सारा खेल गणनाओं और सही समय पर सही सूचनाओं को पकड़ने का है। याद करें 24 जनवरी को हमने कहा था – जागरण में 10% बस 10-15 दिन में। उसके एक दिन पहले 23 जनवरी को जागरण प्रकाशन का शेयर बीएसई में 98.15 रुपए पर बंद हुआ था। हमने कहा था कि यह 110 रुपए को पार कर सकता है। कल, 7 फरवरी को हमारे लिखे को 14 दिन ही पूरे हुए और जागरण का शेयर 114.50औरऔर भी

जो लोग भी शेयर बाजार में दिलचस्पी रखते हैं, वे एस पी तुलसियान को पहचानते जरूर होंगे क्योंकि तुलसियान जी दूसरे चैनलों पर तो नहीं, लेकिन सीएनबीसी टीवी-18 और आवाज़ पर बराबर दिखते रहते हैं। एनालिस्ट हैं। शेयरों को चुनकर निवेश की सलाह भी देते रहते हैं। उन्होंने करीब ढाई महीने पहले 21 नवंबर 2011 को तमाम तथ्य व तर्कों के आधार पर टेक्नो इलेक्ट्रिक एंड इंजीनियरिंग कंपनी में निवेश की सलाह दी थी। उसके नौ दिनऔरऔर भी

पानी अपने बहने का रास्ता खुद ढूंढ लेता है। लेकिन उसके संचय के लिए सायास टंकी या तालाब बनवाना पड़ता है। उसी तरह पैसा बहाने के लिए कुछ करने की जरूरत नहीं होती। लेकिन उसके संचय व सही नियोजन के लिए मशक्कत करनी पड़ती है। रातोंरात धन बनता नहीं, उड़ता है। इसलिए कभी भी खटाखट नोट बनाने के चक्कर में न पड़ें। धैर्य रखें। शेयर बाजार में बराबर ट्रेड हो रही करीब 3000 कंपनियों में से कमऔरऔर भी

चीनी देश का इकलौता उद्योग है जहां बीस साल पहले उठी उदारीकरण की बयार अभी तक नहीं पहुंची है। कच्चे माल, गन्ने की कीमत सरकार तय करती है। केंद्र ही नहीं, राज्य सरकारों तक का इसमें दखल रहता है। फिर अंतिम उत्पाद, चीनी का एक हिस्सा लेवी के बतौर सरकार खुद तय की गई कीमत पर ले लेती है। सरकार के इतने अंकुश के बावजूद हालात दुरुस्त नहीं हैं और किसानों व चीनी मिलों में ठनी रहतीऔरऔर भी

केन्नामेटल इंडिया मूलतः विदेशी कंपनी है। औद्योगिक उत्पादन में इस्तेमाल होनेवाले एडवांस किस्म के टूल्स, टूल सिस्टम और इंजीनियरिंग कंपोनेंट बनाती है। मूल अमेरिकी कंपनी केन्नामेटल का गठन 1934 में हुआ था। साल 2002 में उसने मशीन टूल्स के धंधे में लगे बहुराष्ट्रीय समूह विडिया को खरीद लिया तो उसकी भारतीय इकाई उसकी हो गई और उसने केन्नामेटल इंडिया का नाम अपना लिया। इसके जरिए अमेरिकी कंपनी का इरादा भारत व चीन के उभरते बाजारों को पकड़नेऔरऔर भी

रेप्रो इंडिया प्रिंटिंग व पब्लिशिंग के काम में लगी स्मॉल कैप कंपनी है। करीब तीन दशक से धंधे में है। खासतौर पर शिक्षा से संबंधित किताबें छापती है, भौतिक व डिजिटल दोनों स्वरूप में। कामकाज मुंबई से करती है। दो संयंत्र नवी मुंबई और सूरत के सचिन एसईज़ेड में हैं। धंधा देश ही नहीं, विदेश तक फैला है। करीब 60 फीसदी बिक्री विदेश से आती है। वाणिज्य मंत्रालय द्वारा गठित निर्यात प्रोत्साहन परिषद कैपेक्सिल की तरफ सेऔरऔर भी

नहीं समझ में आता कि शेयर बाजार में यह किसके करमों की गति और कौन-सी होनी है जो सब कुछ अच्छा होते हुए भी किसी कंपनी के शेयर के साथ बुरा हो जाता है। सही संदर्भ के लिए पहले संत कबीर का पूरा पद, “करम टारे नाहिं टरी। मुनि वसिष्ठ से पण्डित ज्ञानी साधि के लगन धरी। सीता हरन मरन दसरथ को, वन में बिपत परी। कहं वह फन्द कहां वह पारिधि, कहं वह मिरग चरी। कोटिऔरऔर भी

ज़िंदगी कभी एकसार नहीं हो सकती। उसमें उतार-चढ़ाव आते ही हैं। इसी तरह शेयर बाजार और अलग-अलग शेयरों के साथ उतार-चढ़ाव बड़ा स्वाभाविक है। यहां से कमाने के लिए बड़ा धैर्य रखना पड़ता है। खासकर तब, मामला लांग टर्म या लंबे समय का है। हमने इसी कॉलम में ग्रेफाइट इंडिया के बारे में सबसे पहले 4 मई 2010 को लिखा था। तब इसका दो रुपए अंकित मूल्य का शेयर 104 रुपए के आसपास चल रहा था औरऔरऔर भी

रिजर्व बैंक गवर्नर डी सुब्बाराव ने साफ कह दिया है कि ब्याज दरों के बढ़ने का चक्र अब पूरा हो गया है और आगे इनमें कमी ही आएगी। ऊपर से लगता है कि ब्याज दर ऊंची रहने से बैंकों को फायदा होता है। लेकिन हकीकत यह है कि ब्याज घटने से बैंकों का धंधा बढ़ता है। ब्याज घटने और धंधा बढ़ने की इसी उम्मीद में बैंकों के शेयर अब बढ़ने लगे हैं। कल सेंसेक्स 1.46 फीसदी बढ़ाऔरऔर भी

मैं कोई लंबी-चौड़ी बात नहीं करता। क्या करूं! लंबी नहीं, छोटी नजर है अपनी। साल-दो साल भी नहीं, दस-पंद्रह दिन की सोचता हूं। किसी की टिप्स नहीं, ठोस खबरों पर काम करता हूं। इन्हीं के आधार पर आपको बता रहा हूं कि जागरण प्रकाशन में तेजी आनेवाली है। इसका शेयर दस-पंद्रह दिन में 110 रुपए को पार कर सकता है। यानी, इसमें खटाखट दस फीसदी तक का रिटर्न मिल सकता है। पांच फीसदी तो कहीं नहीं गया।औरऔर भी