eye of the butterfly

यही कोई दोपहर बाद की बेला थी। तितली रानी दो घंटे से कमरे में फंसी हुई थी। लंबी-लंबी कांच की खिड़कियों से उसे रोशनी नजर आती तो बाहर निकलने के लिए वहीं से भागने की कोशिश करती। उसमें नरम, मुलायम, नाजुक पंख पारदर्शी कांच से टकराते और वो नहीं निकल पाती। पूरी मेहनत करती। पंख पूरे ज़ोर से चलाती। लेकिन हर बार वही हश्र क्योंकि जिसे वह खुला द्वार समझ रही थी, बाहर छिटकी हरियाली तक पहुंचनेऔरऔर भी

बच्चा जन्म के कुछ दिन तक चीजों को उल्टा देखता है क्योंकि आंखें रेटिना पर उल्टी ही छवि बनाती हैं। फिर दिमाग सब कुछ सीधा दिखाने लगता है। कहीं जो हमें दिखता है, सच उसका उल्टा तो नहीं!!और भीऔर भी

बंद आंखों के सपने हमें अधूरी चाहतों व वर्जनाओं से मुक्त कराते हैं, जबकि खुली आंखों के सपने दुनिया को जीतने का हौसला देते हैं। इसलिए खुली आंखों से बंद आंखों के सपने देखना अच्छी बात नहीं है।और भीऔर भी

देखती हैं आंखें, दिखाते हैं हम। माइक्रोस्कोप से देखा तो असंख्य  बैक्टीरिया नजर आ जाते हैं। टेलिस्कोप से देखा तो दृष्टि से ओझल सितारा दिख जाता है। असली सच नंगी आंखों से देखे गए सच से बहुत बड़ा होता है।और भीऔर भी