शांत मन शांत
सृजन व संगीत की मधुर स्वर लहरियां शांत मन से ही निकलती हैं। झंझावात से बवंडर ही उठते हैं। चीख-चिल्लाहट के माहौल में सृजन नहीं हो सकता। इसे यह कहकर जायज नहीं ठहराया जा सकता कि विनाश सृजन की जमीन तैयार करता है।और भीऔर भी
ॐ शिव ओंकारा!
सृजनात्मक विनाश और विनाशकारी सृजन का सिलसिला अटूट है। जंगल की आग के बाद पहले से ज्यादा बलवान नए अंकुर फूटते हैं। नई तकनीक पुरानी को ले बीतती है। शिव सृष्टि और समाज के इसी सतत विनाश और सृजन के प्रतीक हैं।और भीऔर भी
बैठे तो गए
हाथ पर हाथ धरे बैठना अपने विनाश को न्यौता देना है क्योंकि जब तक आप कुछ करते हो तभी तक जिंदा हो, नहीं तो नकारात्मक शक्तियां आपको खाना शुरू कर देती हैं। भव्य महल भी खंडहर बन जाते हैं।और भीऔर भी
हर कोई सृजक
विनाश के बिना सृजन नहीं होता। और, सृजन में हर किसी की अपनी-अपनी भूमिका होती है। सृजन और विनाश के देवता शंकर के गणों में कोढ़ी, लूले, लगड़े, अपाहिज और भूत-वैताल तक शुमार किए गए हैं।और भीऔर भी

