बाज़ार में हर तरह का सामान मिलता है। प्याज से लेकर मोबाइल और सोने के जेवर तक। इनकी उपयोगिता और उम्र भिन्न होती है। सफर में भांति-भांति के लोग मिलते हैं। लेकिन सफर की यारी ज्यादा नहीं चलती। इसी तरह कुछ कंपनियां ऐसी होती हैं जिनका साथ साल-छह महीने के लिए ही काफी होता है। इतने वक्त में उनसे मुनाफा कमाकर निकल लेना चाहिए। नहीं तो फसान हो जाती है। आज तथास्तु में ऐसी ही एक कंपनी…औरऔर भी

सरकारी कर्मचारियों को महंगाई भत्ता मिलता है तो उन्हें मुद्रास्फीति से घबराने की जरूरत नहीं। बाकी लोग महंगाई के आगे खुद को असहाय महसूस करते हैं। शेयर बाज़ार उन्हें इस असहाय अवस्था से निकाल सकता है बशर्ते वे ऐसी कंपनी में निवेश करें जो महंगाई को बराबर मात देती है। कुछ कंपनियां लागत घटाकर ऐसा करती हैं तो कुछ के उत्पाद ऐसे होते हैं जिन्हें लोग हर दाम पर खरीदते हैं। आज ही ऐसी ही एक कंपनी…औरऔर भी

कमाएंगे नहीं तो बचाएंगे क्या! बचाएंगे नहीं तो बढ़ाएंगे क्या! शेयरों में निवेश कमाने-बचाने नहीं, बल्कि जो है उसे बढ़ाने के लिए किया जाता है। हमने 4 मई को सिंटेक्स इंडस्ट्रीज़ में 45 रुपए पर तीन साल में 96 रुपए के लक्ष्य के साथ निवेश की सलाह दी थी। वो तीन हफ्ते में ही 85 रुपए तक पहुंच गया। जो चाहें 89% रिटर्न लेकर निकल सकते हैं। आज तथास्तु में एक बेहद जोखिम-भरा, लेकिन संभावनामय मिडकैप स्टॉक…औरऔर भी

महंगाई साल-दर-साल बढ़ती है। देशी घी तीन साल पहले 250 रुपए/किलो था, अभी 400 रुपए/किलो हो चुका है। फिर कंपनी के शेयरों में महंगाई क्यों नहीं आती? आती है, बल्कि सच कहें तो अच्छी कंपनियां ही महंगाई को मात दे पाती हैं। इसीलिए महंगाई को बेअसर करने के लिए उनमें धन लगाया जाता है। तीन साल पहले यहां सुझाया सुप्रीम इंडस्ट्रीज़ का शेयर 155 से 460 हो चुका है। आज तथास्तु में एक मिडकैप कंपनी…और भीऔर भी

जिस तरह गलत लोगों के बहकावे पर गलत लोगों को चुनने से राजनीति गलत नहीं हो जाती, उसी तरह गलत लोगों के कहने पर गलत कंपनियां चुनने से शेयर बाज़ार गलत नहीं हो जाता। इसका एक और उदाहरण। हमने इसी जगह 15 सितंबर 2010 को आरती ड्रग्स में निवेश की सलाह दी थी। तब उसका शेयर 137 रुपए था। अभी 372 के शिखर पर है। साढ़े तीन साल में 171.5% ऊपर! अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

अक्सर हम निवेश के लिए कोई कंपनी अंदाज़ से चुनते हैं या आलस्य कर जाते हैं कि ऊपर-ऊपर तो अच्छी दिख रही है। ऐसा निवेश ज़्यादातर धोखा देता है। वहीं, जब हम रिसर्च के दम पर निवेश करते हैं तो उसका बढ़ना लगभग तय रहता है। दो साल पहले हमने यहीं वीएसटी टिलर्स ट्रैक्टर्स के दोगुना होने की संभावना जताई थी। वो शेयर तब 480 पर था, अभी 1060 पर है। तथास्तु में एक और संभावनामय कंपनी…औरऔर भी

शेयर बाज़ार में निवेश के दो तरीके हैं। पहला, कहीं किसी से, जान-पहचान वाले या टीवी पर एनालिस्ट से सुन लिया तो दांव लगा दिया। यह एक तरह की सट्टेबाज़ी है जो 100% नुकसान ही नुकसान करती है। आज देश के करीब दो करोड़ डीमैट खातों में से आधे से ज्यादा निष्क्रिय क्यों पड़े हैं? दूसरा तरीका है वैल्यू इनवेस्टिंग। इसमें कंपनी की अंतर्निहित ताकत को देखकर निवेश किया जाता है। तथास्तु में अब आज की कंपनी…औरऔर भी

लोग कहते हैं कि भारत में निवेश की लांगटर्म स्टोरी खत्म हो गई। लेकिन ऐसा अमेरिका, जापान या जर्मनी में हो सकता है, भारत में नहीं। कारण, बड़े देशों में अर्थव्यवस्था या तो ठहराव की शिकार है या कांख-कांख कर बढ़ रही है, जबकि भारत में असली उद्यमशीलता तो अब करवट ले रही है। भारतीय अर्थव्यवस्था को कम-से-कम अभी 25 साल लगेंगे खिलने में। तब तक यहां फलता-फूलता रहेगा लांगटर्म निवेश। परखते हैं ऐसा ही एक निवेश…औरऔर भी

शेयर बाजार किसी भी आस्ति वर्ग से ज्यादा रिटर्न देनेवाला माध्यम है। यहां निवेश करने के दो ही रास्ते हैं। एक, अपनी रिसर्च के दम पर सीधे शेयरों को चुनकर निवेश करना और दो, म्यूचुअल फंड के जरिए निवेश करना। अगर आप अपनी रिसर्च नहीं कर सकते तो आपके लिए एकमात्र रास्ता म्यूचुअल फंडों की इक्विटी स्कीमों का है। वैसे, अपने स्तर पर रिसर्च मुश्किल नहीं है। हम इस कॉलम के जरिए यही साबित करने और सिखानेऔरऔर भी