कोटरों में दाने बीनती दुनिया। व्यक्ति की निजी दुनिया। व्यक्तियों से समाज, समाजों से देश और देशों से बनी दुनिया। हर किसी को मुकम्मल जहां मिल जाता तो इस तरह नहीं बनती दुनिया।और भीऔर भी

जिंदगी में जितना वॉयड होता है, चाहतें उतनी लाउड होती हैं। धंधेबाज हमारे इस रीतेपन को अमानवीय होने की हद तक भुनाते हैं। उन्हें बेअसर करना है तो हमें अपना रीतापन भरना होगा, चाहतें अपने-आप सम हो जाएंगी।और भीऔर भी