केंद्र सरकार ने जापान व चीन से आयात की जानेवाली इनर्ट या अक्रिय गैसों पर पांच साल के लिए एंटी-डंपिग शुल्क लगा दिया है। ये गैसें आमतौर पर घरेलू रेफ्रीजरेटर या वाहनों के एसी में इस्तेमाल की जाती हैं। इन पर लगाया गया एंडी-डंपिंग शुल्क 0.69 डॉलर से लेकर 1.41 डॉलर प्रति किलो होगा। वित्त मंत्रालय से संबद्ध राजस्व विभाग का कहना है कि यह शुल्क अगर किसी वजह से खत्म नहीं किया गया तो अगले पांचऔरऔर भी

सरकार ने उवर्रकों के लिए पोषक तत्वों पर आधारित सब्सिडी स्कीम (एनबीएस) के तहत चालू वित्त वर्ष 2011 के लिए फॉस्फेटिक और पोटाशिक खाद का बेंचमार्क मूल्य बढ़ा दिया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इनके मूल्य ज्यादा होने और बेंचमार्क मूल्य कम होने के चलते अभी तक उर्वरक कंपनियां इनके आयात के करार नहीं कर पा रही थीं। लेकिन सरकार ने अब यह मुश्किल हल कर दी है। गुरुवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठकऔरऔर भी

यूरोप में जारी वित्तीय संकट के बावजूद भारत ने निर्यात के मोर्चे पर बेहतर प्रदर्शन किया है। मार्च में खत्म वित्त वर्ष 2010-11 में देश का निर्यात 37.5 फीसदी बढ़कर 245.9 अरब डॉलर हो गया। अकेले मार्च माह में निर्यात 43.9 फीसदी बढ़कर 29.1 अरब डॉलर रहा है। वाणिज्य व उद्योग मंत्री आनंद शर्मा ने मंगलवार को ये आंकड़े जारी किए। उन्होंने कहा कि देश का निर्यात पहली बार 200 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचा है। उल्लेखनीयऔरऔर भी

स्टील बनाने का मुख्य कच्चा माल आइरन ओर है। लेकिन देश में स्टील का उत्पादन मांग से कम होने के बावजूद हम आइरन ओर का जमकर निर्यात करते हैं। यहां तक कि भारत दुनिया में आइरन ओर का तीसरा सबसे बड़ा निर्यातक देश है। इस्पात मंत्रालय की तरफ से दी गई अद्यतन जानकारी के अनुसार अप्रैल-दिसम्‍बर 2010 के दौरान देश में 464.40 लाख टन स्टील घरेलू इस्‍तेमाल के लिए उपलब्‍ध था, जबकि इसकी मांग 518 लाख टनऔरऔर भी

देश के निर्यात कारोबार में लगातार तेजी का रुख बना हुआ है और फरवरी 2011 में इसमें 50 फीसदी की धमाकेदार वृद्धि दर्ज की गई है। इसकी बदौलत वित्त वर्ष के शुरुआती 11 महीनों में कुल निर्यात 208 अरब डॉलर से अधिक हो गया, जबकि पूरे साल का लक्ष्य 200 अरब डॉलर का था। अब उम्मीद बंधी है कि वर्ष 2010-11 में कुल निर्यात 235 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा। वाणिज्य व उद्योग मंत्रालय द्वारा शुक्रवार कोऔरऔर भी

सरकार ने दालों के निर्यात पर लगी पाबंदी और एक साल के लिए बढ़ा दी है। मौजूदा रोक की अवधि 31 मार्च 2011 को खत्म हो रही थी। लेकिन अब इसे 31 मार्च 2012 तक बढ़ा दिया गया है। विदेश व्यापार महानिदेशालय ने बुधवार को जारी एक अधिसूचना में कहा है, “दालों के निर्यात पर प्रतिबंध की मीयाद 31 मार्च 2012 तक बढ़ा दी गई है।” लेकिन यह रोक काबुली चने के निर्यात पर नहीं लागू होगी।औरऔर भी

गन्ना पेराई वर्ष 2010-11 में पहली अक्टूबर से 15 फरवरी तक देश में चीनी उत्पादन 1.34 करोड़ टन रहा है। यह पिछले वर्ष की इसी अविध के 1.15 करोड़ टन उत्पादन से 16 फीसदी ज्यादा है। खाद्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के समाचार एजेंसी प्रेस ट्रस्ट को बताया, ‘‘इस साल चीनी मिलों ने 15 फरवरी तक कुल 1.34 करोड़ टन चीनी का उत्पादन किया है। यह इससे पिछले साल की समान अवधि से 16 फीसदीऔरऔर भी

केंद्र सरकार के मुताबिक देश में चालू वर्ष 2010-11 के दौरान दाल का आयात पिछले साल के मुकाबले लगभग आधा रहेगा। इसका कारण दाल के उत्पादन में वृद्धि है। वाणिज्य सचिव राहुल खुल्लर ने राजधानी दिल्ली में कहा, ‘‘इस साल दाल का आयात पिछले साल के मुकाबले आधा रहेगा। इसका कारण देश में वर्ष 2010-11 में दाल उत्पादन का अधिक होना है। चालू वर्ष में करीब 1.66 करोड़ टन दाल उत्पादन की उम्मीद है।’’ पिछले वर्ष 2009-10औरऔर भी