ऋण से धन तक
इंसान और उसके रिश्तों को चलानेवाली मूल वृत्तियां हैं – काम, क्रोध, मद, लोभ, भय। समाज को सही करना है तो इन्हीं वृत्तियों को काम में लगाना होगा। सामाजिक विविधता के तंत्र में ये सभी नकारात्मक वृत्तियां एक-दूसरे को काट देंगी। जहर दवा बन जाएगा। और भीऔर भी
भयंकर अवसाद
हर कोई किसी न किसी रूप में बलवान है, सशक्त है। बस, हम ही हर रूप में कमजोर हैं, अशक्त हैं। ये सोच भयंकर अवसाद का लक्षण है। कोई दवा हमें इससे बाहर नहीं निकाल सकती। लड़ने का मनोबल और अपने अनोखे गुणों का भरोसा ही इसका इलाज है।और भीऔर भी
दवा है दारू नहीं
शरीर अपना काम करीने से करता है। मगर हम उसकी व्यवस्था में खलल डालते हैं तो लड़खड़ाने लगता है। दवा से मदद करना अच्छा है। लेकिन दारू या तंबाकू तो शरीर की धमनियों तक को झकझोर डालते हैं। इसलिए उनसे तौबा ही बेहतर है।और भीऔर भी






