सरकार ने देश में इस साल रिकॉर्ड 8.147 करोड़ टन गेहूं उत्पादन की उम्मीद जताई है और उसका मानना है कि इसका सकारात्मक असर आर्थिक परिदृश्य पर पड़ेगा। सरकार के दूसरे अग्रिम अनुमानों के अनुसार 2010-11 फसल वर्ष में गेहूं उत्पादन 8.147 करोड़ टन रहेगा जो रिकॉर्ड है। इसी तरह आलोच्य वर्ष में कुल खाद्यान्न उत्पादन छह फीसदी बढ़कर 23.207 करोड़ टन होने का अनुमान है। वर्ष 2009-10 में यह आंकड़ा 21.82 करोड़ टन था। बेहतर खाद्यान्नऔरऔर भी

कृषि उत्पादन बढ़ने से उत्साहित सरकार ने देश की अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 8.6 फीसदी रहने का अनुमान व्यक्त किया है। इससे पिछले साल देश की आर्थिक वृद्धि दर आठ फीसदी थी। केन्द्रीय सांख्यिकीय संगठन (सीएसओ) की तरफ से सोमवार को जारी अग्रिम आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2010-11 में कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर 5.4 फीसदी रहने की संभावना है, जबकि इससे पिछले साल यह मात्र 0.4 फीसदी रही थी। सीएसओ ने इसके आधार पर देशऔरऔर भी

जुआरी इंडस्ट्रीज का शेयर कल बीएसई (कोड – 500780) में 2.50 फीसदी गिरकर 689.05 रुपए और एनएसई (कोड – ZUARIAGRO) में 2.78 फीसदी गिरकर 689.90 रुपए पर बंद हुआ है। कंपनी का ठीक पिछले बारह महीनों का ईपीएस (प्रति शेयर लाभ) 52.48 रुपए है और इस हिसाब से उसका शेयर 13.13 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा है। शेयर की बुक वैल्यू 400.14 रुपए है। बी ग्रुप का शेयर है। कल बीएसई में इसमें औसत सेऔरऔर भी

ग्रीन रिवोल्यूशन सीधे-सीधे भारत में हरित क्रांति के रूप में स्वीकार हो गई और कई दशकों तक उसका असर भी देखा गया, पर एवरग्रीन रिवोल्यूशन को सदाबहार क्रांति कहना शायद मुश्किल होगा। लेकिन भारत दौरे पर आए अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने विश्व में खाद्य सुरक्षा हासिल के लिए ग्रीन के बाद अब एवरग्रीन रिवोल्यूशन की पेशकश की है। उन्होंने राजधानी दिल्ली के हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ आयोजित संयुक्त संवाददाता सम्मेलन को संबोधितऔरऔर भी

अपने मुंह मियां मिठ्ठू बनना आसान है। लेकिन अपने बारे में खबर लिखना बहुत मुश्किल है। खबर तो दूसरों को आपके बारे में लिखनी चाहिए। लेकिन आज की अगड़म-बगड़म और शोर-शराबे में खबर लिखनेवाले इतने उलझे हैं कि वे ज्यादा मिर्च, ज्यादा नमक और ज्यादा चीनी खाकर बेस्वाद हो चुकी जीभ को तर करनेवालों को भी मात देने लगे हैं। इसलिए अपनी खबर आप तक पहुंचाना मेरा फर्ज और मजबूरी दोनों बन जाता है। वैसे, भी आजऔरऔर भी

कृषि और गैर-कृषि क्षेत्र में आय सृजन के बीच एक तरह का संरचनागत या बुनावटी असंतुलन और बेमेल है जिस तत्काल दूर करना जरूरी है। यह मानना है कृषि राज्यमंत्री प्रो. के वी थॉमस का। उन्होंने बुधवार को प्रोसेस्ड फूड, एग्री बिजनेस व बेवरेजेज पर आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मलेन की शुरुआत में कहा कि कृषि हमारे देश में 58 फीसदी से ज्यादा आबादी के लिए जीविका का मुख्य स्रोत है, लेकिन जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) मेंऔरऔर भी

चालू वित्त वर्ष 2010-11 में अप्रैल-जून की पहली तिमाही में देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की विकास दर 8.8 फीसदी रही है। इसमें सबसे ज्यादा योगदान मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र का रहा है जिसमें इस बार 12.4 फीसदी वृद्धि हुई है, जबकि पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में यह केवल 3.8 फीसदी बढ़ा था। सेवाओं में वित्तीय, बीमा व रीयल एस्टेट की वृद्धि दर 11 से घटकर 8 फीसदी रह गई है। हालांकि कंस्ट्रक्शन में 4.8 फीसदीऔरऔर भी

दूसरे सरकारी नेताओं को तो छोड़िए, हमारे वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी तक दबी जुबान से कहते रहे हैं कि खाने-पीने की चीजों के महंगा हो जाने की एक वजह लोगों की बढ़ी हुई क्रयशक्ति है। खासकर महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गांरटी जैसी योजनाओं के चलते गरीब लोगों की तरफ से खाद्यान्नों की मांग बढ़ गई। वे पहले से ज्यादा खाने लगे हैं जिसका असर खाद्य मुद्रास्फीति के बढ़ने के रूप में सामने आया है। लेकिन रिजर्व बैंकऔरऔर भी

अमेरिका भारत के कृषि क्षेत्र में घुसने की हरसंभव कोशिश कर रहा है और भारतीय कृषि बाजार को खुलवाने के लिए वह कानूनी रास्ते भी तलाश रहा है। खासकर वह चाहता है कि भारत अपने डेयरी क्षेत्र और बाजार को विदेशी निवेश व उत्पादों के लिए खोल दे। यह किसी और का नहीं, बल्कि खुद अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि रॉन किर्क का कहना है। रॉन किर्क ने गुरुवार को अमेरिकी सीनेट में सांसदों को बताया कि, “हमऔरऔर भी

अगर किसी को भारतीय अर्थव्यवस्था की सही दशा-दिशा पर शक हो तो उसे अब प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद ने दूर कर दिया है। रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर सी रंगराजन की अध्यक्षता वाली इस परिषद ने ‘इकनोमिक आउटलुक 2010-11’ नाम से जारी लगभग नब्बे पेज की रिपोर्ट में अर्थव्यवस्था के एक-एक पहलू का विवेचन किया है। उसका खास आकलन है कि इस वित्त वर्ष 2010-11 में कृषि की विकास दर 4.5 फीसदी रहेगी, जबकि बीते वित्तऔरऔर भी