इस साल जून महीने में देश में आया प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) 565.6 करोड़ डॉलर रहा है। यह पिछले साल जून में आए 138 करोड़ डॉलर के निवेश से जहां लगभग 310 फीसजी ज्यादा है, वहीं 2000-01 के बाद के पिछले ग्यारह वित्त वर्षों में किसी भी महीने में आया दूसरा सबसे ज्यादा एफडीआई है। यह तथ्य एफडीआई के रूप में आई इक्विटी पर रिज़र्व बैंक की तरफ से जारी ताजा आंकड़ों से उजागर हुआ है। इनऔरऔर भी

जो लोग विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की पूंजी के दम पर शेयर बाजार में तेजी की आस लगाए हुए हैं, उनके लिए बुरी खबर है। अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष 2011-12 में देश में एफआईआई निवेश घटकर मात्र 14 अरब डॉलर रह जाएगा। यह पिछले वित्त वर्ष 2010-11 में आए 30 अरब डॉलर के एफआईआई निवेश का आधा भी नहीं है। यह अनुमान और किसी का नहीं, खुद प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (पीएमईएसी) का है।औरऔर भी

मल्टी ब्रांड रिटेल को प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के लिए खोलने पर सचिवों की समिति की बैठक अगले हफ्ते शुक्रवार, 22 जुलाई को होने जा रही है। कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में होनेवाली इस बैठक में मुख्य रूप से वाणिज्य, उद्योग, वित्त, खाद्य व उपभोक्ता और कृषि मंत्रालय के सचिव भाग लेंगे। यह समिति अपनी सिफारिशें औद्योगिक नीति व संवधर्न विभाग (डीआईपीपी) को सौंप देगी। इसके बाद डीआईपीपी इस मसले पर कैबिनेट तैयार करके सरकार को सौंपेगा।औरऔर भी

एक तरफ भारतीय दवा कंपनियां कह रही हैं कि उन्हें विदेशी अधिग्रहण से बचाया जाए। अंतर-मंत्रालयी समूह (आईएमजी) तक ने सिफारिश की है कि दवा उद्यमों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की सीमा 100 फीसदी से घटाकर 49 फीसदी कर दी जाए। दूसरी तरफ योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह आहलूवालिया ने कहा है कि ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है और दवा उद्योग में 100 फीसदी एफडीआई को कहीं से कोई आंच नहीं आने दी जाएगी। आहलूवालियाऔरऔर भी

देश में आ रहे प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की दिशा बदलने लगी है। बीते वित्त वर्ष 2010-11 में देश में आया एफडीआई साल भर पहले से 25 फीसदी घट गया था। लेकिन चालू वित्त वर्ष 2011-12 के पहले दो महीनों में इसमें 77.25 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। सोमवार को सरकार की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल-मई 2011 में देश में आया एफडीआई 778.5 करोड़ डॉलर का रहा है, जबकि पिछले साल केऔरऔर भी

तीन माह तक लगातार घटने के अप्रैल 2011 में देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) 43 फीसदी बढकर 3.12 अरब डॉलर पर पहुंच गया। इससे पिछले साल इसी माह देश में कुल 2.17 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश हुआ था। एक अधिकारी ने बताया कि एफडीआई के मौजूदा आंकड़े वैश्विक और विशेष रूप से यूरोपीय अर्थव्यवस्था में सुधार को दर्शाते हैं। इस दौरान देश में मुख्य रूप से मॉरीशस, सिंगापुर, अमेरिका, ब्रिटेन, नीदरलैंड, जापान, जर्मनी औरऔरऔर भी

मल्टी-ब्रांड रिटेल क्षेत्र को प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के लिए खोले जाने के सुझाव के बीच वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा है कि एफडीआई नियमों को और उदार बनाए जाने को लेकर बातचीत जारी है। बुधवार को केंद्रीय उत्पाद व सीमा शुल्क विभाग के मुख्य आयुक्तों व महानिदेशकों के सालाना सम्मेलन में मुखर्जी ने कहा, ‘‘एफडीआई को और उदार बनाने के लिये चर्चा जारी है।’’ उन्होंने कहा कि एफडीआई नीति को निवेशकों के अनुकूल बनाने केऔरऔर भी

आर्थिक सलाहकार कितने बिके हुए हो सकते हैं इसका नमूना पेश कर दिया है वित्त मंत्रालय के मुख्य आर्थिक सलाहकार कौशिक बसु ने। कौशिक बसु अंतर-मंत्रालयी समूह (आईएमजी) के चेयरमैन भी हैं। इस समूह का कहना है कि महंगाई पर नियंत्रण पाने के लिए मल्टी-ब्रांड रिटेल में विदेशी निवेश को मंजूरी दे देनी चाहिए। समूह ने कृषि विपणन कानून में बदलाव का भी सुझाव दिया है। यह सीधे-सीधे वॉलमार्ट जैसे विदेशी रिटेल स्टोरों की लॉबीइंग के सिवाऔरऔर भी

मॉरीशस ने बैंकिंग सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए बढ़ते ‘दबाव’ के बीच भारत को पहली बार कर चोरी की जांच में घिरे एक व्यक्ति के बैंक खातों में हुए लेनदेन की जानकारी उपलब्ध कराई हैं। आयकर विभाग इस व्यक्ति के खिलाफ कर चोरी व मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जांच कर रहा है। सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘‘उन्होंने (मॉरीशस के अधिकारियों ने) एक व्यक्ति से जुड़ी सूचना उपलब्ध कराई है। इस व्यक्ति ने वहांऔरऔर भी

भारत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के मामले में चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे आकर्षक गंतव्य बना हुआ है। जानीमी निवेश फर्म नोमुरा इंडिया ने कहा है कि देश में एफडीआई में जो गिरावट आई है, वह अस्थाई है और 2012 के शुरू में यहां विदेशी निवेश का स्तर एक बार फिर संकट से पहले की स्थिति में पहुंच जाएगा। बीते वित्त वर्ष 2010-11 में अप्रैल से जनवरी के दौरान साल दर साल आधार पर भारतऔरऔर भी