ॐ शिव ओंकारा!

सृजनात्मक विनाश और विनाशकारी सृजन का सिलसिला अटूट है। जंगल की आग के बाद पहले से ज्यादा बलवान नए अंकुर फूटते हैं। नई तकनीक पुरानी को ले बीतती है। शिव सृष्टि और समाज के इसी सतत विनाश और सृजन के प्रतीक हैं।

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