किसान बेदाम, खाद्य मुद्रास्फीति छः सालों में पहली बार शून्य से नीचे
इस समय जो-जो चीजें किसानों के पास बहुतायत में हैं, उन सभी की कीमत में भारी गिरावट के कारण खाद्य मुद्रास्फीति की दर शून्य से नीचे पहुंच गई है। वाणिज्य मंत्रालय की तरफ से गुरुवार को जारी आंकड़ों के अनुसार 24 दिसंबर 2011 को समाप्त सप्ताह में थोक मूल्यों पर आधारिक खाद्य मुद्रास्फीति की दर (-) 3.36 फीसदी रही है। लेकिन किसानों के पास जो चीजें नहीं हैं, मसलन दूध, फल, दाल व मांस-मछली व अंडे, उनऔरऔर भी
बढ़ी खाद्य मुद्रास्फीति, फिर वित्त मंत्री चिंतित
खाद्य मुद्रास्फीति का बढ़ना और हमारे वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी का चिंतित होना लगता है जैसे अब अनुष्ठान बन गया है। 24 सितंबर को खत्म हफ्ते में खाद्य मुद्रास्फीति बढ़कर 9.41 फीसदी पर पहुंच गई। इसके जारी होने के बाद वित्त मंत्री ने कहा कि यह निश्चित तौर पर चिंता का कारण है। वाणिज्य मंत्रालय की तरफ से शुक्रवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक फल, सब्जी, दूध व अंडा, मांस-मछली की कीमत में तेजी के चलते 24औरऔर भी
घटी खाद्य मुद्रास्फीति, पर नहीं मिली राहत
खाद्य मुद्रास्फीति 10 सितंबर को समाप्त सप्ताह के दौरान गिरकर 8.84 फीसदी पर आ गई। यह हफ्ते भर पहले 9.47 फीसदी दी। लेकिन आंकड़ों में इस कमी से आम आदमी को कोई राहत नहीं मिली क्योंकि मुख्य जिंसों की कीमतें अब भी ऊंची बनी हुई हैं। सरकार द्वारा गुरुवार को जारी थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) पर आधारित खाद्य मुद्रास्फीति के आंकड़ों के मुताबिक गेहूं को छोड़कर ज्यादातर जिंसों की कीमतें एक साल पहले की तुलना में महंगीऔरऔर भी
खाद्य मुद्रास्फीति नीचे, पर महंगाई बरकरार
खाद्य मुद्रास्फीति 27 अगस्त को खत्म सप्ताह में थोड़ा घटकर 9.55 फीसदी पर आ गई। हालाकि सप्ताह के दौरान दाल और गेहूं को छोड़कर अन्य सभी प्राथमिक खाद्य वस्तुओं के दाम एक साल पहले की तुलना में ऊंचे रहे। इससे पिछले सप्ताह में खाद्य मुद्रास्फीति 10.05 फीसदी थी जबकि पिछले साल 2010 के इसी सप्ताह में यह 14.76 फीसदी थी। असल में कुछ सप्ताह तक नरम रहने के बाद 20 अगस्त को समाप्त सप्ताह के दौरान खाद्यऔरऔर भी






