स्थिरता स्वभाव से चलायमान इंसान को स्थावर बना देती है। वहीं, समस्याएं इंसान को चलने पर मजबूर कर देती हैं। मगर, समस्याओं के दौर में इंसान को मामूली समस्या भी विकराल लगती है। लेकिन यही समस्याएं तो उसे पेड़ बनकर पड़े रहने से बचाती हैं।और भीऔर भी

वही लोग, वही रिश्ते, वही राहें, वही मुश्किलें। ये सब भयावह हैं या सहयोगी, यह हमारे नजरिये पर निर्भर है। ऐसे देखो तो हिम्मत तोड़कर वे हमें अवसाद का शिकार बना सकती हैं। वैसे देखो तो वे ललकार कर हमारे सोये बल को जगा सकती हैं।और भीऔर भी