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discipline (Page 2)

हर दिन मिले आत्मसम्मान को चुनौती

2017-05-01
By: अनिल रघुराज
On: May 1, 2017
In: ट्रेडिंग-बुद्ध, धन-मंत्र

अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस है तो याद दिला दें कि यह मजदूरों के आत्मसम्मान व मर्यादा को हासिल करने का दिन है। लेकिन वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग की  बात करें तो वह भी एक ऐसा बिजनेस है जहां आपके आत्मसम्मान को हर दिन चुनौती मिलती है। बाज़ार चंद मिनट में आपको गलत साबित कर सकता है। आप उससे तर्क-वितर्क भी नहीं कर सकते। आपकी निजी धारणा या अनुमान हो सकता है। पर, बाज़ार उसकी रत्ती भर परवाह नहींऔरऔर भी

कैसे रोकी जाए मासूम ट्रेडरों की ठगी

2017-04-29
By: अनिल रघुराज
On: April 29, 2017
In: ट्रेडिंग-बुद्ध, धन-मंत्र

शेयर बाजार में ट्रेडिंग का यह कॉलम शुरू हुए करीब चार साल होने जा रहे हैं। इसकी प्रेरणा तब मिली, जब हमने देखा कि हिंदी, मराठी या गुजराती भाषी तमाम लोग टिप्स पर ट्रेडिंग करते हैं। कंपनी को ऑर्डर मिलनेवाले हैं, बड़ा एफआईआई खरीदने जा रहा है, म्यूचुअल फंड की खरीद आनेवाली है या बाज़ार का कोई बड़ा खिलाड़ी हाथ लगानेवाला है। ऐसे सफेद झूठ फैलाकर मासूम ट्रेडरों को ठगा जा रहा था। मासूम ट्रेडरों की ठगीऔरऔर भी

ट्रेडिंग में न ग्रुप काम आए, न खबरें

2017-04-28
By: अनिल रघुराज
On: April 28, 2017
In: ट्रेडिंग-बुद्ध, धन-मंत्र

संघे-शक्तिः कलियुगे। आज जिसके पास संगठन और समूह है, वही जीतता है। अक्सर ट्रेडिंग में अकेले पड़ जाने के बाद हमें भी ऐसा लगता है। हम किसी न किसी ग्रुप से जुड़ने की फिराक में पड़ जाते हैं। कहीं नहीं तो फेसबुक जैसी सोशल वेबसाइट्स पर ही ग्रुप बना लेते हैं। लेकिन इससे ट्रेडिंग की सफलता में सचमुच हमें कुछ फायदा मिलता है या इसमें भी अच्छी-बुरी संगत से फर्क पड़ता है? ट्रेडरों में दो खास ग्रुपऔरऔर भी

ट्रेडिंग के घाटे-मुनाफे में बहते हॉर्मोन

2017-04-27
By: अनिल रघुराज
On: April 27, 2017
In: ट्रेडिंग-बुद्ध, धन-मंत्र

हमारे अंदर जो भी भावनाएं या विचार उठते है, उससे शरीर में खास तरह के हॉर्मोन बनते हैं। साथ ही हॉर्मोनों का स्राव हमारी मानसिक अवस्था का निर्धारण भी करता है। शेयर या किसी भी वित्तीय बाज़ार में भी यह क्रिया-प्रतिक्रिया चलती रहती है। ऐसी ट्रेडिंग के दौरान हमारी स्थिति बराबर करो या मरो की रहती है। लालच और भय की भावनाएं हमें जकड़ लेती हैं। तनाव में हमारे शरीर की एड्रेनल ग्रंथि से कोर्टिज़ॉल नामक हॉर्मोनऔरऔर भी

वित्तीय आज़ादी है मैराथन दौड़ जैसी

2017-04-26
By: अनिल रघुराज
On: April 26, 2017
In: ट्रेडिंग-बुद्ध, धन-मंत्र

जानकारी हासिल करना आजकल बड़ा आसान है। गूगल पर सर्च करो और पलक झपकते हज़ारों सूचनाएं हाज़िर। लेकिन मंथन के बाद उन्हें ज्ञान तक पहुंचाने और हुनर बनाने में भरपूर वक्त लगता है। इस दौरान किसी साधना जैसा अनुशासन बरतना होता है। इसी तरह ट्रेडिंग में जब तक अपने माफिक पद्धति पा न ली जाए, तब तक धैर्य अपनाना पड़ता है। लेकिन अक्सर किनारे पर पहुचने से ठीक पहले कश्ती डूब जाती है। असल में जानकारी याऔरऔर भी

ट्रेडिंग के लाभ नहीं, चुनौतियां भी देखें

2017-04-25
By: अनिल रघुराज
On: April 25, 2017
In: ट्रेडिंग-बुद्ध, धन-मंत्र

जब कोई शेयर या कमोडिटी जैसे वित्तीय बाज़ार में ट्रेडिग करने की सोचता है तो उसके मन में हर तरफ से लड्डू ही लड्डू फूटते हैं। कितना मज़ा आएगा! न कोई बॉस, न सुबह-सुबह ऑफिस जाने का झंझट! घर पर बैठकर अपने लैपटॉप से ट्रेडिंग। बचत से ढाई लाख रुपए भी लगाए तो महीने में 10% कमाने पर ही 25,000 आ जाएंगे। बाकी मूलधन सुरक्षित। इससे ज्यादा और क्या चाहिए रिटायरमेंट के बाद। ट्रेडिंग में उतरनेवाला हरऔरऔर भी

रिटेल का धन जाए प्रोफेशनल के पास

2017-04-24
By: अनिल रघुराज
On: April 24, 2017
In: ट्रेडिंग-बुद्ध, धन-मंत्र

कई साल पहले दिल्ली में एक बड़ी ब्रोकरेज फर्म के मुखिया से बात हो रही थी। उनको मैंने बताया कि कैसे वित्तीय संस्थाओं व बैंकों की खरीद-बिक्री को हम भावों के चार्ट पर पकड़ सकते हैं और उसके आधार पर देख सकते हैं कि कहां उसकी खरीद आ सकती है और कहां उनकी बिक्री। संस्थाओं व बड़े निवेशको की डिमांड-सप्लाई का नियम मैंने हाल-हाल में सीखा था और उसको लेकर मैं काफी उत्साहित था। लेकिन मेरे सारेऔरऔर भी

शेयर बाज़ार की ट्रेडिंग के पांच सबक

2017-04-22
By: अनिल रघुराज
On: April 22, 2017
In: ट्रेडिंग-बुद्ध, धन-मंत्र

दोस्तों! अगले हफ्ते सोमवार से शनिवार तक हम शेयर बाज़ार की ट्रेडिंग के तमाम बुनियादी पहलुओं को लेख के रूप में पेश करते रहेंगे क्योंकि हम यह आदत खुद डालना और आपको भी डलवाना चाहते हैं कि हर दिन, हर हफ्ते ट्रेडिंग करना ज़रूरी नहीं है। 1 मई, सोमवार को बाज़ार बंद है तो ट्रेडिंग बुद्ध में सलाह का अगला सिलसिला 2 मई, मंगलवार के कॉलम से शुरू होगा। लेकिन आप सब्सक्राइबरों को कोई नुकसान न हो,औरऔर भी

no new creation

न नया रचना, न पाना

2016-12-15
By: अनिल रघुराज
On: December 15, 2016
In: ऋद्धि-सिद्धि

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potential

निखारना संभावना को

2016-11-01
By: अनिल रघुराज
On: November 1, 2016
In: ऋद्धि-सिद्धि

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निवेश – तथास्तु

  • आज नहीं, कल के सूचकांक की ब्लूचिप!
    12 Apr 2026

    मध्य-पूर्व में तात्कालिक युद्ध-विराम से शेयर बाज़ार की सांस थोड़ी सामान्य हो गई। लेकिन मार्च महीने में जिस तरह एनएसई का निफ्टी-50 सूचकांक 11.31% और बीएसई का सेंसेक्स-30 सूचकांक 11.49% टूटा है, उससे इन सूचकांकों में शामिल ब्लूचिप कंपनियों के शेयर सस्ते हो गए तो सहज लालच का भाव जागा कि क्यों न ऐसी कंपनियों को लपक लिया जाए। म्यूचुअल फंड स्कीमों के मैनेजर भी सूचकांकों को बेंचमार्क बनाकर चलते हैं। उनकी सफलता का पैमाना यही है […]

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क्या आप जानते हैं?

  • हमारी आंखें बैक्टीरिया के जीन की देन!

    इंसान से लेकर हाथी, घोड़ा, गाय-बैल, सांप, छिपकली, मेढक, मगरमच्छ व चिड़ियों तक धरती पर जितने भी 69,963 किस्म के रीढ़वाले या कशेरुकी (vertebrates) जीव-जन्तु हैं, उन्होंने देखने की क्षमता वाली अपनी आंखें एक बैक्टीरिया के जीन से हासिल की है। यह सच अप्रैल 2023 में पीएनएएस (प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज) की …

अपनों से अपनी बात

  • साल में 41-112%, मिले है सिर्फ यहां!

    भारतीय अर्थव्यवस्था बढ़ रही है और आगे भी बढ़ेगी। लेकिन कहा जा रहा है कि इसका लाभ आम आदमी को पूरा नहीं मिलता। अमीर-गरीब की खाईं बढ़ रही है। बाज़ार को आंख मूंदकर गालियां दी जा रही हैं। लेकिन बाज़ार सचेत लोगों के लिए आय और दौलत के सृजन ही नहीं, वितरण का काम भी करता है। हमने तथास्तु सेवा इसीलिए शुरू की है ताकि अर्थव्यवस्था, खासकर कंपनियों के बढ़ने का लाभ निपट गरीबी से ऊपर रहनेवाले लोगों तक पहुंचाया जा सके। वे जिन्हें बैंक बहुत हुआ तो 9 प्रतिशत देता है, जबकि वास्तविक महंगाई की दर 10 प्रतिशत से ऊपर रहती है। वे भागकर जाते हैं सोने और रीयल एस्टेट में चले जाते हैं तो उनकी बचत लॉक हो जाती है। देश के काम नहीं आती। खुद उनके कितने काम आएगी, यह भी पक्का नहीं। जो पिछले साढ़े चार सालों से अर्थकाम से जुड़े हैं, वे हमारी ईमानदारी और सत्यनिष्ठा से भलीभांति वाकिफ हैं। शुरू में हम भी कच्चे थे तो बाज़ार के उस्तादों के जाल में फंस गए। गलतियां कीं। लेकिन जैसे ही समझ में आया, खटाक से उनसे किनारा कस लिया। करीब सवा साल पहले से नए सिरे से शुरू किया तो मजबूत आधार और गहन रिसर्च के साथ। उसी का नतीजा है कि हमारी सलाहें शानदार-जानदार रिटर्न दे रही हैं। पिछली बार हमने अगस्त 2013 से अगस्त 2014 तक का लेखाजोखा रखा था। अब सितंबर 2013 से सितंबर 2014 की बानगी पेश है। सितंबर 2013 में पांच रविवार थे तो पांच कंपनियां। आप नीचे की सारिणी से देख सकते हैं कि पांच में चार ने अपना (तीन से पांच साल का) लक्ष्य साल भर में ही पूरा कर लिया है, जबकि एक कंपनी 84.57 प्रतिशत रिटर्न के साथ लक्ष्य से ज़रा-सा पीछे है। तारीख कंपनी तब का भाव समय लक्ष्य 30/09/14 का भाव रिटर्न (%) 01/09/13 डॉ. रेड्डीज़ लैब 2292.90 3 साल 2815 3229.60 40.85 08/09/13 एचडीएफसी बैंक 616.20 3 साल 850 872.65 41.62 15/09/13 अतुल ऑटो 173.65 5 साल 260 367.90 111.86 22/09/13 कमिन्स इंडिया 409.25 3 साल 474 671.05 63.97 29/09/13 नवनीत एजुकेशन 53.15 3 साल 110 98.10 84.57   यहां यह भी गौर करने की बात है कि हम आमतौर पर हर महीने लार्जकैप, मिडकैप और स्मॉल कैप का संतुलन बनाकर चलते हैं। यह भी बताते हैं कि कहां पर एंट्री करें और आपके पास कुल एक लाख रुपए हों तो उस हफ्ते की कंपनी में कितना लगाना चाहिए, उसके कितने शेयर खरीदने चाहिए। मसलन, सितंबर 2013 में हमने तीन लार्जकैप, एक मिडकैप और एक स्मॉल कैप कंपनी आपके निवेश के लिए पेश की थी। इसमें से लार्ज कैप कंपनियों में डॉ. रेड्डीज़ लैब का शेयर लक्ष्य हासिल कर चुका है और यही नहीं, 24 सितंबर 2014 को 3356.60 रुपए पर 52 हफ्ते का शिखर पकड़ चुका है। एचडीएफसी बैंक भी लक्ष्य हासिल करने के साथ ही 30 सितंबर 2014 को 879.80 रुपए का शिखर हासिल कर चुका है। कमिन्स इंडिया भी लक्ष्य हासिल कर लेने के साथ 4 सितंबर 2014 को 720 रुपए पर 52 हफ्ते का शीर्ष छू चुका है। स्मॉल कैप की श्रेणी वाला स्टॉक अतुल ऑटो साल भर में 111.86 प्रतिशत का रिटर्न देकर लक्ष्य के काफी आगे निकल चुका है। यही नहीं, 12 सितंबर 2014 को वो 446.90 रुपए का शिखर भी चूम चुका है। बाकी बची मिडकैप कंपनी नवनीत एजुकेशन में तीन साल का लक्ष्य 110 रुपए था। उसका शेयर 10 सितंबर 2014 को 104.90 रुपए तक जाने के बाद 30 सितंबर को 2014 को 98.10 रुपए पर था, जो साल का 84.97 रिटर्न दिखाता है। आप ऊपर की सारिणी से देख सकते हैं कि 1 सितंबर 2013 से 30 सितंबर 2014 तक की अवधि में तथास्तु में बताई पांच कंपनियों ने न्यूनतम 40.85 प्रतिशत और अधिकतम 111.86 प्रतिशत रिटर्न दिया है। इसी दौरान एनएसई निफ्टी ने 5550.75 से 7964.80 तक जाकर 43.49 प्रतिशत और बीएसई सेंसेक्स ने 18,886.13 से 26,567.99 तक पहुंचकर 40.67 प्रतिशत का रिटर्न दिया है। दोस्तों! पुरानी बात फिर दोहरा रहा हूं कि मात्र 200 रुपए में अगर कोई सवा आपको बाज़ार से ज्यादा रिटर्न दिला रही है, वो भी आपको आपकी भाषा में अच्छी तरह कंपनी की जानकारी देकर तो क्या इस सेवा को आपका और आपको इस सेवा का लाभ नहीं मिलना चाहिए। बढ़ रही अर्थव्यवस्था का लाभ उठाइए। यकीन मानिए कि मोदी की सरकार बस एक निमित्त मात्र है। वो रहे या कोई और आए, अगले दस साल भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए जबरदस्त प्रगति के साल होने जा रहे हैं। इस दौरान एक साल में दोगुना ही नहीं, दस साल में अपनी बचत से दस गुना दौलत बनाने के मौके बहुत सारे आएंगे। दूसरे आपको बस उल्लू बनाएंगे। केवल हम ही हैं जो पूरी ईमानदारी और सत्यनिष्ठा से आपके लिए निवेश के हर रविवार को शानदार मौके लेकर आते रहेंगे। तुलसीदास की चौपाई याद कीजिए – सकल पदारथ है जन मांही, कर्महीन नर पावत नाहीं। आपके हिस्से का कुछ कर्म हम कर दे रहे हैं। बाकी तो आपको ही करना पड़ेगा। इसलिए…. सोचिए। समझिए। फैसला कीजिए। तथास्तु!!!

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ट्रेडिंग – बुद्ध

  • दंभ था चौथी का, गिरकर पहुंचे छठे पर!
    16 Apr 2026

    सच्चाई कभी धारणाओं में बंधकर नहीं चलती। वो धारणाओं को तोड़ देती है। 27 फरवरी को जीडीपी की नई सीरीज़ जारी करते वक्त सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने कहा था कि देश के रीयल जीडीपी की विकास दर वित्त वर्ष 2023-24 में 7.2%, 2024-25 में 7.1% और 2025-26 में 7.6% रही है। इसका 7% से ऊपर रहना बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि कम से कम इतनी विकास दर से ही भारत 2047 तक विकसित […]

जानिए

  • ज़ीरो-सम गेम नहीं है यह
  • ईटीएफ: चलो बाजार खरीद लें
  • मायने आईपीओ ग्रेडिंग के
  • जवाब कमोडिटी बाजार के

बूझिए

  • ओपन ऑफर, बायबैक, डीलिस्टिंग
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हमारी आंखें बैक्टीरिया के जीन की देन!

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