अगर आप ऑप्शन ट्रेडिंग करना चाहते हैं तो सबसे पहले यह बात स्वीकार कर लेनी चाहिए कि इसमें 88 प्रतिशत प्रायिकता ऑप्शन बेचनेवाले या राइटर के मुनाफा कमाने की होती है और केवल 12 प्रतिशत प्रायिकता इस बात की होती है कि ऑप्शन खरीदनेवाला जीतकर लाभ कमा सके। यह निष्कर्ष किसी के मन की बात नहीं, बल्कि इसे दुनिया के पहले ऑप्शन एक्सचेंज, शिकागो बोर्ड ऑफ ऑप्शन एक्सचेंज (सीबीओई) के करीब डेढ़ सौ साल के डेटा केऔरऔर भी

अप्रैल माह का आखिरी दिन। गुरुवार था तो डेरिवेटिव सौदों की एक्सपायरी या सेटलमेंट का दिन। इसके विस्तृत आंकड़ों में वह तस्वीर छिपी है जो हमें ऑप्शन ट्रेडिंग की व्यावहारिक स्थिति, उसके विस्तार व महत्व से वाकिफ करा सकती है। इसलिए आज हम इन्हीं आंकडों की तह में पैठेंगे और अब तक हासिल की गई समझ की धार को थोड़ा तेज़ करने की कोशिश करेंगे। एनएसई में कल गुरुवार, 30 अप्रैल को समूचे एफ एंड ओ (फ्यूचर्सऔरऔर भी

आज महीने का अंतिम गुरुवार होने के नाते अप्रैल के डेरिवेटिव सौदों की एक्सपायरी का दिन है। यह दिन आपके लिए बहुत अहम है क्योंकि आज ऑप्शन के भाव, निफ्टी के सेटलमेंट भाव और अलग-अलग कॉल व पुट ऑप्शन की स्थिति पर बारीकी से नज़र डालकर आप ऑप्शन ट्रेडिंग के पैटर्न को समझने का आधार बना सकते हैं, इस पाठ-श्रंखला में अब तक की दस कड़ियों में जो भी पढ़ा है और जो भी समझा है, उसेऔरऔर भी

हर इंसान को प्रेम व दोस्ती जैसी चंद चीजों के अलावा बाकी तमाम जरूरतें पूरा करने के लिए धन चाहिए। समाज के विकास के साथ धन हासिल करने के तरीके बदलते रहते हैं। फॉरेक्स, कमोडिटी व स्टॉक ट्रेडिंग आज के ज़माने का तरीका है जो पहले नहीं था। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि जापान की गृहणियां फॉरेक्स ट्रेडिंग करती हैं और वहां रिटेल फॉरेक्स बाज़ार में महिलाओं का योगदान करीब 25% है। अब परखें गुरु का गुर…औरऔर भी

विदेशी संस्थागत निवेशकों का खेल बड़ा व्यवस्थित होता है। कैश सेगमेंट में कोई स्टॉक खरीदा तो डेरिवेटिव सेगमेंट में उसके अनुरूप फ्यूचर्स बेच डाले। दोनों के भाव में 10% सालाना का अंतर हुआ तो वे मजे में आर्बिट्राज करते हैं। उनका लक्ष्य है रुपए डॉलर की विनिमय दर के असर के बाद कम से कम 6-8% कमाकर वापस ले जाना। टैक्स उन्हें देना नहीं होता। जेटली ने कृपा और बढ़ा दी। उनसे सीखते हुए अभ्यास आज का…औरऔर भी

निवेश ही नहीं, ट्रेडिंग में भी हमारा लक्ष्य होना चाहिए कि न्यूनतम रिस्क में अधिकतम फायदा कैसे कमाया जाए। तभी तो हमने इंट्रा-डे को दरकिनार कर स्विंग ट्रेड के ऊपर से शुरुआत की। किसी दिन हम कैश सेगमेंट में बाज़ार की चालढाल को ठीक से समझने लगेंगे तो डेरिवेटिव्स में भी हाथ लगा सकते हैं। पर अभी उसमें घुसना बच्चे को स्पोर्ट्स कार की ड्राइविंग सीट पर बैठा देने जैसा होगा। अब तराशते हैं बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

शेयर बाज़ार में खरीदना तो आसान है, बेचकर निकलना बेहद कठिन। खासकर तब, जब सूचकांक और स्टॉक हर दिन नया शिखर बना रहा हो। पर सुना है, इसका एक सूत्र है। स्टॉक के आरएसआई के अब तक के उच्चतम स्तर और अभी के स्तर का अंतर निकालें। देखें कि वो अंतर उच्चतम स्तर का कितना प्रतिशत है। उतना प्रतिशत स्टॉक के अभी के भाव को बढ़ा दें। वो आपके निकलने का स्तर होगा। अब बुध की बुद्धि…औरऔर भी

शेयरो की ट्रेडिंग में कामयाबी के लिए तीन चीजों की जानकारी बेहद जरूरी है। पहली यह कि बाज़ार में कौन-कौन से खिलाड़ी सक्रिय हैं और उनकी हैसियत क्या है। दूसरी यह कि भावों की चाल क्या कहती है। हमें भावों की दशा-दिशा को चार्ट पर पढने की भाषा आनी चाहिए। तीसरी और अंतिम जानकारी यह कि ठीक इस वक्त किसी स्टॉक में मांग-सप्लाई का संतुलन क्या है। इन तीनों पर महारत आवश्यक है। अब आज का व्यवहार…औरऔर भी

ट्रेडिंग कोई सीधा-सरल सहज नहीं, बल्कि जटिल खेल है। अनिश्चितता की भंवर में आपको फैसला करना होता है। फैसला इस आधार पर कि पल-पल बदलते भावों का पैटर्न क्या है? यह समझ कि भीड़ का झुकाव ठीक इस वक्त किधर है? तेजी और मंदी के खेमे में किसका पलड़ा भारी है? पूंजी बड़ी हो तो खरीदने-बेचने के सौदे साथ कर सकते हैं। लेकिन कम पूंजी में ऐसा मुमकिन नहीं। चलिए करें इस जटिलता को सुलझाने का अभ्यास…औरऔर भी

आप भीड़ का हिस्सा बने रहे, उसी तरह सोचते रहे तो हमेशा वोटर और उपभोक्ता ही बने रहेंगे, नेता-विजेता कभी नहीं बनेंगे। कंपनियां और राजनीतिक पार्टियां आपकी सोच पर अपना साम्राज्य खड़ा करती रहेंगी। आपको अपना बिजनेस खड़ा करना है तो भीड़ की सोच से ऊपर उठना पड़ेगा, भीड़ की सोच से खेलना पड़ेगा। जो ट्रेडर इस खेल में पारंगत हो जाता है, वो ऐश करता है। बाकी आते हैं, क्रैश कर जाते हैं। अब चलें आगे…औरऔर भी