20 रुपए गिर गए और सारे एनालिस्ट आपको इससे बाहर निकलने का रास्ता दिखाने लगे। लेकिन हमने नई हलचल को सबसे पहले पकड़ा और आज सीमेंट कंपनियों ने मुंबई में प्रति बोरी दाम 10 रुपए बढ़ा दिए। आप समझ सकते हैं कि मैंऔरऔर भी

डिशमैन फार्मास्यूटिकल्स एंड केमिकल्स (बीएसई कोड – 532526, एनएसई कोड – DISHMAN) की पहली तिमाही के नतीजे अच्छे नहीं रहे हैं। साल भर पहले की तुलना में उसकी कुल आय 243 करोड़ रुपए से 13 फीसदी घटकर 212 करोड़ रुपए और शुद्ध लाभ 39.2 करोड़ रुपए से 31 फीसदी घटकर 27.3 करोड़ रुपए रह गया है। कंपनी का सकल लाभ मार्जिन भी 28.2 फीसदी से गिरकर 25.8 फीसदी रह गया है। ऐसा तब है जब उसने अपनीऔरऔर भी

सुपर टैनरी (बीएसई कोड-523842) कानपुर की पुरानी कंपनी है। जूते बनाती है, निर्यात करती है। भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त एक्सपोर्ट हाउस है। इसके बारे में दो खास चौंकानेवाली बातें हैं। एक, इस साल जून की तिमाही में उसकी बिक्री में 72 फीसदी और शुद्ध लाभ में 250 फीसदी वृद्धि हुई है। दो, इसने मार्च 1993 में अपने पब्लिक इश्यू में 10 रुपए का शेयर 55 रुपए प्रीमियम यानी 65 रुपए मूल्य पर जारी किया था, लेकिनऔरऔर भी

कुछ दिनों पहले हमने टाटा मोटर्स और एसबीआई की बात उठाई थी और इन दोनों ही शेयरों ने औरों से ज्यादा तेजी दिखाई है। आरडीबी को आईटीसी द्वारा खरीदने की बात अब पीटीआई, सीएनबीसी, एनडीटीवी, ब्लूमबर्म और रॉयटर्स जैसे कई समाचार माध्यमों में आ गई है। निश्चित रूप से अब इसका खंडन भी आएगा क्योंकि 350 करोड़ रुपए में सौदे की बात कही गई है, जबकि आरडीबी का बाजार पूंजीकरण अभी मात्र 75 करोड़ रुपए है। इसलिएऔरऔर भी

लॉयड इलेक्ट्रिक एंड इंजीनियरिंग (बीएसई कोड-517518) की प्रति शेयर बुक वैल्यू 136.15 रुपए है। लेकिन बाजार में दस रुपए अंकित मूल्य के उसके शेयर का ग्राफ नीचे ही नीचे जा रहा है। कल यह बीएसई में 3.07 फीसदी गिरकर 77.25 रुपए और एनएसई में 3.50 फीसदी गिरकर 77.10 रुपए पर बंद हुआ है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2009-10 में 680.81 करोड़ रुपए की आय पर 39.17 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ कमाया है और उसका सालाना ईपीएसऔरऔर भी

जीवीके पावर एंड इंफ्रास्ट्रक्चर (बीएसई कोड-532708) कई महीनों से 40 रुपए के आसपास अटका हुआ है। एक कदम आगे, दो कदम पीछे का हिसाब-किताब इसमें चल रहा है। 31 मई को जब हमने पहली बार इसके बारे में लिखा था, तब इसका पिछला बंद भाव 42.30 रुपए था। कल इसका एक रुपए अंकित मूल्य का शेयर बीएसई में 43.70 रुपए और एनएसई में 43.80 रुपए पर बंद हुआ है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2009-10 में 45.37 करोड़औरऔर भी

जैसी कि उम्मीद थी, जोश से भरे स्टॉक अब थकते नजर आ रहे हैं। ट्रेडरों और निवेशकों की दिलचस्पी भी इनमें घट गई है। दूसरी तरफ अभी तक किनारे पड़े शेयरों, खासकर मिड कैप व स्मॉल कैप स्टॉक्स में अच्छी-खासी दिलचस्पी दिखने लगी है। यह दिलचस्पी भी सच्चे दीर्घकालिक निवेशकों की तरफ से आ रही है, न कि रिटेल निवेशकों की तरफ से। रिटेल निवेशक तो आखिरकार रिटेल ही हैं। वे तो बस रोना-धोना ही जानते हैं।औरऔर भी

हम इस बात की आशंका पहले ही जता चुके हैं। बाजार पर मंडराता जोखिम घट नहीं रहा। बहुत मुमकिन है कि जिन अग्रणी कंपनियों में बढ़त के दम पर सेंसेक्स बढ़ता जा रहा है, वे गिरावट/करेक्शन की शिकार हो जाएं और जो स्टॉक अभी तक बाजार की रफ्तार से पीछे चल रहे थे, वे अचानक सबसे आगे आ जाएं। इसके पीछे का तर्क बड़ा सीधा-सरल और आसान है। पीछे चल रहे बहुत से शेयरों का भाव उनकेऔरऔर भी

आज के स्टार परफॉर्मर रहे आईएफसीआई व टीटीएमएल (टाटा टेली महाराष्ट्र लिमिटेड) और इन दोनों के बारे में हम काफी समय से लिख रहे हैं। बैंकिंग शेयरों ने भी अच्छी गति पकड़ी। फ्यूचर सौदों में फिजिकल सेटलमेंट न होने के कुछ शिकार नजर आ रहे हैं। जेएसडब्ल्यू होल्डिंग्स 1750 रुपए तक हिट रहा, हालांकि इसकी कोई जरूरत नहीं थी। इसी तरह एचसीसी 128 रुपए तक मार करता रहा और उसने तमाम स्टॉप लॉस और मार्क टू मार्केटऔरऔर भी

नैवेली लिग्नाइट कॉरपोरेशन (एनएलसी) बढ़ रही है, लेकिन उसका शेयर ठहरा हुआ है। सार्वजनिक क्षेत्र की इस कंपनी ने इस साल जून की पहली तिमाही में 342.10 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ हासिल किया है जो साल भर पहले की इसी अवधि के शुद्ध लाभ 287.64 करोड़ रुपए से 18.93 फीसदी ज्यादा है। इससे पहले पूरे वित्त वर्ष 2009-10 में उसका शुद्ध लाभ 52 फीसदी बढ़ा था। उसका परिचालन लाभ मार्जिन (ओपीएम) अब 51.49 फीसदी हो गयाऔरऔर भी