कभी ध्यान से सोचिए, मनन कीजिए कि शेयर बाजार के 95% ट्रेडर घाटा क्यों खाते हैं। इसकी वजह यह नहीं कि वे बाज़ार की चाल नहीं भांप पाते, बल्कि यह है कि उन्हें जीत-हार का संतुलन बनाना नहीं आता, घाटे को कम से कम रखना और मुनाफे को अधिक से अधिक ले जाना नहीं आता। आसान शब्दों में कहा जाए तो उन्हें जीत को संभालना और हार को पचाना नहीं आता। अब पकड़ते हैं मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

शेयर बाज़ार में जितने भी लोगों की दिलचस्पी है, वे अक्सर मिलते ही पूछते हैं कि बाज़ार यहां से कहां जाएगा। फिर खुद ही बोल पड़ते हैं कि मुझे तो लगता है निफ्टी 8200 के पार नहीं जा पाएगा क्योंकि वहां तगड़ा रेजिस्टेंस है। हर कोई एक्सपर्ट। लगता है कि बाज़ार की लगाम और भविष्य उनके ही हाथ में है। इसी सोच का नतीजा है कि बाजार में 95% ट्रेडर घाटा खाते हैं। अब सोम का व्योम…औरऔर भी

इंसानों का काम मशीनें करने लगें तो लोग क्या करेंगे? हाल की खबर है कि विप्रो 3000 सॉफ्टवेयर इंजीनियरों का काम कृत्रिम इंटेलिजेंस से करवाने जा रही है। इसी 5 जून को स्विटज़रलैंड के 76.9% लोगों ने हर देशवासी को सम्मान सहित जीवन जीने के लिए बुनियादी आय देने का प्रस्ताव खारिज़ कर दिया। मगर, जब तक लोगों की ज़रूरतें रहेंगी, उत्पादन इंसान करे या मशीनें, कंपनियां तो बनी ही रहेंगी। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

वित्तीय बाज़ार में ट्रेडिंग से कमाई का मूलमंत्र यह है कि यहां किसी भी स्थिति को अंतिम मानकर नहीं बैठा जा सकता। स्थितियां व संतुलन बहुत जल्दी बदल जाया करते हैं। लंबे निवेश में एंट्री के बाद निश्चिंतता रहती है। लेकिन ट्रेडिंग में घुसने के कई भाव और निकलने के कई भाव पकड़ने पड़ते हैं। इसी के लिए हिसाब से स्टॉप-लॉस को बराबर उठाते रहना पड़ता है ताकि हासिल मुनाफा उड़नछू न जाए। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

कंपनी के शेयरों की सप्लाई दरअसल, प्रवर्तकों के हिस्से से बचे फ्लोटिंग स्टॉक पर बंधी रहती है। संस्थाएं भी अपने शेयरधारिता हड़बड़ी में नहीं निकालतीं। शेयर की नई मांग तभी बनती है जब उस कंपनी की उपलब्धि व संभावना बढ़ जाती है। फिर खरीद बढ़ने से उसके शेयर उछल जाते हैं। यही बात चार्ट पर दिखती है। चार्ट कंपनी की काया या धंधे की छाया है। इसलिए चार्ट को सर्वोपरि मानना सही नहीं। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी

अक्सर होता यह है कि अच्छे नतीजों के बाद भी कंपनियों के शेयर गिर जाते हैं। कारण, बेहतर नतीजे आने पर पहले से खरीद चुके लोग बेचकर मुनाफा निकालने में जुट जाते हैं। इसलिए नतीजों के आधार पर कोई फैसला करने से पहले चार्ट पर देखना होता है कि कहीं वो स्टॉक ओवरबॉट अवस्था में तो नहीं चला गया है। अच्छे नतीजे तभी असर दिखाते हैं, जब वो ओवरसोल्ड अवस्था में होता है। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

बेहतर नतीजों के असर पर तीन खास कंपनियों का जिक्र करना उपयुक्त होगा जिन्हें हमने चढ़ने से ठीक पहले पकड़ा था। एचडीएफसी 1105 से 1265 तक, हिंडाल्को 94 से 107 और लार्सन एंड टुब्रो 1295 से 1495 तक मार कर चुका है। इन तीनों के नतीजों के समय बाज़ार बंद या ठंडा था। इसलिए सबको सोचने और एंट्री करने का मौका मिल गया। साल में तिमाही नतीजों के चार ऐसे मौके आते हैं। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

किसी भी अन्य बाज़ार की तरह वित्तीय बाज़ार में भी भाव मांग और सप्लाई के संतुलन से तय होते हैं। लेकिन वित्तीय बाज़ार, खासकर शेयर बाज़ार में मांग तब पैदा होती है, जब अधिकांश लोगों को लगता है कि सूचकांक या खास शेयरों के भाव बढ़नेवाले हैं। शेयरों के भाव तब बढ़ते हैं जब उन्हें खरीदनेवाले ज्यादा होते हैं और ऐसा तब होता है कि कंपनी के नतीजे उम्मीद से बेहतर होते हैं। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

मानसून, ब्याज दर, मुद्रास्फीति, डॉलर के मुकाबले रुपया, जिंसों के भाव और जीडीपी का बढ़ना या घटना ऐसे कारक हैं जो शेयर बाज़ार व शेयरों के भावों को क्षणिक रूप से चंद दिन या महीने भर के लिए प्रभावित करते हैं। लेकिन लंबे समय में कंपनी के बिजनेस की मजबूती और प्रबंधन का दमखम ही शेयरों के भाव को प्रभावित करता है। इसीलिए ट्रेडर के विपरीत निवेशक को हमेशा दूर की सोचनी चाहिए। अब आज का तथास्तु…औरऔर भी

वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग में अतीत को समझकर भविष्य को नाथा जाता है। इसके लिए कोई सर्व-स्वीकृत नियम नहीं हैं। चार्ट पर भावों का ट्रेन्ड समझना ज़रूरी है। ओवरबॉट या ओवरसोल्ड, सपोर्ट, रेजिस्टेंस व संस्थाओं की पोजिशन को समझने के लिए बहुत से इंडीकेटरों में से काम के संकेतक चुनने होते हैं। कुछ कहते हैं कि नतीजों के समय ट्रेड नहीं करना चाहिए तो कुछ लोग नतीजों के आसपास ही ट्रेड करते हैं। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी