सुप्रजीत इंजीनियरिंग है तो स्मॉल कैप कंपनी। इक्विटी 12 करोड़ रुपए है और बाजार पूंजीकरण 240 करोड़ रुपए के आसपास। लेकिन देश में वाहनों के केबल बनानेवाली सबसे बड़ी कंपनी है। वह गाड़ियों के स्पीडोमीटर भी बनाती है। कंपनी के तार विदेश तक फैले हैं। करीब छह साल पहले 2006 में इसने एक ब्रिटिश कंपनी गिल्स केबल्स का अधिग्रहण किया था जिसका नाम अब सुप्रजीत यूरोप लिमिटेड कर दिया गया है। घरेलू बाजार की मांग को पूराऔरऔर भी

शेयर बाजार या किसी खास शेयर में बढ़त के दो ही आधार होते हैं। एक, अर्थव्यवस्था या कंपनी के मजबूत होते फंडामेंटल। दो, बढ़ी हुई तरलता, यानी खरीदने के लिए ज्यादा रकम का आना। इस साल जनवरी से लेकर अब तक चली तेजी की बड़ी वजह है विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) द्वारा किया गया 7.03 अरब डॉलर (34,900.80 करोड़ रुपए) का शुद्ध निवेश। सेबी के मुताबिक इसमें से केवल फरवरी में किया गया निवेश 4.96 अरब डॉलरऔरऔर भी

जिस तरह गहरा पानी शांत बहता है, कम गहरा पानी थोड़ा ज्यादा और ज्यादा छिछला पानी कुछ ज्यादा ही उछलता है, उसी तरह का हाल शेयर बाजार में लार्ज कैप, मिड कैप और स्मॉल कैप स्टॉक्स का रहता है। यह बाजार का ऐसा स्वभाव है जिसे हम बदल नहीं सकते। समझदारी इसी में है कि इसी स्वभाव के मद्देनज़र निवेश और रिटर्न का हिसाब-किताब बैठाया जाए। इसी से फैसला किया जाए कि कहां लंबे समय का निवेशऔरऔर भी

एसआरएफ लिमिटेड भारतीय कॉरपोरेट जगत के मशहूर नाम भरतराम से जुड़े दिल्ली के डीसीएम समूह से ताल्लुक रखती है। करीब चार दशकों से केमिकल्स, इंजीनियरिंग प्लास्टिक, पैकेजिंग फिल्म और टेक्निकल टेक्सटाइल्स के धंधे में सक्रिय है। टेक्निकल टेक्सटाइल्स में टायर कॉर्ड, बेल्टिंग फैब्रिक, कोटेड फैब्रिक, लैमिनेटेड फैब्रिक व औद्योगिक यार्न बनाती है तो केमिकल्स में वह फ्लूरो केमिकल्स व फ्लूरो स्पेशयलिटीज बनाती है जो रेफ्रिजरेशन में इस्तेमाल होते हैं। कंपनी के उत्पादन संयंत्रों का जाल हरियाणा, राजस्थान,औरऔर भी

काठ की हांडी दोबारा नहीं चढ़ती है और अच्छी चीजें बाज़ार की नज़रों से कभी बच नहीं सकतीं। हम देखें या न देखें, लोगों की पारखी निगाहें ताड़ ही लेती हैं कि मूल्य कहां पक रहा है। नहीं तो क्या वजह है कि सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी, इलाहाबाद बैंक का जो शेयर महीने भर पहले 130 रुपए पर डोल रहा था, वह बिना किसी ट्रिगर या खेल के 195 रुपए पर पहुंच चुका है। महीने भर मेंऔरऔर भी

अरंडी बड़े ही जीवट वाला ऐसा पौधा है जो देश में उत्तर से दक्षिण तक कहीं भी आपको सड़क किनारे उगा हुआ मिल जाएगा। गुजरात, राजस्थान व आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में जमकर इसकी व्यावसायिक खेती होती है। भारत दुनिया में अरंडी व इससे बने उत्पादों का सबसे बड़ा उत्पादक है। दुनिया के बाजार का 65 फीसदी हिस्सा इसके पास है। अरंडी की खली से लेकर तेल तक में औषधीय गुण होते हैं। हिंदी भाषी इलाकों केऔरऔर भी

हमें अपने निवेश के प्रति बड़ा निर्मम होना चाहिए। लक्ष्य पूरा हुआ, खटाक से कमाकर निकल लिए। कोई स्टॉक खरीद मूल्य से 25 फीसदी नीचे चला गया तो बिना मोह पाले उसे नमस्कार बोल डाला। डिवीज़ लैब में निवेश की सलाह हमारे चक्री महाशय ने सबसे पहले 27 अप्रैल 2011 को दी थी। तब इसका दो रुपए अंकित मूल्य का शेयर 715 रुपए पर था। तीन महीने में ही यह करीब 18 फीसदी बढ़कर 28 जुलाई 2011औरऔर भी

जयश्री टी एंड इंडस्ट्रीज़ के दिसंबर तिमाही के नतीजे बड़े खराब रहे हैं। चाय और चीनी के दोनों ही धंधों में उसका मुनाफा घटा है। चाय सेगमेंट से बिक्री साल भर पहले की समान तिमाही से मात्र 5.7 फीसदी बढ़कर 104.93 करोड़ से 110.91 करोड़ रुपए हुई, पर यहां से हुआ शुद्ध लाभ 22.6 करोड़ से घटकर 9.33 करोड़ रुपए पर आ गया। चीनी में कंपनी ने देरी से पेराई शुरू की तो इस सेगमेंट की बिक्रीऔरऔर भी

पानी अपने बहने का रास्ता खुद ढूंढ लेता है। लेकिन उसके संचय के लिए सायास टंकी या तालाब बनवाना पड़ता है। उसी तरह पैसा बहाने के लिए कुछ करने की जरूरत नहीं होती। लेकिन उसके संचय व सही नियोजन के लिए मशक्कत करनी पड़ती है। रातोंरात धन बनता नहीं, उड़ता है। इसलिए कभी भी खटाखट नोट बनाने के चक्कर में न पड़ें। धैर्य रखें। शेयर बाजार में बराबर ट्रेड हो रही करीब 3000 कंपनियों में से कमऔरऔर भी

देश की तेल मार्केटिंग कंपनियों की अंडर-रिकवरी दिसंबर तिमाही में लगभग 34,000 करोड़ रुपए की हो सकती है। इसमें से सबसे ज्यादा करीब 19,000 करोड़ की अंडर-रिकवरी इंडियन ऑयल की होगी। यह आंकड़े इंडियन ऑयल के वित्त निदेशक पी के गोयल ने सोमवार को एक संवाददाता सम्मेलन में पेश किए। इस खबर के आने के बाद सभी तेल कंपनियों के शेयरों के भाव घट गए। बता दें कि सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियां – इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियमऔरऔर भी