मायानगरी मुंबई, सपनों की नगरी। लोगों के पास बड़ी-बड़ी गाड़ियां, पर चलाने को सड़क नहीं। हर मिनट पर ट्रेन, पर भीड़ इतनी कि चढ़ना मुश्किल। समुद्र का अथाह जल, मगर मछलियां प्यासी हैं। यहां घुट-घुटकर जीते हैं लोग। सांस लेने की फुरसत नहीं।और भीऔर भी

भगवान के भौतिक वजूद के सबसे करीब रहनेवाला पुजारी सबसे बड़ा नास्तिक होता है। वह भगवान की औकात जानता है। जानता है कि दूर के लोगों की आस्था ही भगवान को सत्ता व ताकत देती है। वरना वो किसी का कुछ बना-बिगाड़ नहीं सकता।और भीऔर भी

इंसानों की बनाई इस दुनिया में कुछ भी पूर्ण नहीं। अपनी समझ से सब कुछ सही करते हुए भी हम गलत मोड़ पर पहुंच सकते हैं। तरीका सही, जवाब एकदम गलत। लेकिन इस तरह हम अपनी सोचने की प्रक्रिया को माजते हुए जरूर पूर्ण बना सकते हैं।और भीऔर भी

कभी फुरसत में कुछ भी नहीं होने की कल्पना कीजिए। एकदम सन्नाटा, कोई ख्याल नहीं। है न बड़ा मुश्किल! लेकिन यह शून्य बेहद अहम है। यह शून्य ही वो आखिरी अंक है जिसकी खोज हमने की। यह न होता तो आज दुनिया ज्ञान-विज्ञान में शून्य होती।और भीऔर भी