दुनिया में नाम कमाने के लिए कभी कोई फूल नहीं खिलता। कोई विद्रोही कभी नाम कमाने के लिए शहीद नहीं होता। लेकिन ज़मीन में गड़ी हुई देहों की ख़ाक से, शरीर की मिट्टी से, धूल से, खिलेंगे गुलाबी फूल। सही है कि विद्रोही अनाम ही रह जाएगा।और भीऔर भी

इस ज़माने में पैरों से नीचे की ज़मीन इतनी तेज़ी से खिसक रही है कि अपनी सुध खुद नहीं ली तो दूसरे को आपकी परवाह की फुरसत नहीं। न सरकार को जनता की सुध है और न ही संतों को। यहां तो हर किसी को अपनी ज़मीन बचाने की पड़ी है।और भीऔर भी