गंवानेवालों में जिजीविसा की कमी नहीं। वे जीतने की हर विद्या सीखते हैं। टेक्निकल एनालिसिस और फिबोनाकी संख्याओं के जटिल समीकरण समझने के लिए इंटरनेट से लेकर किताबों तक की थाह लगा डालते हैं। हर तरफ गुरु तलाशते रहते हैं। लेकिन बाज़ी हाथ से फिसलती रहती है। उनके लिए कबीर का यह दोहा पूरा प्रासंगिक है कि पोथी पढ़ि-पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय। ढाई आखर प्रेम का, पढ़य सो पंडित होय। अब बुध की बुद्धि…औरऔर भी

संख्या के लिहाज़ से देखें तो शेयर बाज़ार में गंवाने वालों की संख्या बहुत ज्यादा है, जबकि कमाने वालों की संख्या बेहद कम। हालांकि हर दिन नुकसान और फायदे की रकम ठीक बराबर होती है। मोटा आंकड़ा है कि शेयर बाज़ार में 95% लोग गंवाते हैं, जबकि मात्र 5% कमाते हैं। गंवाने वालों में अधिकांश रिटेल व नौसिखिया ट्रेडर होते हैं, जबकि कमाने वालों में ज्यादातर बैंक, वित्तीय संस्थाएं और प्रोफेशनल ट्रेडर हैं। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

शेयर बाज़ार समेत किसी भी वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग एकदम ज़ीरो-सम गेम है। यहां कोई गंवाता है, तभी कोई कमाता है। इसलिए हर दिन जितने लोग दुखी रहते हैं, उतने ही लोग खुश रहते हैं। यहां ऐसा नहीं कि हर कोई बढ़ने पर ही कमाता है। बहुत-से ऐसे लोग हैं जो बाज़ार के गिरने पर कमाते हैं। दरअसल, गिरने पर कमानेवाले लोग ज्यादा ही कमाते हैं क्योंकि वे डेरिवेटिव्स में शॉर्टसेल करते हैं। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

तमाम बैंक वेल्थ मैनेजमेंट की बात करते हैं। वे बड़े ग्राहकों के लिए वेल्थ या रिलेशनशिप मैनेजर तक तय कर देते हैं। लेकिन हकीकत में ऐसे वेल्थ मैनेजर ग्राहकों की दौलत बढ़ाने के बजाय बैंकों का ही धंधा बढ़ाने का काम करते हैं। ऐसा वे ग्राहकों के हितों की कीमत पर करते हैं। बैंक के कर्मचारी होने के नाते वे उसे सबसे ऊपर, लेकिन ग्राहकों को कहीं का नहीं रखते। अब तथास्तु में आज की संभावनामय कंपनी…औरऔर भी

हमारे शेयर बाज़ार में देशी संस्थाओं में दो सबसे खास नाम हैं एलआईसी और म्यूचुअल फंडों के। ताज़ा उपलब्ध आंकडों के मुताबिक 30 सितंबर 2018 के अंत में म्यूचुअल फंडों के पास बाज़ार में लगाने के लिए 22.04 लाख करोड़ रुपए थे। वहीं, रिजर्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक एलआईसी ने मार्च 2018 के अंत तक शेयर बाज़ार में 24.15 लाख करोड़ रुपए लगा रखे थे। इसके बाद यह आंकड़ा बढ़ा ही होगा। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

व्यक्तियों से आगे बढ़ें तो शेयर बाज़ार असल में संस्थाओं का खेल है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई या एफआईआई) और देशी निवेशक संस्थाओं (डीआईआई) की बाज़ार में अहम भूमिका है। इसके कैश से लेकर डेरिवेटिव सेगमेंट तक में वे हर दिन हज़ारों करोड़ रुपए लगाते हैं। एक बेचता तो दूसरा खरीदता है। यह अलग बात है कि इस साल के शुरू से एफआईआई अमूमन बेच रहे हैं जबकि डीआईआई खरीद रहे हैं। अब देखें गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी

सच कहें तो शेयर बाज़ार इफरात धनवाले अमीरों का क्लब है जिन्हें एचएनआई या हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल्स कहा जाता है। अकेले बीएसई में ये लोग हर दिन करीब 1000 करोड़ का धंधा करते हैं। खुद ब्रोकरेज हाउसों का धंधा प्रतिदिन 500 करोड़ रुपए से ज्यादा का है। एनएसई में यह आंकड़ा इसका पांच से दस गुना होगा। इन सबके बीच रिटेल निवेशकों व ट्रेडरों की स्थिति सच्चाई से अनजान भूल-भटके मुसाफिर जैसी है। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

देश में प्रति परिवार औसत आय 16,480 रुपए/माह है। हम प्रति व्यक्ति आय में दुनिया के 188 देशों में 140वें नंबर पर है। लेकिन अपने यहां अमेरिका व चीन के बाद सबसे ज्यादा 119 डॉलर अरबपति हैं। यहां इस समय 3.43 लाख लोग ऐसे हैं जिनके पास 7.28 करोड़ रुपए से ज्यादा दौलत है। इन लाखों भारतीयों के पास ज़रूरत से बहुत-बहुत ज्यादा धन है जिसका एक हिस्सा शेयर बाज़ार में आता होगा। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

हमारे शेयर बाज़ार में डिलीवरी आधारित कैश सेगमेंट में हर दिन 30,000 करोड़ रुपए का कारोबार, जबकि डेरिवेटिव सेगमेंट में हर दिन 4.15 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का कारोबार। आखिर जिस देश में 22% लोग गरीबी रेखा से नीचे रहते हैं और 80% लोग किसी तरह गुजारे लायक कमा पाते हैं, वहां आखिर कौन-से लोग हैं जो प्रतिदिन 4.50 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा शेयर बाज़ार में दांव पर लगा देते हैं? अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

कुछ हफ्ते या महीने भर बाद शेयर बाज़ार कहां जाएगा, इसे बता पाना किसी के लिए भी संभव नहीं। हो सकता है कि बाज़ार गिरता जाए या ऊपर चढ़ जाए। पर एक बात गांठ बांध लें कि घबराहट में अपना पोर्टफोलियो खाली नहीं करना चाहिए। अगर आपने किसी कंपनी की मूलभूत मजबूती व संभावना को समझकर उसके शेयर खरीदे हैं और वह स्थिति बदली नहीं है तो उसे कतई न बेचें। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी