डीलर, ट्रेडर और ब्रोकर अपनी स्क्रीन रीडिंग के आधार पर बाजार का रुझान तय करते हैं। स्क्रीन तो दिखा रहा है कि पिछले कुछ दिनों से एफआईआई की खरीद नदारद है। इसलिए बाजार नीचे फिसल रहा है और करेक्शन के लिए तैयार है। उनकी स्क्रीन रीडिंग से मुझे कोई इनकार नहीं। लेकिन यह अल्पकालिक तरीका है क्योंकि बाजार में अगर दो बजे खरीद शुरू होती है तो यही लोग इस तरह के सिद्धांत गढ़नेवाले अपने गुरुघंटालों काऔरऔर भी

किसी अच्छी चीज की सप्लाई बंधी-बंधाई हो और लोग-बाग उसे खरीदने लगें तो उसके भाव बढ़ जाते हैं। यह बहुत मोटा-सा, लेकिन सीधा-सच्चा नियम है। लेकिन जब खरीदने के काम में निहित स्वार्थ वाले खिलाड़ी लगे हों और लोगबाग उधर झांक भी नहीं रहे हों तो यह नियम कतई नहीं चलता। हमारे शेयर बाजार में यही हो रहा है। इसका एक छोटा-सा उदाहरण बताता हूं। गुरुवार को कोलकाता से बाजार के एक उस्ताद का एसएमएस 12 बजकरऔरऔर भी

शेयर तो गिरते-उठते रहते हैं। गिरते हुए बाजार में भी तमाम शेयर बढ़ जाते हैं और बढ़ते हुए बाजार में भी कई शेयर गिर जाते हैं। जैसे, कल एनएसई निफ्टी में 38.40 अंकों की गिरावट आई, लेकिन 447 शेयरों में बढ़त दर्ज की गई। इसी तरह बीएसई सेंसेक्स में 97.76 अंकों की गिरावट के बावजूद 1184 शेयर बढ़ गए। इसलिए सूचकांकों के उठने-गिरने के चक्कर में पड़ने के बजाय यह समझना ज्यादा काम का होता है किऔरऔर भी

खबरें अक्सर किसी शेयर को तात्कालिक आवेग देने का काम करती हैं। कभी-कभी यह भी होता है कि खबर को पहले ही बाजार डिस्काउंट करके चलता है तो उसके उजागर होने के फौरन बाद उसका असर नहीं होता। ऐसी ही खबर पिछले हफ्ते बाजार बंद होने के एक दिन बाद शनिवार को आई है सरकारी कंपनी आईटीआई लिमिटेड के बारे में। एक सरकारी अधिकारी के हवाले बताया गया कि आईटीआई में निर्णायक हिस्सेदारी देने के लिए नएऔरऔर भी

इधर बॉम्बे डाईंग से लेकर रेमंड, सेंचुरी टेक्सटाइल, आलोक इंडस्ट्रीज और प्रोवोग जैसी कई टेक्सटाइल कंपनियों की जमीन का हिसाब-किताब निकाला जा रहा है और पंटर भाई लोग मान रहे हैं कि जमीन से इन कंपनियों में छिपा हुआ मूल्य निकलकर सामने आएगा और इनके शेयर नई पेंग भरेंगे। पिछले दिनों इनके शेयर बढ़े भी हैं। इसलिए नहीं कि उनके मूल व्यवसाय में कोई शानदार चीज हो गई है, बल्कि इसलिए कि इनके पास काफी जमीन हैऔरऔर भी

जिंदल सॉ ओपी जिंदल समूह की अगुआ कंपनी है। तरह-तरह के ट्यूब और पाइप बनाती है। 1984 में उसने शुरुआत सॉ (सबमर्ज्ड आर्क वेल्डेड) पाइप बनाने से की थी। उसके उत्पादों का व्यापक इस्तेमाल कंस्ट्रक्शन व इंजीनियरिंग के काम में होता है। हाल ही में उसने इंफ्रास्ट्रक्चर, ट्रांसपोर्टेशन व फैब्रिकेशन के लिए जिंदल आईटीएफ नाम से अलग सब्सिडियरी बनाई है। जमा-जमाया धंधा है। प्रबंध दुरुस्त है। लक्ष्य स्पष्ट है। कंपनी बराबर फालतू चीजों से मुक्ति पाकर मूल्य-सृजनऔरऔर भी

मैं काफी समय से आपको बता रहा था कि सीमेंट क्षेत्र में कोई सुस्ती नहीं है। हालांकि मानसून के दौरान कम उठाव के चलते पहली तिमाही बुरी रही है। सीमेट के दाम प्रति बोरी 20 रुपए गिर गए और सारे एनालिस्ट आपको इससे बाहर निकलने का रास्ता दिखाने लगे। लेकिन हमने नई हलचल को सबसे पहले पकड़ा और आज सीमेंट कंपनियों ने मुंबई में प्रति बोरी दाम 10 रुपए बढ़ा दिए। आप समझ सकते हैं कि मैंऔरऔर भी

पूंजी बाजार नियामक संस्था, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने पब्लिक इश्यू (आईपीओ व एफपीओ) में रिटेल निवेशकों की निवेश सीमा को एक लाख रुपए से बढ़ाकर दो लाख रुपए करने की पेशकश की है। मजे की बात है कि इसके लिए उसने मुद्रास्फीति के बढ़ने का तर्क दिया है, जबकि शेयर के इश्यू मूल्य का कोई सीधा रिश्ता मुद्रास्फीति से नहीं होता। उसने इस बारे में एक बहस पत्र पेश किया है जिसमें सभी संबंधितऔरऔर भी

मैं ये तो नहीं कहता कि एफआईआई मूरख हैं। आखिर वे हमारे बाजार की दशा-दिशा तय करते हैं। लेकिन इतना जरूर है कि उन्हें बहुत आसानी से मूर्ख बनाया जा सकता है या ऐसा भी हो सकता है कि वे आसानी से मूर्ख बनने का स्वांग करते हों। उन्होंने अपने इर्दगिर्द 200 करोड़ रुपए के बाजार पूंजीकरण की लक्ष्मण रेखा खींच रखी है। वे वही स्टॉक इतने या इससे ज्यादा बाजार पूंजीकरण पर खरीदते हैं जिन्हें ऑपरेटरऔरऔर भी

डिशमैन फार्मास्यूटिकल्स एंड केमिकल्स (बीएसई कोड – 532526, एनएसई कोड – DISHMAN) की पहली तिमाही के नतीजे अच्छे नहीं रहे हैं। साल भर पहले की तुलना में उसकी कुल आय 243 करोड़ रुपए से 13 फीसदी घटकर 212 करोड़ रुपए और शुद्ध लाभ 39.2 करोड़ रुपए से 31 फीसदी घटकर 27.3 करोड़ रुपए रह गया है। कंपनी का सकल लाभ मार्जिन भी 28.2 फीसदी से गिरकर 25.8 फीसदी रह गया है। ऐसा तब है जब उसने अपनीऔरऔर भी