हर ज़माने में धन और शोहरत कमाने के रास्ते अलग होते हैं। जो इन रास्तों को छोड़कर चलते हैं, उन्हें शुरुआत में बहुत ही कठिन-कठोर परेशानी झेलनी पड़ती है। लेकिन अंततः कामयाब हो गए तो उनकी राह नए ज़माने की राह बन जाती है।और भीऔर भी

धन कम लोगों को किस्मत और ज्यादातर लोगों को कला और जमाने की समझ से मिलता है। इसलिए अगर आप गरीब पैदा हुए तो इसमें आपकी कोई गलती नहीं। लेकिन आप अगर गरीब रहकर ही मर गए तो इसमें सरासर गलती आपकी है।और भीऔर भी

आप कितने धन से शुरू कर रहे हैं, सफलता इससे नहीं, बल्कि इससे तय होती है कि आपके पास जो कुछ भी है, उसे आप कैसे संभालते और लगाते हैं। जो भी बौद्धिक-भौतिक संपदा आपकी है, उसके सही नियोजन व धैर्य से धनवान बना सकता है।और भीऔर भी

मूल्य वो है जो कंपनी के कर्मों से बनता है और भाव वो है जो लोग उसे देते हैं। खरीदने-बेचने वाली शक्तियों के असल संतुलन से ही निकलता है भाव। हो सकता है कि कंपनी बहुत अच्छा काम कर रही हो। उसका धंधा बढ़ रहा हो। लाभप्रदता भी बढ़ रही हो। फिर भी बाजार के लोगों में उसके शेयरों को खरीदने की दिलचस्पी न हो तो उसका भाव दबा ही रहेगा। आप कहेंगे कि अच्छी चीज़ कोऔरऔर भी

पैसा तो हर कोई कमाता है। यह कोई अनोखी या असामान्य बात नहीं है। लेकिन जिस लोगों ने भी हमें  इस मंज़िल पर पहुंचाने में मदद की है, हमें हमेशा उनका कृतज्ञ होना चाहिए। इससे हम छोटे नहीं होते, बल्कि बड़े बन जाते हैं।और भीऔर भी

क्या हम-आप जैसे सामान्य निवेशक सही स्टॉक्स के चयन में लंबी-चौड़ी टीम के साथ काम कर रहे किसी म्यूचुअल फंड के कम से कम एमबीए पढ़े फंड मैनेजर की बराबरी कर सकते हैं? शायद नहीं। लेकिन म्यूचुअल फंड में होने के नाते उसकी जो मजबूरियां हैं, हम उनसे मुक्त भी हैं। स्कीम का एनएवी (शुद्ध आस्ति मूल्य) बराबर बनाकर रखना। निवेश निकालने वाले कॉरपोरेट निकायों व बड़े निवेशकों की मांग पूरी करना। सबसे बड़ी मुश्किल म्यूचुअल फंडऔरऔर भी

किसी जमाने में सेठ लोग धर्मशालाएं और कुएं खुदवाकर खैरात का काम करते थे। लेकिन आज कोई कंपनी किसी कल्याण के लिए नहीं, बल्कि शुद्ध रूप से मुनाफा कमाने के लिए बनती है। उसके काम से अगर किसी का भला होता है तो यह उसका बाय-प्रोडक्ट है, असली माल व मकसद नहीं। वो तो ऐन केन प्रकरेण ग्राहक या उपभोक्ता की जेब से नोट लगाने के चक्कर में ही लगी रहती है। बड़े-बड़े एमबीए और विद्वान उसेऔरऔर भी

सुब्बु सब जानता है। बचत खाते की 6 फीसदी ब्याज दर पर कोटक महिंद्रा बैंक का यह विज्ञापन आपने देखा ही होगा। शेयर बाजार के बारे में भी यही कहा जाता है कि वह सब जानता है। आप उसे चौंका नहीं सकते क्योंकि उसे पहले से सब पता रहता है। लेकिन यह आंशिक सच है, पूरा नहीं। ज़िंदगी की तरह बाजार में भी चौंकने की गुंजाइश हमेशा बनी रहती है। बाजार हमेशा वर्तमान को पचाकर और भविष्यऔरऔर भी

शेयर बाजार से नोट कमाना तालाब से मछली पकड़ने जैसा काम नहीं है कि बंशी डालकर बैठ गए और फिर किसी मछली के फंसने का इंतज़ार करने लगे। शेयर बाजार में किस्मत का खेला भी कतई नहीं चलता। यहां से तो कमाने के लिए पौधे लगाकर फल-फूल पाने का धैर्य चाहिए। घात लगाकर सही मौके को पकड़ने की शेरनी जैसी फुर्ती चाहिए। और, सही मौके की शिनाख्त के जरूरी है सही जानकारी। फिर सही जानकारी से सारऔरऔर भी

बाज़ार में अजीब से उन्माद से भरी इस रैली का कोई अंत नहीं दिख रहा। कल भी और आज भी पंटर भाई लोग शॉर्ट सौदे करते रहे। तेजड़िए अगले गुरुवार तक आसानी से मोर्चा नहीं छोड़ने वाले हैं। वे जबरदस्त कैश का अंतर खींचने का यह मौका हाथ से नहीं जाने देंगे। आप यह बात खुद देख लीजिएगा। यकीन मानिए कि मंदड़ियों को इससे जो नुकसान होगा, वह उन पर बहुत-बहुत भारी पड़ेगा। पिछले 15 महीनों मेंऔरऔर भी