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निफ्टी की दशा-दिशा: 7 सितंबर 2026 सोमवार, सुबह 8.15 बजे शुरुआती रुख↓

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city

mukti aur purnata

मुक्ति और पूर्णता

2025-01-13
By: अनिल रघुराज
On: January 13, 2025
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

body and city

शरीर है शहर जैसा

2024-04-04
By: अनिल रघुराज
On: April 4, 2024
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

पास तो अंकुश, दूर तो निरंकुश

2021-04-23
By: अनिल रघुराज
On: April 23, 2021
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

cleansing not complete

सफाई अभी बाकी है दोस्त!

2017-10-18
By: अनिल रघुराज
On: October 18, 2017
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

wisdom processing

ज्ञान की प्रोसेसिंग

2016-12-02
By: अनिल रघुराज
On: December 2, 2016
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

memories

लोग छिटके, स्थान चिपके

2016-05-19
By: अनिल रघुराज
On: May 19, 2016
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

market & society

क्रांतिकारी सरकारी

2013-03-01
By: अनिल रघुराज
On: March 1, 2013
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

layers, quote in Hindi

परतों से अनजान

2013-02-27
By: अनिल रघुराज
On: February 27, 2013
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

निवेश – तथास्तु

  • जीडीपी बढ़ा, बाज़ार डूबा, गर्ग-गर्ग भिड़े!
    6 Sep 2026

    हफ्ते के पहले दिन सोमवार को घोषित हुआ कि देश के जीडीपी की रीयल या सच्ची विकास दर, महंगाई के असर को खत्म करने के बाद 7.8% रही है। मतलब भारतीय अर्थव्यवस्था पश्चिम एशिया के संकट के बावजूद बमबम कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इसे निजी उपलब्धि बताकर अपनी पीठ थपथपा रहे है। फिर भी हमारा शेयर बाज़ार मायूसी में जकड़ा रहा। हफ्ते के आखिरी ट्रेडिंग दिन, शुक्रवार तक निफ्टी-50 सूचकांक सोमवार के 24,080.40 से […]

September 2026
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क्या आप जानते हैं?

  • हमारी आंखें बैक्टीरिया के जीन की देन!

    इंसान से लेकर हाथी, घोड़ा, गाय-बैल, सांप, छिपकली, मेढक, मगरमच्छ व चिड़ियों तक धरती पर जितने भी 69,963 किस्म के रीढ़वाले या कशेरुकी (vertebrates) जीव-जन्तु हैं, उन्होंने देखने की क्षमता वाली अपनी आंखें एक बैक्टीरिया के जीन से हासिल की है। यह सच अप्रैल 2023 में पीएनएएस (प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज) की …

अपनों से अपनी बात

  • साल में 41-112%, मिले है सिर्फ यहां!

    भारतीय अर्थव्यवस्था बढ़ रही है और आगे भी बढ़ेगी। लेकिन कहा जा रहा है कि इसका लाभ आम आदमी को पूरा नहीं मिलता। अमीर-गरीब की खाईं बढ़ रही है। बाज़ार को आंख मूंदकर गालियां दी जा रही हैं। लेकिन बाज़ार सचेत लोगों के लिए आय और दौलत के सृजन ही नहीं, वितरण का काम भी करता है। हमने तथास्तु सेवा इसीलिए शुरू की है ताकि अर्थव्यवस्था, खासकर कंपनियों के बढ़ने का लाभ निपट गरीबी से ऊपर रहनेवाले लोगों तक पहुंचाया जा सके। वे जिन्हें बैंक बहुत हुआ तो 9 प्रतिशत देता है, जबकि वास्तविक महंगाई की दर 10 प्रतिशत से ऊपर रहती है। वे भागकर जाते हैं सोने और रीयल एस्टेट में चले जाते हैं तो उनकी बचत लॉक हो जाती है। देश के काम नहीं आती। खुद उनके कितने काम आएगी, यह भी पक्का नहीं। जो पिछले साढ़े चार सालों से अर्थकाम से जुड़े हैं, वे हमारी ईमानदारी और सत्यनिष्ठा से भलीभांति वाकिफ हैं। शुरू में हम भी कच्चे थे तो बाज़ार के उस्तादों के जाल में फंस गए। गलतियां कीं। लेकिन जैसे ही समझ में आया, खटाक से उनसे किनारा कस लिया। करीब सवा साल पहले से नए सिरे से शुरू किया तो मजबूत आधार और गहन रिसर्च के साथ। उसी का नतीजा है कि हमारी सलाहें शानदार-जानदार रिटर्न दे रही हैं। पिछली बार हमने अगस्त 2013 से अगस्त 2014 तक का लेखाजोखा रखा था। अब सितंबर 2013 से सितंबर 2014 की बानगी पेश है। सितंबर 2013 में पांच रविवार थे तो पांच कंपनियां। आप नीचे की सारिणी से देख सकते हैं कि पांच में चार ने अपना (तीन से पांच साल का) लक्ष्य साल भर में ही पूरा कर लिया है, जबकि एक कंपनी 84.57 प्रतिशत रिटर्न के साथ लक्ष्य से ज़रा-सा पीछे है। तारीख कंपनी तब का भाव समय लक्ष्य 30/09/14 का भाव रिटर्न (%) 01/09/13 डॉ. रेड्डीज़ लैब 2292.90 3 साल 2815 3229.60 40.85 08/09/13 एचडीएफसी बैंक 616.20 3 साल 850 872.65 41.62 15/09/13 अतुल ऑटो 173.65 5 साल 260 367.90 111.86 22/09/13 कमिन्स इंडिया 409.25 3 साल 474 671.05 63.97 29/09/13 नवनीत एजुकेशन 53.15 3 साल 110 98.10 84.57   यहां यह भी गौर करने की बात है कि हम आमतौर पर हर महीने लार्जकैप, मिडकैप और स्मॉल कैप का संतुलन बनाकर चलते हैं। यह भी बताते हैं कि कहां पर एंट्री करें और आपके पास कुल एक लाख रुपए हों तो उस हफ्ते की कंपनी में कितना लगाना चाहिए, उसके कितने शेयर खरीदने चाहिए। मसलन, सितंबर 2013 में हमने तीन लार्जकैप, एक मिडकैप और एक स्मॉल कैप कंपनी आपके निवेश के लिए पेश की थी। इसमें से लार्ज कैप कंपनियों में डॉ. रेड्डीज़ लैब का शेयर लक्ष्य हासिल कर चुका है और यही नहीं, 24 सितंबर 2014 को 3356.60 रुपए पर 52 हफ्ते का शिखर पकड़ चुका है। एचडीएफसी बैंक भी लक्ष्य हासिल करने के साथ ही 30 सितंबर 2014 को 879.80 रुपए का शिखर हासिल कर चुका है। कमिन्स इंडिया भी लक्ष्य हासिल कर लेने के साथ 4 सितंबर 2014 को 720 रुपए पर 52 हफ्ते का शीर्ष छू चुका है। स्मॉल कैप की श्रेणी वाला स्टॉक अतुल ऑटो साल भर में 111.86 प्रतिशत का रिटर्न देकर लक्ष्य के काफी आगे निकल चुका है। यही नहीं, 12 सितंबर 2014 को वो 446.90 रुपए का शिखर भी चूम चुका है। बाकी बची मिडकैप कंपनी नवनीत एजुकेशन में तीन साल का लक्ष्य 110 रुपए था। उसका शेयर 10 सितंबर 2014 को 104.90 रुपए तक जाने के बाद 30 सितंबर को 2014 को 98.10 रुपए पर था, जो साल का 84.97 रिटर्न दिखाता है। आप ऊपर की सारिणी से देख सकते हैं कि 1 सितंबर 2013 से 30 सितंबर 2014 तक की अवधि में तथास्तु में बताई पांच कंपनियों ने न्यूनतम 40.85 प्रतिशत और अधिकतम 111.86 प्रतिशत रिटर्न दिया है। इसी दौरान एनएसई निफ्टी ने 5550.75 से 7964.80 तक जाकर 43.49 प्रतिशत और बीएसई सेंसेक्स ने 18,886.13 से 26,567.99 तक पहुंचकर 40.67 प्रतिशत का रिटर्न दिया है। दोस्तों! पुरानी बात फिर दोहरा रहा हूं कि मात्र 200 रुपए में अगर कोई सवा आपको बाज़ार से ज्यादा रिटर्न दिला रही है, वो भी आपको आपकी भाषा में अच्छी तरह कंपनी की जानकारी देकर तो क्या इस सेवा को आपका और आपको इस सेवा का लाभ नहीं मिलना चाहिए। बढ़ रही अर्थव्यवस्था का लाभ उठाइए। यकीन मानिए कि मोदी की सरकार बस एक निमित्त मात्र है। वो रहे या कोई और आए, अगले दस साल भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए जबरदस्त प्रगति के साल होने जा रहे हैं। इस दौरान एक साल में दोगुना ही नहीं, दस साल में अपनी बचत से दस गुना दौलत बनाने के मौके बहुत सारे आएंगे। दूसरे आपको बस उल्लू बनाएंगे। केवल हम ही हैं जो पूरी ईमानदारी और सत्यनिष्ठा से आपके लिए निवेश के हर रविवार को शानदार मौके लेकर आते रहेंगे। तुलसीदास की चौपाई याद कीजिए – सकल पदारथ है जन मांही, कर्महीन नर पावत नाहीं। आपके हिस्से का कुछ कर्म हम कर दे रहे हैं। बाकी तो आपको ही करना पड़ेगा। इसलिए…. सोचिए। समझिए। फैसला कीजिए। तथास्तु!!!

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ट्रेडिंग – बुद्ध

  • फूफा नहीं, बब्बन हज्जाम ने खोली पोल
    7 Sep 2026

    किन्ने कहा किन्ने कहा, बब्बन हज्जाम ने कहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी सरकार की आलोचनाओं की ठीकरा नाराज़ फूफाओं पर फोड़ने में लगे हैं। लेकिन इससे पहले ही मोदी सरकार में जुलाई 2017 से जुलाई 2019 तक दो साल वित्त मंत्रालय में आर्थिक मामलात से लेकर वित्त सचिव जैसे शीर्ष पदों पर रहे सुभाष चंद्र गर्ग ने बब्बन हज्जाम बनकर उनकी ऐसी पोल-पट्टी खोली कि हंगामा बच गया। मोदी सरकार का दिखाने का अंतिम दांत जीडीपी का विकास भी हिलने लगा तो उसने इसे बचाने के लिए सरकारी मशीनरी व अर्थशास्त्रियों के साथ ही निजी विश्लेषकों तक की फौज झोंक दी। गर्ग ने बस इतना कहा था कि 2025-26 की जिस पहली तिमाही से 2026-27 की पहली तिमाही से तुलना कर सरकार ने जीडीपी की 10.3% नॉमिनल विकास दर निकाली है, उसमें नॉमिनल जीडीपी ₹86,05,365 करोड़ रहा था। सरकार ने इसे पूरा ₹6,05,173 करोड़ घटाकर ₹80,00,192 करोड़ कर दिया तो अप्रैल-जून 2026 तिमाही का नॉमिनल जीडीपी ₹88,26,871 करोड़ पहले से 10.3% ज्यादा निकला। अन्यथा वो 2.57% ही बढ़ता। इसमें से अगर 2.51% का डिफ्लेटर घटा दें तो रीयल विकास दर 7.8% नहीं, महज 0.06% ही निकलती। सरकार जीडीपी की पुरानी और नई सीरीज़ का हवाला देकर छद्म छिपा रही है। लेकिन कब तक? अब सोमवार का व्योम…

जानिए

  • ज़ीरो-सम गेम नहीं है यह
  • ईटीएफ: चलो बाजार खरीद लें
  • मायने आईपीओ ग्रेडिंग के
  • जवाब कमोडिटी बाजार के

बूझिए

  • ओपन ऑफर, बायबैक, डीलिस्टिंग
  • इश्यू मूल्य और बुक बिल्डिंग
  • गुत्थी ऋण बाजार की
  • यह कासा बला क्या है?

आज़माइए

  • मोटामोटी दस बातें शेयरों की
  • गोल्ड ईटीएफ एक, दाम अनेक
  • न करें कम एनएवी का लालच
  • फायदे म्यूचुअल फंड निवेश के

क्या आप जानते हैं?

हमारी आंखें बैक्टीरिया के जीन की देन!

इंसान से लेकर हाथी, घोड़ा, गाय-बैल, सांप, छिपकली, मेढक, मगरमच्छ व चिड़ियों तक धरती पर

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