केवल सरकार के बांड सुरक्षित हैं। बाकी हर निवेश में यह रिस्क है कि जितना वादा है, कहा गया है या शुरू में सोचा है, उतना रिटर्न आखिरकार नहीं मिलेगा। अब यह निवेशक पर है कि वो आंख मूंदकर फैसला करे या सारे जोखिम का हिसाब-किताब पहले से लगाकर। इस मायने में ट्रेडर अलग हैं। वे सारा कुछ नापतौल कर न्यूनतम रिस्क लेते हैं। वे बड़ा जोखिम कतई नहीं उठाते। इस हफ्ते तो भयंकर उठापटक होनी है।…औरऔर भी

दिल्ली की कंपनी है एक्शन कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट। क्रेन, लोडर व बुलडोजर टाइप उपकरण बनाती है। रेलवे, डिफेंस और कंस्ट्रक्शन व इंफ्रास्ट्रक्चर उद्योग में इसका माल खपता है। देश में मोबाइल क्रेन का आधे से ज्यादा बाज़ार इसके पास है। शेयर सस्ता दिखता है। लेकिन कल ही आए कंपनी के नतीजे अच्छे नहीं रहे। स्मॉल कैप कंपनी है। खुद रिसर्च करके देखें कि इसमें निवेश करना चाहिए कि नहीं। हम आज दो लार्ज कैप कंपनियां लेकर आए हैं।औरऔर भी

परसों कहा गया कि एलएंडटी का 6.45% गिरना अपने साथ शेयर बाज़ार को डुबा ले गया। कल यह तोहमत उसके साथ ही साथ एसबीआई पर भी लग गई क्योंकि एलएंडटी के शेयर 6.49% और गिरे, वहीं एसबीआई को 7.96% का सदमा लगा। निफ्टी में एलएंडटी का भार 4.05% और एसबीआई का भार 2.93% है। पर असल में यह झलक है कि सस्ते धन का प्रवाह रुकने से बुलबुला कैसे पिचक सकता है। बाज़ार अब घबराने लगा है।…औरऔर भी

न्यूनतम रिस्क, अधिकतम रिटर्न। हर कोई यही चाहता है। यह चाह पूरी की जा सकती है, बशर्ते हम भरपूर नाप-जोख कर लें। बाज़ार में भगवान तो ट्रेडिंग करता नहीं। जो भी करते हैं इंसान ही करते हैं। अल्गो ट्रेडिंग की डोर इंसान ही संभालता है। कुछ इंसान बाज़ार का रुख तय करते हैं, जबकि ज्यादातर इंसान इस रुख में बहते हैं। हमें इन्हीं कुछ इंसानों की चाल को पकड़ने का हुनर सीखना है। रुख करें बाज़ार का…औरऔर भी

चीज़ कितनी भी अच्छी या काम की हो, बाज़ार में उसे भाव तभी मिलता है जब लोगों की निगाह में वो चढ़ जाती है। शेयरों के साथ भी यही होता है। लेकिन लोकतंत्र में जिस तरह मतदान गुप्त रखा जाता है, उसी तरह यहां कौन-कौन खरीद-बेच रहा है, यह जाहिर नहीं होता। संस्थागत निवेशकों का रुख पता चल जाए तो ट्रेडरों की किस्मत खुल जाती है। यह मुश्किल है पर नामुमकिन नहीं। पकड़ते हैं आज की दशा-दिशा…औरऔर भी

शेयर बाज़ार में तेज़ी का फायदा दो लोगों को मिलता है। एक, जिनके पास कंपनियों के शेयर पहले से हैं और दो, जो बदलते रुख से ताल मिलाकर फटाफट ट्रेडिंग करते हैं। कमाल की बात है कि एयरलाइन का टिकट महंगा हो जाए तो हवाई सफर करनेवाला दुखी हो जाता है, लेकिन यहां तेज़ी के दौर में शेयरों के महंगा होने पर उसे न रखनेवाला चहककर बाज़ार की तरफ दौड़ पड़ता है। सोचिए-समझिए। अब मौके की बात…औरऔर भी

इधर प्रोफेशनल ट्रेडरों से मिलना जारी है। बड़े संत मानसिकता के होते हैं ऐसे ट्रेडर। दूसरे शब्दों में कहें तो आप अगर संत मानसिकता में रहते हैं तभी ट्रेडिंग में कामयाब होते हैं। नियम है कि आप ट्रेडिंग तभी करें, जब आप मन और भावना के स्तर पर खुश हों। जिस दिन किसी से लफड़ा हुआ हो, बीवी/पति से झगड़ा हुआ हो, मन से अशांत हों, उस दिन ट्रेडिंग कतई न करें। अब सुनें आगे का हाल…औरऔर भी

साल भर पहले हमने यहीं पर पॉलि मेडिक्योर में निवेश की सलाह दी थी। तब उसका शेयर 240 के आसपास था। अभी 14 मई को 574.85 का शिखर छूने के बाद फिलहाल 512.50 रुपए पर है। 100% से ज्यादा रिटर्न दिलानेवाली ऐसी तमाम सलाहें तब मुफ्त हुआ करती थीं। लेकिन खुली मुठ्ठी में रखे हीरे का मूल्य लोगों ने नहीं समझा तो मुठ्ठी बंद करनी पड़ी। आज ऐसी कंपनी जो सीधे वॉरेन बफेट से ताल्लुक रखती है।औरऔर भी

यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया के नतीजे 14 मई को आए। पता चला कि मार्च 2013 की तिमाही में डूबत ऋणों के चलते उसका शुद्ध लाभ 79.11% घटकर 31.18 करोड़ रुपए पर आ गया। लेकिन उसका शेयर पिछले तीन दिनों में 1.63% बढ़कर कल 59.20 रुपए पर पहुंच गया। भाव कभी झूठ नहीं बोलते। फिर खराब नतीजों से वो गिरे क्यों नहीं? ऐसे सवाल ही शेयर बाजार के बारे में हमारी समझ को बढ़ाएंगे। अब नज़र आज पर…औरऔर भी

भारत ही नहीं, सारी दुनिया के शेयर बाज़ार कुलांचे मार रहे हैं। क्या अर्थव्यवस्था ही हालत सुधर गई? क्या भविष्य बड़ा सुनहरा दिखने लगा? कंपनियों के मुनाफे बहुत बढ़ गए? अपने यहां कहा जा रहा है कि मुद्रास्फीति इतनी घट गई है कि रिजर्व बैंक 17 जून को ब्याज दर में 0.25% और 30 जुलाई को 0.25% कमी करेगा। इसलिए सेंसेक्स और निफ्टी जनवरी 2011 के बाद के शिखर पर हैं। पर असली वजह कुछ और है…औरऔर भी