हम हिंदुस्तानी बड़े ही नहीं हो रहे। सोचते हैं कि कोई दूसरा हमारा कल्याण कर देगा। इस सोच में बंधे ट्रेडर व निवेशक शेयर बाज़ार तक में बस टिप्स खोजते हैं। इससे उन्हें तो कोई फायदा नहीं मिलता। हां, राजनेता, मंदिर, मुल्ला और टिप्सबाज़ ज़रूर ऐश करते हैं। लोगबाग यह समझने को तैयार नहीं कि उन्हें अपना भला खुद करना होगा। हमारी मदद बस 20% काम आएगी। बाकी 80% रंग लाएगी आपकी सतर्कता। अब शुक्र का चक्र…औरऔर भी

जान-पहचान बहुतों से होती है। लेकिन गहरी दोस्ती कम ही लोगों से होती है और गाढ़े-वक्त में गहरे दोस्त ही काम आते हैं। यही बात शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग पर भी लागू होती है। जान-पहचान तो आपकी तमाम शेयरों से होनी चाहिए। पर कुछ शेयरों से इतनी तगड़ी पहचान होनी चाहिए कि आप उनकी हर चाल-ढाल और नाज़-नखरे से वाकिफ हों। ट्रेडिंग पचास में नहीं, इन्हीं पांच-दस शेयरों में कीजिए तो मुनाफा कमाएंगे। अब वार मंगल का…औरऔर भी

बात बड़ी सीधी है। मांग सप्लाई से ज्यादा तो भाव बढ़ते हैं और सप्लाई मांग से ज्यादा तो भाव गिरते हैं। सामान्य बाज़ार का यह सामान्य नियम शेयर बाज़ार पर भी लागू होता है। कुशल ट्रेडर का काम है ठीक उस बिंदु को पकड़ना, जब मांग-सप्लाई में सर्वाधिक असंतुलन हो। इसी बिंदु से शेयरो के भाव पलटी खाते हैं और यही मौका होता है न्यूनतम रिस्क में अधिकतम कमाई करने का। यही सूत्र पकड़कर बढ़ते हैं आगे…औरऔर भी

बुधवार को मैंने एक फर्म से ट्रेडिंग टिप्स का एक दिन का मुफ्त ट्रायल लिया। एसएमएस आया कि लार्सन एंड टुब्रो पर उसके पास अंदर की 100% पक्की खबर है। 1000 रुपए का पुट ऑप्शन 22 में लपककर लीजिए। स्टॉप-लॉस 10, लक्ष्य 42 रुपए। उसी दिन लार्सन एंड टुब्रो के नतीजे आए। शेयर बढ़ा, पुट ऑप्शन का बेड़ा गरक। दरअसल ऐसी फर्में अंदर की खबरों के नाम पर बेवकूफ बनाती हैं। ऐसे झांसों से बचकर करें ट्रेडिंग…औरऔर भी

बस चंद दिन और। फिर विदेशी संस्थागत निवेशकों को विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) कहा जाने लगेगा क्योंकि अभी तक देश में इन पर टैक्स लगाने को लेकर जो भी उलझनें थीं, वे अब दूर हो गई है। पूंजी नियामक संस्था, सेबी ने घोषित किया है कि अब देश में सभी तरह के विदेशी निवेशकों पर एक जैसा टैक्स लगाया जाएगा। कंपनी की इक्विटी में 10% तक विदेशी निवेश एफपीआई माना जाता है। करें अब ट्रेडिंग आज की…औरऔर भी

कल एग्ज़िट-पोल आ ही रहे थे कि एक अभिन्न मित्र का फोन आया। बोले, मुझे लगता है कि दिल्ली में आम आदमी पार्टी को छब्बीस सीटें मिलेंगी। मैंने पूछा, कैसे? बोले, कुछ नहीं, बस मेरा अंतर्मन कह रहा है। लेकिन यह आपके अंतर्मन की नहीं, औरों का मन समझने की बात है। बोले, इन्ट्यूशन भी तो होता है। दोस्तों! शेयर बाज़ार में भी बहुतेरे लोग यही इन्ट्यूशन चलाकर बराबर मुंह की खाते हैं। अब रुख बाज़ार का…औरऔर भी

इंसान हैं तो भावनाएं हैं और उनका रहना स्वाभाविक भी है। लेंकिन दुनिया में कामयाबी के लिए भावनाओं पर लगाम लगाना पड़ता है। बताते हैं कि भावनात्मक दिमाग और तार्किक दिमाग में 24:1 का अनुपात होता है। पैसे के मामले में हम और भी ज्यादा भावनात्मक हो जाते हैं। हम सब कुछ जानते-समझते हुए भी दिल की ज्यादा सुनते हैं। ट्रेडिंग में कामयाबी के लिए जरूरी है कि हम दिमाग की ज्यादा सुनें। अब रुख बाज़ार का…औरऔर भी

इधर कुछ दिन दिल्ली में हूं और भांति-भांति के लोगों से मिलना-जुलना चल रहा है। कल शाम फाइनेंस जगत के खास किरदार से मुलाकात हुई। उनका कहना था कि इस बाज़ार में हमारे-आप जैसे रिटेल/आम निवेशकों का कोई भविष्य नहीं। मैंने इधर-उधर की बातें कर उनके अहं का पूरा ख्याल रखा। लेकिन मन ही मन कहा कि अगर हमारा भविष्य नहीं है तो इस देश की अर्थव्यवस्था का भी कोई भविष्य नहीं है। अब बाज़ार की दशा-दिशा…औरऔर भी

हमें वही रिस्क उठाना चाहिए जिसे पहले से नापा जा सके, बजाय इसके कि रिस्क उठाने के बाद नापा जाए कि उससे कितनी चपत लग सकती है। किसी सौदे में कितना नफा-नुकसान हो सकता है, इससे बेहतर है यह समझना कि कितना घाटा उठाकर हम कितना फायदा कमा सकते हैं। इसी तरह सफलता का रहस्य मुनाफा कमाने की जुगत में लगे रहने के बजाय घाटे से बचने में है। इन सूत्रों पर कीजिए मनन। बढ़ते हैं आगे…औरऔर भी

मूल्यहीनता के इस दौर में छिपा मूल्य खोजकर निकालते हैं। हम अवरुद्ध प्रवाह को खोलते हैं। अर्थव्यवस्था की धमनियों में धन का संचार करते हैं हम। हम भजन नहीं गाते कि जाहे विधि राखे राम, वाहे विधि रहिए और न बौद्धिक लफ्फाज़ी करते हैं। जो पल गुजर गया, उस पर नज़र रखकर हम हर आनेवाले पल की लगाम कसते हैं। समय पर सवार हैं क्योंकि हम ट्रेडर हैं। उतरते हैं शेयर बाज़ार के ऐसे ही संसार में…औरऔर भी