दुनिया के प्रमुख देशों के इक्विटी बाजार छुट्टियों के चलते बंद हैं, जबकि भारत का बाजार रोलओवर में व्यस्त है। चूंकि बाजार ओवरसोल्ड अवस्था में पहुंचा हुआ है, इसलिए रोलओवर इस समय शॉर्ट सौदों के हो रहे है और बाजार नीचे की दिशा पकड़कर उथल-पुथल मचा रहा है। फिर भी रुझान ऊपर की दिशा का है। निफ्टी आज सुबह 11 बजे से पहले 4800 तक पहुंच गया। लेकिन गिरा तो ऊपर-नीचे होता हुआ आखिर में 0.60 फीसदीऔरऔर भी

लड़ाई आधी जीत ली गई है क्योंकि तेजड़िए निफ्टी को 4787.25 तक ले जाकर 4779 अंक पर बंद करने में कामयाब रहे। यह शुक्रवार के उस 4777 अंक से थोड़ा ऊपर है जहां से बाजार ने रुख पलटा था। प्रतिरोध का अगला स्तर 4850 का है। अगर तेजड़िए बाजार को 4850 से ऊपर ले जाने में कामयाब रहे तो तय मानिए कि निफ्टी 5000 के आसपास या 5080 तक भी जा सकता है। लेकिन तेजी का यहऔरऔर भी

उम्मीद और नाउम्मीदी के बीच झूल रहा है बाजार। मंदडिए जाहिरा तौर पर हावी हैं। लेकिन वे जब हर तरफ अपना डंका बजा रहे हैं, तब बाजार चुपचाप उनके हमले से तहस-नहस हालात को संभालने में जुट गया है। मेरे बहुत से दोस्त निफ्टी में 4000 पर पुट ऑप्शन या बेचने के सौदे करके बैठ गए हैं। लेकिन अब उन्हें लग रहा है कि वे ऐसा करके बुरे फंस गए हैं। बाजार ने सुधरने का एक पैटर्न-साऔरऔर भी

कल की शानदार रैली के बाद आज कमजोर शुरूआत होनी ही थी। लेकिन अमेरिका में बेरोजगारी के आंकडों का भी असर होना था जो काफी सकारात्मक रहे। अप्रैल 2008 में वहां बेरोजगारी भत्ते का आवेदन करनेवालों की संख्या में अप्रत्याशित कमी आई है। इसके ऊपर से खाद्य मुद्रास्फीति के आंकड़े आ गए तो हर तरफ ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद दौड़ गई। खाद्य मुद्रास्फीति की दर 1.81 फीसदी पर पहुंच गई है जो करीब चार सालोंऔरऔर भी

निफ्टी के 4000 तक पहुंच जाने के अंतहीन अनुमान और भारत के अंतहीन डाउनग्रेड का सिलसिला पूरा घूम चुका है। हालांकि सेंसेक्स कंपनियों के निचले लाभार्जन का अनुमान इस सूचकांक को 11,600 पर पहुंचा देता है। मतलब यह कि सेंसेक्स अगर 11,000 पर पहुंचता है तो बाजार को 9.48 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड होना पड़ेगा। लेकिन ऐसी नौबत तो 1991 में भी नहीं आई थी, जब भारत दीवालियेपन की कगार तक पहुंच गया था। पिछले 15औरऔर भी

बाजार और गिर गया। सेंसेक्स 204.26 अंक गिरकर 15,175.08 पर तो निफ्टी 68.90 अंक गिरकर 4544.20 पर पहुंच गया। सैंकड़ों शेयर और नीचे उतर गए। एनडीटीवी 24.75 रुपए, पुंज लॉयड 37.05 रुपए, सुज़लॉन एनर्जी 17.50 रुपए, 3आई इनफोटेक 12.10 रुपए, केईसी इंटरनेशनल 31.80 रुपए, ज़ी न्यूज़ 8.65 रुपए, फर्स्टसोर्स सोल्यूशंस 6.35 रुपए, क्विटेंग्रा सोल्यूशंस 1.91 रुपए, सूर्यचक्रा पावर 3.43 रुपए, रिलायंस पावर 70.15 रुपए, राज ऑयल 9.35 रुपए, एनएचपीसी 18.40 रुपए, डीबी कॉर्प 180.35 रुपए, श्रीगणेश ज्वेलरीऔरऔर भी

शेयर बाजार में आया आतंकवादी धन आखिर है कहां? मीडिया ने जब तीन साल पहले इस पर जमकर हल्ला मचाया था, तब क्यों नहीं इसकी तहकीकात की गई? अब अचानक आतंकवादी धन का मसला उछाल दिया गया जिससे भारतीय शेयर बाजार को करीब 600 अंकों का धक्का लग चुका है। क्या कोई इसके पीछे का कोई तर्क या तुक समझा सकता है? सबसे अहम बात यह है कि इसे तब उछाला गया है जब संसद में बहसऔरऔर भी

बाजार ने एक बार फिर साबित कर दिया कि यहां कुंडली मारकर बैठे उस्तादों के आगे निवेशकों व ट्रेडरों की कोई बिसात नहीं है। निफ्टी में फ्यूचर्स का वोल्यूम 3.39 करोड़ का रहा है, जबकि सामान्य वोल्यूम 1.8 करोड़ से ज्यादा का हो ही नहीं सकता। फ्यूचर्स में सामान्य का दोगुना कारोबार! पहले बाजार ने खुद को 4800 के ऊपर टिकाया। 4820 पर सभी मंदडियों के स्टॉप लॉस चालू हो गए। वे मजबूरन लांग होने लगे। जोऔरऔर भी

रिजर्व बैंक ठान ही चुका है कि वह विदेशी मुद्रा बाजार में कोई हस्तक्षेप नहीं करेगा तो स्वाभाविक रूप से रुपए का बेरोकटोक गिरना जारी है। डॉलर के सापेक्ष अब तक वह 56 रुपए के करीब पहुंच चुका है। हो सकता है कि कल तक एकदम 56 भी हो जाए। तब रुपए को हीरो बनाकर नई फिल्म बनेगी जिसका शीर्षक होगा – अब तक छप्पन। खैर, तीखी गिरावट ने हमें इस समय एकदम तलहटी के करीब पहुंचाऔरऔर भी

वित्त मंत्रालय की तरफ से मिल रहे संकेत कतई अच्छे नहीं है। उसका साफ कहना है कि वह रुपए की गिरावट को रोकने के लिए हस्तक्षेप नहीं कर सकता। मतलब यह कि विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) का नुकसान जारी रहेगा और बाजार से भागने की फिराक में लगे रहेंगे। इसलिए बाजार में फिलहाल स्थायित्व आने की गुंजाइश नहीं दिखती है। इस बीच हमारे वाणिज्य सचिव स्वीकार कर चुके है कि निर्यात के आंकड़ों में 9 अरब डॉलरऔरऔर भी