अगर आप शेयर बाज़ार में अच्छी तरह ट्रेड करना चाहते हैं तो आपको मानव मन को अच्छी तरह समझना पड़ेगा। आखिर बाज़ार में लोग ही तो हैं जो आशा-निराशा और लालच व भय जैसी तमाम मानवीय दुर्बलताओं के पुतले हैं। ये दुर्बलताएं ही किसी ट्रेडर के लिए अच्छे शिकार का जानदार मौका पेश करती हैं। निवेश व ट्रेडिंग के मनोविज्ञान पर यूं तो तमाम किताबें लिखी गई हैं। लेकिन उनके चक्कर में पड़ने के बजाय यही पर्याप्तऔरऔर भी

धन देशी-विदेशी हो या काला सफेद, उसका प्रवाह ही शेयरों के भाव तय करता है। इस प्रवाह की वजह कुछ हो सकती है, कोई अच्छी खबर, भावी संभावना या ऑपरेटरों का मैन्यूपुलेशन। रिटेल ट्रेडर को इसका पता तो ज़रूर होना चाहिए। लेकिन यह उसकी ट्रेडिंग रणनीति का हिस्सा नहीं हो सकता, क्योंकि उसके पास यह जानकारी तभी आती है जब बाज़ार और शेयरों के भाव इसे सोख चुके हैं। इसलिए उसे मानकर चलना चाहिए कि स्टॉक ट्रेडिंगऔरऔर भी

शेयर बाजार की ट्रेडिंग तात्कालिकता का खेल है, लम्बे समय के निवेश का नहीं। अगर किसी को भ्रम है कि वो कंपनी के फंडामेंटल जानकर उसके शेयरों में ट्रेडिंग कर सकता है तो उसे डूबने से कोई नहीं बचा सकता। बाज़ार में उतरनेवाले हर ट्रेडर को मन में कहीं गहरे बैठा लेना होगा कि ट्रेडिंग दांव लगाने या सट्टेबाज़ी का ही खेल है। यह भी कि अगर हम अपने रिस्क को संभालकर चलें तो सट्टेबाज़ी अपने-आप मेंऔरऔर भी

शेयर बाज़ार की ट्रेडिंग विशुद्ध रूप से कयासबाज़ी या सट्टेबाज़ी का खेल है। इसका कोई वास्ता कंपनियों के फंडामेंटल्स या बिजनेस के हाल-चाल से नहीं होता। अर्थव्यवस्था और आर्थिक नीतियों से भी इसका कोई सीधा रिश्ता नहीं। ट्रेडिंग में सबसे अहम है कि शेयर के भाव अभी क्या हैं और आगे कहां तक जा सकते हैं। फर्क समझें कि शेयरों में दीर्घकालिक निवेश बैक एफडी या प्रॉपर्टी में धन लगाने जैसा काम है, जबकि ट्रेडिंग विशुद्ध बिजनेसऔरऔर भी

सरकार ने 1 अप्रैल 2023 से शेयर बाज़ार के फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (एफ एंड ओ) सेगमेंट में होनेवाले सौदों पर सिक्यूरिटीज़ ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) 25% बढ़ा दिया है। पहले एक करोड़ रुपए के फ्यूचर्स सौदों पर 1000 रुपए एसटीटी लगता था, जबकि अब यह 1250 रुपए लगेगा। वहीं, ऑप्शंस की बिक्री पर पहले 0.05% एसटीटी लगता था, अब 0.0625% लगेगा। इस तरह इसमें भी 25% वृद्धि की गई है। पहले ऑप्शंस में एक करोड़ रुपए के सौदेऔरऔर भी

दुनिया पर भले ही नई आर्थिक मंदी का संकट मंडरा रहा हो। लेकिन हमारा देश इंडिया यानी भारत इस वक्त भयंकर ही नहीं, भयावह विश्वास के संकट के दौर से गुजर रहा है। प्रधानमंत्री झूठ बोलते हैं। समूची सरकार और उसमें बैठी पार्टी के आला नेता झूठ बोलते हैं। सरकार का हर मंत्री झूठ बोलता है। छोटे-बड़े अफसर भी बेधड़क झूठ बोलते हैं। हालत उस कविता जैसी हो गई है कि राजा बोला रात है, रानी बोलीऔरऔर भी

थोक के भाव खरीदना और रिटेल के भाव बेचना। इनवेंट्री कम से कम रखना। वॉलमार्ट से लेकर आम व्यापारी के मुनाफे का यही सलीका है। शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग से मुनाफा कमाने का भी यही सूत्र है। लेकिन हम करते हैं इसका उल्टा। यहां-वहां की एनालिसिस छलावा है। कुछ कौड़ियां पकड़ाकर वो महज भटकाती है। असल मुद्दा यह है कि शेयरों के थोक भाव और रिटेल भाव को पकड़ा कैसे जाए? बताएंगे आपको। पहले आज का बाज़ार।औरऔर भी

बाजार कमजोरी के साथ खुला और सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आंकड़े आने तक कमजोर ही बना रहा। बाजार में आम धारणा थी कि इसकी विकास दर 6.9 फीसदी रहेगी और सचमुच यह 6.9 फीसदी ही रही। लेकिन बाजार का चाल-चलन इस कदर बदल चुका है कि ट्रेडरों को बहुत सारी सूचनाएं ‘गजब की तेजी’ से मिल जाती हैं और वे उसके हिसाब से बहकने लगते हैं। पहले जीडीपी के 6.2 फीसदी बढ़ने की अफवाह खबर केऔरऔर भी

संसद में छाया राजनीतिक गतिरोध सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी को रिटेल में एफडीआई या सिविल एविएशन को विदेशी एयरलाइंस के लिए खोलने जैसे बड़े फैसले नहीं लेने देगा। अभी तक इस सेटलमेंट में इन दोनों ही सेक्टरों के स्टॉक्स काफी ज्यादा खरीदे जा चुके हैं। अब वे कैश सेटलमेंट के नए शिकार हैं। इसलिए इनमें खरीद करते वक्त काफी सावधान रहने की जरूरत है। पिछले सेटलमेंट में मैंने आपको डिश टीवी के बारे में जो बताया था, वोऔरऔर भी