डाउ जोंस 11,300 के ऊपर बढ़कर बंद हुआ। यह ब्रेक-आउट का साफ संकेत है और यह अब 15,000 की तरफ बढ़ेगा। पहला पड़ाव 11,800 का है। यह तेजी अमेरिका में दूसरी क्वांटिटेटिव ईजिंग (क्यूई-2) का असर है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था को दिए जानेवाले इस प्रोत्साहन की तारीख घोषित हो चुकी है। इसका आकार 3.3 लाख करोड़ डॉलर का हो सकता है। हालांकि अमेरिकी सीनेट ने पहले 60 करोड़ डॉलर की राशि ही पारित की थी। आप इसकी अहमियतऔरऔर भी

बाजार कल 350 अंक बढ़ा था तो सामान्य तौर पर उसे आज गिरकर बंद होना चाहिए था। लेकिन चूंकि बाजार में कोई खास पोजिशन नहीं बन रखी हैं, इसलिए आज बाजार का बढ़ना वाजिब माना जा सकता है। सेंसेक्स 20,000 के पार जाने के बाद 142.70 अंक की बढ़त के साथ 19992.70 पर बंद हुआ तो निफ्टी 50.80 अंक बढ़कर फिर से 6000 के ऊपर पहुंच गया और बंद हुआ 6011.70 के स्तर पर। कमाल की बातऔरऔर भी

सेंचुरी टेक्सटाइल्स के 400 से बढ़कर 455 रुपए और एचडीआईएल के 164 से बढ़कर 200 रुपए तक पहुंचने ने साफ-साफ रीयल्टी सेक्टर में छिपी संभावनाओं की झलक दिखा दी है। यह बात आप खुली आंखों से देख सकते हैं। लेकिन भविष्य के गर्भ में छिपी लंबी कहानी आपको दिमाग लगाकर पढ़नी होगी। निफ्टी 5750 से पलटकर 5960 तक आ चुका है। बहुत से लोग अब भी कह रहे हैं कि यह तात्कालिक राहत की रैली है। लेकिनऔरऔर भी

मैं दस साल के नजरिए से अर्थव्यवस्था और बाजार व कॉरपोरेट क्षेत्र की स्थिति को देखता हूं। इसलिए महसूस कर सकता हूं कि क्या हो रहा है। लेकिन निवेशक तो दस घंटे की बात भी नहीं देख पाते। इसलिए बाजार के खिलाड़ियों के हाथ में अपनी गरदन पकड़ा देते हैं। मैं भी एचएनआई (हाई नेटवर्थ इंडीविजुअल) निवेशकों को उनका पोर्टफोलियो बनाने-संभालने की सलाह देता हूं। लेकिन उन्हें नुकसान नहीं हुआ क्योंकि वे कभी भी कर्ज लेकर बाजारऔरऔर भी

बाजार की हालत दुरुस्त हो चली है और एफआईआई ने अच्छे शेयरों को बटोरना शुरू कर दिया है। मीडिया की सुर्खियां भी दिखाती हैं कि हाउसिंग लोन घोटाले या रिश्वतखोरी का मामला अब धीरे-धीरे सम हो रहा है। हालांकि बाजार के लोगों को अब भी समझ में नहीं आया है कि यह गिरावट एचएनआई (हाई नेटवर्थ इंडीविजुअल) निवेशकों और ऑपरेटरों को ठिकाने लगाने के लिए थी क्योंकि रिटेल ने कोई खास खरीद कर नहीं रखी थी। खरीदऔरऔर भी

बाजार में अभी चली गिरावट का माहौल बहुत सारी वजहों ने बनाया था। 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला, राष्ट्रमंडल खेलों का भ्रष्टाचार, संसद में गतिरोध, कोरिया का झगड़ा, आयरलैंड का ऋण संकट और इसके ऊपर से रीयल्टी सेक्टर को लोन देने में बैंकों व वित्तीय संस्थाओं के आला अफसरों की घूसखोरी। लेकिन मुझे लगता है कि बाजार इन मसलों को लेकर कुछ ज्यादा ही बिदक गया। वैसे, अच्छी बात यह है कि ज्यादा धन या लिक्विडिटी के प्रवाह केऔरऔर भी

जब बाजार में भूचाल मचा हो, बीएसई सेंसेक्स 615 का गोता लगाने के बाद संभला हो, तब मैं आपको अब कतई बाजार की तेजी के बारे में यकीन दिलाने की कोशिश नहीं करूंगा। लेकिन इतना जरूर कहूंगा कि औरों के बनाए खेल के शिकार न बनें। डेरिवेटिव्स में अपने पोजिशन को होल्ड रखें, साथ ही साथ कैश सेगमेंट में खरीद जारी रखें। बाजार से एचएनआई (हाई नेटवर्थ इंडीविजुअल) तबका एकदम साफ हो गया है। अब तो 5000औरऔर भी

हमें इस बात का पूरा अंदाजा था कि तेजड़िये दोहरी अफरातफरी पैदा करेंगे। इसकी दो वजहें थीं। एक, जो लोग कल लांग यानी भावी खरीद के सौदे कर चुके थे, वे भयभीत हो जाएंगे। दो, असली ट्रिगर बाजार बंद बाद होने के बाद आएगा। प्रधानमंत्री की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में 2जी स्पेक्ट्रम मामले में हलफनामा कल, शनिवार को दाखिल किया जाएगा, जिस पर सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को सुनवाई करेगा। बाजार में अगली उथलपुथल मंगलवार को आएगी।औरऔर भी

जहां देखो, वहीं सलाह देनेवालों का रेला लगा है। एसएमएस व बेवसाइटों से लेकर टीवी चैनल और ब्रोकर तक मुफ्त में सलाह बांट रहे हैं। निवेशक एक है तो सलाह देनेवाले हज़ार हैं। जब हर तरफ शेयर के भावों पर नीचे की तरफ जाते तीर का लाल निशान लगा हो तो पांचवी क्लास का बच्चा भी आपको सलाह दे सकता है। ब्रोकरों की बात मैं समझ सकता हू क्योंकि अगर आप होल्ड करेंगे या बिना मार्क टूऔरऔर भी

तमाम अखबार, पत्र-पत्रिकाएं और बिजनेस चैनल भारतीय शेयर बाजार को लगी 1200 अंकों से ज्यादा की चपत की वजह वैश्विक कारकों में तलाश रहे हैं। लेकिन हमारा मानना है कि असली बात यह नहीं है। लेहमान ब्रदर्स के डूबने का मसला हो या उसके बाद के तमाम वैश्विक कारक हों, उन्होंने यकीकन कमजोर बाजारों को चोट पहुंचाई, लेकिन इनके बीच भारतीय बाजार ने पुरानी ऊंचाई फिर से हासिल कर ली और यही नहीं, दूसरी अर्थव्यवस्थाओं ने हमाराऔरऔर भी