जीने की चाह में मरे जा रहे हैं। अस्सी साल, नब्बे साल, सौ साल। इत्ता जीकर क्या करोगे बापू? असली सुख तो पाया नहीं! जाना ही नहीं कि हमारे अंदर-बाहर जो भी हो रहा है, वो हो क्यों रहा है असल में।और भीऔर भी

हर पल महाभारत छिड़ी है। मोह में फंसकर अर्जुन अकर्मण्य हो जाता है। अंदर का कृष्ण ज्ञान न कराए तो हम हथियार डालकर बैठ जाते हैं। लेकिन लड़े बिना न यह धरती मिलती है और न ही वीरगति।और भीऔर भी

हम लूली-लंगड़ी सूचनाओं के आधार पर विचार फेंकने के आदी हो गए हैं। लेकिन यूं ‘ज्ञान’ बघारना विशुद्ध आत्ममुग्धता है। अरे! समाचार व सूचनाओं को तो खुलकर आने दो, विचार अपने-आप बन जाएंगे।और भीऔर भी

बजट में नए आर्थिक सुधारों के बारे में प्रधानमंत्री के दावे ने बाजार पर अपना असर दिखा दिया। यह वो मूलाधार है जिस पर सारे देश और निवेशक समुदाय को पूरा यकीन होना चाहिए। इस हकीकत के मद्देनजर बाजार को पहले तो गिरकर 5200 तक जाना ही नहीं चाहिए था। लेकिन ऐसा हुआ तो उसकी वजह चालबाजी या जोड़तोड़ है और, बाजार में जोड़-तोड़ की कोई काट तो है नहीं। मंदड़ियों का कार्टेल अकेले दम पर बाजारऔरऔर भी

विद्या विनय देती हो या नहीं, लेकिन ज्ञान जरूर मुक्त करता है। पर ज्ञान व मुक्ति के अलग-अलग स्तर हैं। जो जितना मुक्त है, उतना संपन्न है। वैसे हर संपन्न व्यक्ति का मुक्त होना जरूरी नहीं।और भीऔर भी

किताबों में अच्छी बातें पढ़ते हैं। ज्ञान की अच्छी बातें सुनते हैं। लेकिन चंद दिनों में वे उड़ जाती हैं। इसलिए क्योंकि दिमाग तो काम की जरूरी बातें ही सजोकर रखता है। इसलिए पहले जरूरत बढ़ाओ बंधुवर!और भीऔर भी

गुरु, किताब या ज्ञान के अन्य स्रोतों की भूमिका इतनी भर है कि वे हमारे मन-मस्तिष्क पर पड़े माया के परदे को हटा देते हैं। इसके बाद वास्तविक सच तक पहुंचने का संघर्ष हमें अकेले अपने दम पर करना पड़ता है।और भीऔर भी

ज्ञान और प्रकाश के माहौल में ही लक्ष्मी बढ़ती हैं, फलती फूलती हैं। अज्ञान और अंधकार के बीच वे नष्ट हो जाती हैं। दीपावली पर जलाए जानेवाले दीप प्रकाश और ज्ञान के ही प्रतीक हैं। राम की वापसी तो बस कहानी है।और भीऔर भी

जिस प्रकार ज्ञान विचारों और संस्कारों के रूप में आने वाली पीढ़ियों को प्रभावित करता है, उसी प्रकार अज्ञान भी पीढ़ी-दर-पीढ़ी की विरासत बन जाता है। इसलिए अज्ञान को मिटाते रहना हमारा दायित्व है।और भीऔर भी

यूं तो किसी भी आदत तो जड़ से मिटा देना ही अच्छा। लेकिन न मिटे तो उसे मोड़ देना चाहिए। जैसे, हम आदतन भिखारी को पैसा देते हैं। ये एक-दो रुपए हमें नई किताब खरीदने के लिए ज्ञान-पात्र में डाल देने चाहिए।और भीऔर भी