यूं तो पूरा जीवन ही रिस्क से भरा पड़ा है। लेकिन शेयर बाज़ार एक ऐसी जगह है जहां रिस्क ही रिस्क है। किसी को नहीं पता कि आगे क्या हो सकता है। फिर भी कयासबाज़ी चलती है। इतनी ज्यादा कि कयासबाज़ी अपने-आप में शेयर बाज़ार से जुड़ा धंधा बन गई है। बिजनेस न्यूज़ चैनलों पर आनेवाले एनालिस्ट, अखबारों में निवेश पर कॉलम लिखनेवाले विशेषज्ञ और ब्लॉग से लेकर वेबसाइट चलानेवाले रिसर्च एनालिस्ट, सभी के सभी मूलतः कयासबाज़ीऔरऔर भी

किसी को भरोसा नहीं कि रूस-यूक्रेन युद्ध कब खत्म होगा और युदध खत्म भी हो गया तो क्या महंगाई कम या खत्म हो जाएगी? जानकार बताते हैं कि अभी की चढ़ी हुई मुद्रास्फीति तात्कालिक नहीं है। यह लम्बे समय तक बनी रह सकती है। इसका सीधा असर कंपनियों के नतीजों पर पड़ेगा। कम के कम अगली कुछ तिमाहियों तक कॉरपोरेट क्षेत्र का मुनाफा दबा-दबा रहेगा। एक सर्वे के मुताबिक चालू वित्त वर्ष 2022-23 में निफ्टी-50 में शामिलऔरऔर भी

अमेरिका में अभी तक मुद्रास्फीति का मानक 2% रहा है। लेकिन मार्च में वहां रिटेल मुद्रास्फीति 8.5% पर पहुंच गई। खाने-पीने की चीजों और ईंधन को हटा दें तब भी वहां बची मुद्रास्फीति की दर 6.5% के ऊपर निकलती है। मार्च में भारत में रिटेल मुद्रास्फीति 6.95% और थोक मुद्रास्फीति 14.55% के स्तर पर पहुंच चुकी है। इसे थोड़ा समतल करने के लिए रिजर्व बैंक ने कल ब्याज या रेपो दर 4% से बढ़ाकर 4.40% कर दी।औरऔर भी

इन दिनों शेयर बाज़ार के पैरों के नीचे की ज़मीन खिसकी हुई है। कहीं कोई किसी आशा व उम्मीद की बात नहीं कर रहा। बाज़ार बढ़ते-बढ़ते फिसल जाता है। अब तो निफ्टी में शॉर्ट सेलिंग करने की चर्चा जोर पकड़ती जा रही है। हताशा और निराशा से भरा यह माहौल कब तक चलेगा, किसी को नहीं पता। कुछ अनुभवी अर्थशास्त्री तो यहां तक कहने लगे हैं कि हम बहुत कठिन दौर से गुज़र रहे हैं। भयंकर तूफानऔरऔर भी

रमज़ान महीने की कठिन-कठोर तपस्या, भूख व उपवास के बाद खुशियों का ईद मुबारक़ दिन आता है। इसी तरह रिटेल ट्रेडर के लिए शेयर या वित्तीय बाज़ार में जीतने की खुशी, उसका हुनर लम्बे संघर्ष व अभ्यास के बाद आता है। असल में शेयर बाज़ार की ट्रेडिंग एक तरह का युद्ध है, लेकिन बराबरी का नहीं। सामने हर तरह की सुविधा – पूंजी से लेकर रिस्क लेने की क्षमता से लैस एचएनआई और देशी-विदेशी संस्थाएं होती हैं.औरऔर भी

सारी गणनाएं कर लें, सारे कैंडल देख लें, आरएसआई से लेकर मूविंग एवरेज तक प्लॉट कर लें। एमएसीडी से लेकर जो भी विद्या जानते हों, सभी आजमा लें। फिर भी पक्का नहीं कि शेयर का भाव उसी दिशा में जाएगा, जैसा हिसाब लगाया है। ऐसे तमाम हिसाब-किलाब व गणनाओं से हम शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग के रिस्क को कम से कम करने की कोशिश करते हैं। याद रखें कि ब़ड़े से बड़ा तुर्रमखां भी ट्रेडिंग के रिस्कऔरऔर भी

कोई शेयर डिमांड ज़ोन में हो, रुख बढ़ने का हो, आरएसआई और मूविंग एवरेज उसके बढ़ने का संकेत दे रहे हों तो खरीद की आखिरी परख होती है कि उसके चार्ट में सबसे नीचे जो कैंडर बना है, उसका रंग व आकार क्या है। अगर ग्रीन है और आकार हैमर जैसा है तो इसका मतलब कि उसे खरीदने की आतुरता अधिक है। शेयर खुला नीचे, लेकिन लोग दिन के उच्चतम स्तर पर भी उसे खरीदने को उतारूऔरऔर भी

यूं तो शेयरों के भाव की भावी गति का अंदाज़ लगाने के लिए डिमांड-सप्लाई की समझ और अभ्यास काफी है। फिर भी इसकी पुष्टि के लिए टेक्निकल एनालिसिस के कुछ इंडीकेटरों का इस्तेमाल किया जाता है। बीएसई की चार्टिंग सुविधा में आपको एमएसीडी, आरएसआई, मूविंग एवरेज़, स्टॉकास्टिक ऑसिलेटर और चंडे विद्या जैसे बहुतेरे इंडीकेटर मिल जाएंगे। लेकिन आरएसआई (रिलेटिव स्ट्रेन्थ इंडेक्स) और मूविंग एवरेज से पुष्टि करना पर्याप्त है। पांच-दस दिन के ट्रेड के लिए आरएसआई काफीऔरऔर भी

शेयरों के भाव का पैटर्न देखने के लिए अगर आपका ब्रोकर मुफ्त में सॉफ्टवेयर उपलब्ध करा रहा है तो अच्छी बात हैं। नहीं तो अलग से कोई सॉफ्टवेयर खरीदने की ज़रूरत नहीं। बीएसई में यह सुविधा मुफ्त में दे रखी है। हर स्टॉक के साथ पेज की बाई तरफ नीचे से दूसरे नंबर पर चार्टिंग का विकल्प है जिस पर क्लिक कर आप नए पेज पर पहुंच जाते हैं। वहां भावों के साथ ही आप मूविंग औसतऔरऔर भी

भावों के चार्ट से कैसे पता लगाया जा सकता है कि किस स्टॉक में किस भाव पर देशी-विदेशी संस्थाओं की खरीद/बिक्री आ सकती है, उसमें डिमांड/सप्लाई का ज़ोन क्या है? लेकिन इस बारीकी में जाने से पहले समझ लें कि फ्लोटिंग स्टॉक कमोबेश स्थिर रहने पर भी किसी शेयर के भाव बढ़ते या गिरते क्यों हैं? बाज़ार में किसी दिन जितने शेयर बेचे जाते हैं, उतने ही खरीदे जाते हैं। हां, ट्रेड हुए शेयरों में डिलीवरी वालेऔरऔर भी