बाजार का जो भी खेल है, यहां अपग्रेड और डाउनग्रेड गलत वक्त पर होते हैं। हमने एसकेएस माइक्रो फाइनेंस को 800 रुपए पर डाउगग्रेड किया था और अब देखिए उसका हश्र क्या है। हमने एसबीआई को 3500 रुपए पर डाउनग्रेड किया था, बाजार अब कर रहा है। हमने मुथूत फाइनेंस के बारे में नकारात्मक राय रखी और लिस्टिंग पर उसका हाल-बेहाल सामने आ गया. है। हमें यकीन है कि यह स्टॉक घटकर 123 रुपए तक आ जाएगाऔरऔर भी

सरकार ने 14 कोल ब्‍लॉक और एक लि‍ग्‍नाइट कोल ब्‍लॉक का आवंटन रद्द करने का फैसला किया है। कोयला मंत्रालय का कहना है कि इन स्‍थानों पर खनन परि‍योजनाओं का या तो कार्यान्‍वयन नहीं हो रहा था या धीमा कार्यान्‍वयन हो रहा था। इसमें निजी कंपनियों के दो और सरकारी कंपनियों के 12 कोल ब्लॉक शामिल हैं। सरकारी कंपनियों में निरस्त किए गए सबसे ज्यादा पांच कोल ब्लॉक एनटीपीसी के हैं। वैसे, तमाम खनन ब्‍लॉकों की प्रगति‍औरऔर भी

सुप्रीम कोर्ट ने मशहूर इंजीनियरिंग व कंस्ट्रक्शन कंपनी लार्सन एंड टुब्रो की उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें उसने 1300 करोड़ रुपए के सरकारी टेंडर में अपनी बोली को खारिज किए जाने को चुनौती दी थी। सरकार ने यह टेंडर 20 समुद्री गश्ती पोतों (ऑफशोर पैट्रोल वेसेल) बनाने के लिए निकाला था। गुरुवार को सुनाए गए आदेश में न्यायमूर्ति अल्तमास कबीर की अध्यक्षता वाली पीठ ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराया। हाईकोर्ट नेऔरऔर भी

अपैल खत्म, मई आ गया। अप्रैल में तो शेयर बाजार कंपनियों के नतीजों के हिसाब से डोलता रहा। जिन कंपनियों ने उम्मीद से बेहतर नतीजे घोषित किए, उनके शेयर ठीकठाक चले, जबकि जो कंपनियां बाजार की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरीं, उनके शेयरों को तोड़ दिया गया। इनमें रिलायंस इंडस्ट्रीज, इनफोसिस व सेल जैसी कंपनियां शामिल हैं। ऐसा होना एकदम स्वाभाविक था। इसलिए इसमें किसी अचंभे की बात नहीं है। वैसे, अभी अगले दो हफ्ते तक मिडऔरऔर भी

सरकार ने उवर्रकों के लिए पोषक तत्वों पर आधारित सब्सिडी स्कीम (एनबीएस) के तहत चालू वित्त वर्ष 2011 के लिए फॉस्फेटिक और पोटाशिक खाद का बेंचमार्क मूल्य बढ़ा दिया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इनके मूल्य ज्यादा होने और बेंचमार्क मूल्य कम होने के चलते अभी तक उर्वरक कंपनियां इनके आयात के करार नहीं कर पा रही थीं। लेकिन सरकार ने अब यह मुश्किल हल कर दी है। गुरुवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठकऔरऔर भी

राजद्रोह का मतलब राष्ट्रद्रोह नहीं होता। हालांकि हर सरकार यही बताने की कोशिश करती है। लेकिन राष्ट्र किसी भी राज से बहुत-बहुत ऊपर होता है। जो इस बात को समझता है, वही सच्चा देशभक्त है।और भीऔर भी

सतर्कता प्रणाली को दुरुस्त करने और भ्रष्टाचार पर प्रभावी ढंग से अंकुश लगाने के लिए केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) ने मुख्य सतर्कता अधिकारियों के काम के आकलन समेत कई उपाय करने का निर्णय किया है। सीवीसी के अधिकारियों ने कहा कि आयोग ने सभी मंत्रालयों, विभागों, सार्वजनिक इकाइयों और बैंकों समेत केंद्र सरकार के अन्य प्रतिष्ठानों को सतर्कता संबंधी सभी गतिविधियों को कड़ाई के साथ रिपोर्ट करने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि आयोग द्वारा मुख्यऔरऔर भी

अण्णा ने लाखों लोगों के सक्रिय समर्थन से जंग जीत ली है। ऐसा सिर्फ इसलिए मुमकिन हुआ क्योंकि मुद्रास्फीति के बोझ तले दबा आम आदमी भ्रष्टाचार से भयंकर रूप से त्रस्त है। लगता है जैसे, आम आदमी को भ्रष्टाचार के तंदूर में डालकर नेता व अफसर अपनी रोटियां सेंक रहे हों। दरअसल, भ्रष्टाचार मुद्रास्फीति की जड़ है। जितना ज्यादा भ्रष्टाचार, उतना ज्यादा काला धन, उतनी ही ज्यादा सरकारी अफसर की कमाई और इसके चलते आम आदमी परऔरऔर भी

व्यक्ति की नैतिकता हो सकती है। लेकिन सरकारों की कोई नैतिकता नहीं होती। सत्ता की चंडाल चौकड़ी को बचाना ही उसका चरित्र है। हां, वह अवाम की निगाह में जरूर नैतिक दिखना चाहती है।और भीऔर भी

फंडामेंटल जस के तस, फिर भी बाजार खटाखट 1000 अंक ऊपर चला गया! लोगों को अचानक अर्थव्यवस्था व कॉरपोरेट क्षेत्र की मजबूती का इलहाम हो रहा है। लेकिन हम लगातार इस सच से निवेशकों को वाकिफ कराते रहे हैं कि ताकि उनका विश्वास गिरने न पाए। हालांकि हमें यह भी पता है कि निवेशक जो देखते-सुनते हैं, अफवाहों की ताकतवर मशीनरी जैसा उन्हें समझाती है, वे उसी में बह जाते हैं। हर कोई अर्थशास्त्री, राजनीतिज्ञ और मार्केटऔरऔर भी