अनसुलझा बोझ
2012-08-08
हम अपने साथ जबरदस्त बोझा लिये फिरते हैं। अनसुलझी समस्याएं, अनसुलझे सवाल। टूटी तमन्ना, अधूरी चाह। न जाने क्या-क्या, सारा गड्डमगड्ड। जगते समय यह बोझा दिखता नहीं। लेकिन सोते ही छत्ते से निकल मधुमक्खियों की तरह टूट पड़ता है।और भीऔर भी
इच्छाओं के बिना
2011-08-02
माना कि इच्छाएं ही दुख का मूल कारण हैं। अमीर से अमीर शख्स भी और ज्यादा पाने के चक्कर में दुखी रहता है। लेकिन इच्छाएं है, तभी तो जीवन है। कला व ज्ञान-विज्ञान का स्रोत भी तो इच्छाएं ही हैं।और भीऔर भी








