हर दिन 1500 से ज्यादा कंपनियों के शेयरों में ट्रेडिंग। इनमें से 200 से ज्यादा के डेरिवेटिव्स के सौदे। ऊपर से निफ्टी के फ्यूचर्स व ऑप्शंस सौदे। बड़ा आसान लगता है कि इनमें से दो-चार को पकड़कर ट्रेडिंग करना। लेकिन आम नौकरीपेशा या बिजनेस करनेवाले के लिए यहां से कमाना कतई आसान नहीं। निवेश में रिस्क कम है तो रिटर्न भी कम है। साल में 15-25% मिल जाए तो पर्याप्त माना जाना चाहिए। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

शेयर बाज़ार को दूर से जाननेवाले लोग इसे शुद्ध सट्टा बाज़ार मानते हैं। जो इसके नजदीक आते हैं, वे उछल पड़ते हैं कि यहां तो एक ही दिन में कोई-कोई शेयर 10-20% छलांग जाते हैं। वाह-वाह! इससे तो 20 दिन की ट्रेडिंग में 200-400% कमाया जा सकता है। उसके बाद जो आखिरकार घुस पड़ते हैं, उनमें से 99% रोते हैं कि उनका हाथ लगनेवाला शेयर ही डूब क्यों जाता है। सुलझाएंगे यह गुत्थी। पहले सोमवार का व्योम…औरऔर भी

बाज़ार में हर गिरा हुआ शेयर सस्ता नहीं होता। लेकिन बिजनेस मॉडल संभावनामय हो तो किन्हीं वजहों से गिरावट से सस्ता हुआ शेयर कंपनी में निवेश करने का अच्छा मौका देता है। आज हम तथास्तु में एक ऐसी ही कंपनी पेश कर रहे हैं जिसके शेयर इधर बाज़ार में गिरे हुए हैं। कंपनी को अपने कुछ हालिया फैसलों से घाटा उठाना पड़ा है। लेकिन अगले दो-तीन सालों में इसमें किया गया निवेश अच्छा रिटर्न दे सकता है।औरऔर भी

इंसान का बुनियादी स्वभाव है कि वो सोचता है हादसा दूसरों के साथ होगा, उसके साथ नहीं। इसी सोच पर चलनेवाले बहुतेरे ट्रेडर मन ही मन स्टॉप लॉस लगाते हैं, जबकि सौदे के ऑर्डर के साथ ही उसे सिस्टम में डाल देना चाहिए। ऑनलाइन ट्रेडिंग में इसकी व्यवस्था है। साथ ही उसमें ऐसे अलॉर्म की भी व्यवस्था है कि जब भाव आपकी गणना के माफिक पहुंच जाए तो सिस्टम आपको अलर्ट कर दे। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

निवेश में नियम है कि पहले कंपनी अच्छी तरह ठोंक-बजाकर चुनो। फिर कई महीने व साल तक निश्चिंत हो जाओ। इसी तरह स्विंग, मोमेंटम या पोजिशनल ट्रेड में भी बाज़ार को दिन में एक ही बार देखने के नियम का पालन करें। ट्रेडिंग करने लायक शेयर चुनें, अपनी पोजिशन चेक करें और अगले दिन शाम तक निश्चिंत हो जाएं। इससे फालतू का तनाव बच जाता है और आप सुसंगत निर्णय ले पाते हैं। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी

टेक्नोलॉज़ी ने बहुत सारी चीजें आसान कर दी हैं। लेकिन ध्यान भटकाने के साधन भी बढ़ा दिए हैं। बाज़ार में हर किसी के पास स्मार्टफोन है। फेसबुक से लेकर ट्विटर तक फैला नेटवर्क है। ऐसे में एक काम पर फोकस करना बहुत मुश्किल है। हमारी इच्छा-शक्ति भी अक्सर जवाब दे देती है। ऐसे में कुछ साधनों को छोड़ना ही उचित है। जैसे, ट्रेडिंग के लिए स्मार्टफोन के बजाय कंप्यूटर को ही तवज्जो दें। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

घर का झगड़ा हो या कोई और लफड़ा। अगर आप तनाव में हों तो कड़ा नियम बना लें कि उस दिन ट्रेडिंग को हाथ नहीं लगाना है। असल में ट्रेडिंग अपने-आप में तनावपूर्ण काम है। इसलिए हमें दूसरी चीजों का तनाव न्यूनतम रखना चाहिए। नहीं तो आपके सीधे दांव भी उल्टे पड़ सकते हैं। ध्यान दें, ट्रेडिंग जूडो-कराटे जैसा खेल है जहां जो जितना शांत है, उसके जीतने की संभावना उतनी ज्यादा है। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

न तो दूसरे पर आंख मूंदकर भरोसा, न अपने पर अतिविश्वास। इन दोनों में संतुलन बनाकर ही हम बाज़ार की वास्तविक स्थिति को अभीष्टतम स्तर तक समझ सकते हैं। इस समझ तक पहुंचने की आवश्यक शर्त यह है कि हम खुद तनावमुक्त रहे क्योंकि क्योंकि तनाव में रहने पर हम छोटे से आवेग पर भी अपना संतुलन खो सकते हैं और गलत फैसले ले सकते हैं जिसके गलत होने की आशंका ज्यादा है। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

खेती-किसानी का ज़माना लद गया। अब उद्योग-धंधे का ज़माना है। कृषि में भी बढ़ना है तो उसे घर की नहीं, उद्योग व समाज की खपत से जोड़ना पड़ेगा। खेती में परिवार की जायदाद अमूमन परिवार को ही मिलती थी। वहीं उद्योग में, खासकर लिस्टेड कंपनियों का स्वामित्व खुला है। कंपनी जम जाए तो कोई भी उसके मालिकाने में ‘शेयर’ खरीद सकता है। तथास्तु में हम ऐसी ही कंपनियां छांटने में मदद करते हैं। अब आज की कंपनी…औरऔर भी

दरअसल टिप्स का रगड़ा है ही ऐसा। जो लोग केवल टिप्स के दम पर ट्रेडिंग करना और कमाना चाहते हैं, उन्हें ट्रेडिंग का इरादा छोड़ ही देना चाहिए। हर टिप्स देनेवाला आपकी लालच पर धंधा करता है। आपका धन खींचना उसकी प्राथमिकता है, न कि आपको धन दिलाना। ट्रेडिंग में सफलता के लिए आपको अपना सिस्टम विकसित करना होगा। उसमें दूसरा मदद भर कर सकता है, नया इनपुट दे सकता है। अब करते हैं शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी